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Friday, 16 November 2012
सजधज कर मेरी जान जब पटाखा बन जाती है
सजधज कर मेरी जान जब पटाखा बन जाती है
अनार सी चलती है फुलझड़ी सी खिलखिलाती है
मैं फुस्स की आवाज के साथ खामोश हो जाता हूँ
मुझे बम की तरह गुस्से में जब वो धमकाती है
...
अनार सी चलती है फुलझड़ी सी खिलखिलाती है
मैं फुस्स की आवाज के साथ खामोश हो जाता हूँ
मुझे बम की तरह गुस्से में जब वो धमकाती है
...
नाराजगी की सौ बात पर हकीकत तो यही है
मैं दीया हूँ उसका तो वो मेरी बाती है
मन में अँधेरा ना रहने का यही सबब है यारो
वो चिराग बन दिल की मुंडेरो पर झिलमिलाती है
मेरे हिस्से की खुशियाँ भी उसे ही मिले बेचैन
काश दिवाली पर दुआ अगर कबूल हो जाती है
See Moreमैं दीया हूँ उसका तो वो मेरी बाती है
मन में अँधेरा ना रहने का यही सबब है यारो
वो चिराग बन दिल की मुंडेरो पर झिलमिलाती है
मेरे हिस्से की खुशियाँ भी उसे ही मिले बेचैन
काश दिवाली पर दुआ अगर कबूल हो जाती है
Sunday, 11 November 2012
मार डालेगा मुझको शोर बम और पटाखों का
दिवाली बिन तेरे कैसे मनाऊंगा बता तो दे
क्या रोने से खुद को रोक पाऊंगा बता तो दे
मार डालेगा मुझको शोर बम और पटाखों का
मैं ऐसे में कहाँ खुद को छिपाऊंगा बता तो दे
...
क्या रोने से खुद को रोक पाऊंगा बता तो दे
मार डालेगा मुझको शोर बम और पटाखों का
मैं ऐसे में कहाँ खुद को छिपाऊंगा बता तो दे
...
नोचे है कलेजे को तेरा गम लम्हा दर लम्हा
मिठाइयां क्या सोचकर मैं खाऊंगा बता तो दे
दिखाना था यही दिन तो क्यूं नजदीक आया था
सचमुच कसूर अपना समझ जाऊंगा बता तो दे
तुझे नही भूल पाया हूँ मुझे अ भूलने वाले
क्या उम्र भर ना मैं याद आऊंगा बता तो दे
चैन बेचैन ने माँगा था कोई दौलत नही मांगी
क्या ढंग से मैं कभी मुस्कुराऊंगा बता तो दे
मिठाइयां क्या सोचकर मैं खाऊंगा बता तो दे
दिखाना था यही दिन तो क्यूं नजदीक आया था
सचमुच कसूर अपना समझ जाऊंगा बता तो दे
तुझे नही भूल पाया हूँ मुझे अ भूलने वाले
क्या उम्र भर ना मैं याद आऊंगा बता तो दे
चैन बेचैन ने माँगा था कोई दौलत नही मांगी
क्या ढंग से मैं कभी मुस्कुराऊंगा बता तो दे
लो जिंदगी मैं तो चला आज मिलने कज़ा से
अपना रस्ता अपनी मंजिल मुबारक हो तुझे
लो जिंदगी मैं तो चला आज मिलने कज़ा से
और ज्यादा सहन करना मेरे बस का नही
तंग आ गया हूँ तुम्हारी नखरीली अदा से
मिली इबादत के बदले में नरक की सजा
क्या कसूर था पूछूँगा मैं जाकर खुदा से
उसकी बेरुखी तो बाद में असर करती
दामन जला बैठा मैं अपनी ही वफा से
धरा रह गया जिंदादिली का ज़ज्बा बेचैन
लो हार गया मैं साँसे जिंदगी की जुआ से
लो जिंदगी मैं तो चला आज मिलने कज़ा से
और ज्यादा सहन करना मेरे बस का नही
तंग आ गया हूँ तुम्हारी नखरीली अदा से
मिली इबादत के बदले में नरक की सजा
क्या कसूर था पूछूँगा मैं जाकर खुदा से
उसकी बेरुखी तो बाद में असर करती
दामन जला बैठा मैं अपनी ही वफा से
धरा रह गया जिंदादिली का ज़ज्बा बेचैन
लो हार गया मैं साँसे जिंदगी की जुआ से
Saturday, 10 November 2012
Wednesday, 7 November 2012
आह कलेजे से निकली हाय हाय हाय
नहा धोकर जब उसने बाल बिखराए
आह कलेजे से निकली हाय हाय हाय
सांसो में बर्फ सी जम गई आँखों के रस्ते
मुझे देखकर उसने जब होठ दबाए
जिस्म के पुर्जे पुर्जे में हथियार छिपे थे
उफ़ कत्ल खुद का क्यूं नही करवा पाए
नजर उतनी ही गहरी धंसती गई मन में
मेरी ओर देखकर वो जितना मुस्कुराए
यकीन हो ही गया आज सचमुच बेचैन
दिल झूठ से लगाकर हम बहुत पछताए
आह कलेजे से निकली हाय हाय हाय
सांसो में बर्फ सी जम गई आँखों के रस्ते
मुझे देखकर उसने जब होठ दबाए
जिस्म के पुर्जे पुर्जे में हथियार छिपे थे
उफ़ कत्ल खुद का क्यूं नही करवा पाए
नजर उतनी ही गहरी धंसती गई मन में
मेरी ओर देखकर वो जितना मुस्कुराए
यकीन हो ही गया आज सचमुच बेचैन
दिल झूठ से लगाकर हम बहुत पछताए
Friday, 2 November 2012
मुझे माँ के बाद उसी बीवी ने सम्भाला है
मेरे घर में मेरे जहन में जिससे उजाला है
मुझे माँ के बाद उसी बीवी ने सम्भाला है
शुक्र है बच्चों की माँ रूह में उतर गई वरना
साला हरेक रिश्तेदार मेरा देखा भाला है
इसलिए नही रखता मैं इश्कबाजी में यकीन
दिलो दिमाग पर लगा मोहतरमा का ताला है
सिवाय कमाने के मैं और करता भी क्या हूँ
सब बीवी ने जिम्मेवारी का बोझ सम्भाला है
कहो उससे बढ़कर मेरा कौन होगा गमख्वार
जिसके दिलो दिमाग में मेरी फ़िक्र का छाला है
वक्त के रहते पा लो अपने पाप से छुटकारा
दोस्तों मन तुम्हारा अगर कही से भी काला है
कैसे जीते जी भूलूँ उसका अहसान बेचैन
मिटाकर खुद को जिसने मेरे रंग में ढाला है
मुझे माँ के बाद उसी बीवी ने सम्भाला है
शुक्र है बच्चों की माँ रूह में उतर गई वरना
साला हरेक रिश्तेदार मेरा देखा भाला है
इसलिए नही रखता मैं इश्कबाजी में यकीन
दिलो दिमाग पर लगा मोहतरमा का ताला है
सिवाय कमाने के मैं और करता भी क्या हूँ
सब बीवी ने जिम्मेवारी का बोझ सम्भाला है
कहो उससे बढ़कर मेरा कौन होगा गमख्वार
जिसके दिलो दिमाग में मेरी फ़िक्र का छाला है
वक्त के रहते पा लो अपने पाप से छुटकारा
दोस्तों मन तुम्हारा अगर कही से भी काला है
कैसे जीते जी भूलूँ उसका अहसान बेचैन
मिटाकर खुद को जिसने मेरे रंग में ढाला है
Monday, 29 October 2012
सकून देकर के वो बेकसी दे गया
सकून देकर के वो बेकसी दे गया
जाने आँखों में कैसी नमी दे गया
मुझसे लेकर के वादा खुश रहने का
वो बदले में मुझको बेबसी दे गया
मैंने मुस्कुराहट उनसे क्या मांग ली
खुद पे हंसता रहूँ वो हंसी दे गया
शायद मिलकर मुझसे ख़ुशी नहीं मिली
इसलिए वो करार अजनबी दे गया
सीने में जारी है एक घबराहट सी
वो कहने को तो मुझे जिंदगी दे गया
रिश्ता पक्का हुआ दोनों में बीच में
कहकर हाथों में वो एक घड़ी दे गया
बोलकर आखरी बेचैन मुलाक़ात है
अपनी उम्र भर की मुझको कमी दे गया
जाने आँखों में कैसी नमी दे गया
मुझसे लेकर के वादा खुश रहने का
वो बदले में मुझको बेबसी दे गया
मैंने मुस्कुराहट उनसे क्या मांग ली
खुद पे हंसता रहूँ वो हंसी दे गया
शायद मिलकर मुझसे ख़ुशी नहीं मिली
इसलिए वो करार अजनबी दे गया
सीने में जारी है एक घबराहट सी
वो कहने को तो मुझे जिंदगी दे गया
रिश्ता पक्का हुआ दोनों में बीच में
कहकर हाथों में वो एक घड़ी दे गया
बोलकर आखरी बेचैन मुलाक़ात है
अपनी उम्र भर की मुझको कमी दे गया
Saturday, 27 October 2012
आज मेरी आवाज़ ही नही दिल भी भारी है
आज मेरी आवाज़ ही नही दिल भी भारी है
छोड़कर मुझको तेरी जाने की तैयारी है
रोके नही रुकता है सैलाब आंसुओ का
बिना पानी बगेर मछली सी तडफ जारी है
नही सरक रही जिंदगी उन लम्हों से आगे
तेरी गोद में जितनी मैंने उम्र गुजारी है
मत भूलना कभी अ मेरे इश्क के खुदा
मैंने कैसे निगाहों से आरती उतारी है
वादा रहा कभी बेबसी उफ़ तक ना करेगी
मंजूर है बेचैन जो भी ख़ुशी तुम्हारी है
छोड़कर मुझको तेरी जाने की तैयारी है
रोके नही रुकता है सैलाब आंसुओ का
बिना पानी बगेर मछली सी तडफ जारी है
नही सरक रही जिंदगी उन लम्हों से आगे
तेरी गोद में जितनी मैंने उम्र गुजारी है
मत भूलना कभी अ मेरे इश्क के खुदा
मैंने कैसे निगाहों से आरती उतारी है
वादा रहा कभी बेबसी उफ़ तक ना करेगी
मंजूर है बेचैन जो भी ख़ुशी तुम्हारी है
हम आज महोब्बत के कदमो में माथा टेक कर आये है
हम आज महोब्बत के कदमो में माथा टेक कर आये है
सकून था कितना मत पूछो हम कितना अब इतराए है
हम रोते रहे बेखुद होकर वो पोंछता रहा अश्क मेरे
छुवन हम उनके हाथों की गालों पर रचाकर लाये है
हम तकते रहे पहरों तक, वो सोचता रहा ये क्या है सब
हम रखकर उनकी गोद में सर कई देर तलक सुस्ताये है
उनसे जन्मो का नाता है हमने ये परख कर देख लिया
इस दर्द के रिश्ते के उसने हमको छाले दिखलाए है
दाता अहसान करना इतना जब साँस आखरी ले बेचैन
हो उनकी गोद में सर मेरा अरमान ये मन में जगाए है
सकून था कितना मत पूछो हम कितना अब इतराए है
हम रोते रहे बेखुद होकर वो पोंछता रहा अश्क मेरे
छुवन हम उनके हाथों की गालों पर रचाकर लाये है
हम तकते रहे पहरों तक, वो सोचता रहा ये क्या है सब
हम रखकर उनकी गोद में सर कई देर तलक सुस्ताये है
उनसे जन्मो का नाता है हमने ये परख कर देख लिया
इस दर्द के रिश्ते के उसने हमको छाले दिखलाए है
दाता अहसान करना इतना जब साँस आखरी ले बेचैन
हो उनकी गोद में सर मेरा अरमान ये मन में जगाए है
Tuesday, 23 October 2012
जियादा दिन नही चलते एक तरफा प्यार के रिश्ते
सोचता हूँ तोड़ डालू झूठे जीत हार के रिश्ते
जियादा दिन नही चलते एक तरफा प्यार के रिश्ते
आदमी की परेशानियों का यही तो सबब होता है
अपना समझता है जो होते है उधार के रिश्ते
क्यूं नही समझते जमीन को ओढने बिछाने वाले
कभी भी रास नही आते है ऊँची मीनार के रिश्ते
छुड्वाया है तेरे अहसास ने हाथों से जब हाथ
मेरी नजरो में हो चले है सब बेकार के रिश्ते
यहाँ सब हाथों की लकीरों का ही भ्रम है बेचैन
इस पार नही मिलते किसी को उस पार के रिश्ते
जियादा दिन नही चलते एक तरफा प्यार के रिश्ते
आदमी की परेशानियों का यही तो सबब होता है
अपना समझता है जो होते है उधार के रिश्ते
क्यूं नही समझते जमीन को ओढने बिछाने वाले
कभी भी रास नही आते है ऊँची मीनार के रिश्ते
छुड्वाया है तेरे अहसास ने हाथों से जब हाथ
मेरी नजरो में हो चले है सब बेकार के रिश्ते
यहाँ सब हाथों की लकीरों का ही भ्रम है बेचैन
इस पार नही मिलते किसी को उस पार के रिश्ते
Monday, 22 October 2012
एक ही बात कमबख्त को रोज समझानी पडती है
मत पूछो इश्क में क्या क्या दिक्कत उठानी पडती है
एक ही बात कमबख्त को रोज समझानी पडती है
तब जाकर आता है उसको बड़ी मुश्किल से यकीन
छोटी छोटी बातों पर हमें कसम खानी पडती है
नाज़ जरूरत से ज्यादा रोज उठा कर उसके
जान छिडकने की हमको यूं रस्म निभानी पडती है
इसलिए बदलता है मौसम जैसे मिजाज उसका
नाराज होने की उसकी आदत पुरानी पडती है
फीका पड़ जाता है चाँद बदली का भी बेचैन
रुखसार पर जब उसकी चुनर धानी पडती है
एक ही बात कमबख्त को रोज समझानी पडती है
तब जाकर आता है उसको बड़ी मुश्किल से यकीन
छोटी छोटी बातों पर हमें कसम खानी पडती है
नाज़ जरूरत से ज्यादा रोज उठा कर उसके
जान छिडकने की हमको यूं रस्म निभानी पडती है
इसलिए बदलता है मौसम जैसे मिजाज उसका
नाराज होने की उसकी आदत पुरानी पडती है
फीका पड़ जाता है चाँद बदली का भी बेचैन
रुखसार पर जब उसकी चुनर धानी पडती है
Sunday, 21 October 2012
सफेदी जब से बालों में उतरने लगी है
सफेदी जब से बालों में उतरने लगी है
अदाए नौजवानी की मुकरने लगी है
ये क्या हो रहा है दिन-ओ-दिन आदत को
दिल-ओ-दिमाग से गद्दारी करने लगी है
अदाए नौजवानी की मुकरने लगी है
ये क्या हो रहा है दिन-ओ-दिन आदत को
दिल-ओ-दिमाग से गद्दारी करने लगी है
घुटने लगता है दम महफ़िल में जाते ही
जब से तन्हाईया मुझ पर मरने लगी है
हो ना जाये कही गलतफहमी की शिकार
जरा सी बात पर भी धडकने डरने लगी है
कुछ भी बोल बेचैन सचमुच में यही सच है
जिंदगी उसके बाद से ही संवरने लगी है
जब से तन्हाईया मुझ पर मरने लगी है
हो ना जाये कही गलतफहमी की शिकार
जरा सी बात पर भी धडकने डरने लगी है
कुछ भी बोल बेचैन सचमुच में यही सच है
जिंदगी उसके बाद से ही संवरने लगी है
बेवकूफों को कुर्सी विद्वान बना देती है
बेवकूफों को कुर्सी विद्वान बना देती है
टुच्चों को भी महफ़िल की शान बना देती है
बेशक तमीज़ ना हो कपड़े तक पहनने की
दौलत मगर सबको कद्रदान बना देती है
सदियों तक बजता है उसके नाम का डंका
बिरादरी जिसकी भी पहचान बना देती है
दाग उम्र भर उसका पीछा नही छोड़ता
रंजिश में जिसे खाकी शैतान बना देती है
कितनी ही सरगोशी क्यूं ना हो बुराई की
चुगली दीवारों के भी कान बना देती है
दादा के कंधे पर पोता चढ़ते ही बोला
महोब्बत रिश्तों को नादान बना देती है
बेकारी से यही तजुर्बा मिला है बेचैन
नौकरी गधों को भी इंसान बना देती है
टुच्चों को भी महफ़िल की शान बना देती है
बेशक तमीज़ ना हो कपड़े तक पहनने की
दौलत मगर सबको कद्रदान बना देती है
सदियों तक बजता है उसके नाम का डंका
बिरादरी जिसकी भी पहचान बना देती है
दाग उम्र भर उसका पीछा नही छोड़ता
रंजिश में जिसे खाकी शैतान बना देती है
कितनी ही सरगोशी क्यूं ना हो बुराई की
चुगली दीवारों के भी कान बना देती है
दादा के कंधे पर पोता चढ़ते ही बोला
महोब्बत रिश्तों को नादान बना देती है
बेकारी से यही तजुर्बा मिला है बेचैन
नौकरी गधों को भी इंसान बना देती है
Tuesday, 16 October 2012
जिसका अहसास मेरे जीने का सहारा था
मदद खातिर जिसका मैंने नाम पुकारा था
पहला पत्थर भीड़ से उसी ने मारा था
वो भी शामिल था मेरी हंसी उड़ाने में
जिसका अहसास मेरे जीने का सहारा था
सुलगी है जिसको लेकर चिंगारी नफरत की
लब्ज़ नही है बता दूं वो कितना प्यारा था
जाने किस किस नाम से कर रहा था मुखबरी
मन का जिसके आगे मैंने दर्द उतारा था
शायद दिखावे से था प्यार उसे बेचैन
इसलिए मेरा सादापन बेहद नकारा था
पहला पत्थर भीड़ से उसी ने मारा था
वो भी शामिल था मेरी हंसी उड़ाने में
जिसका अहसास मेरे जीने का सहारा था
सुलगी है जिसको लेकर चिंगारी नफरत की
लब्ज़ नही है बता दूं वो कितना प्यारा था
जाने किस किस नाम से कर रहा था मुखबरी
मन का जिसके आगे मैंने दर्द उतारा था
शायद दिखावे से था प्यार उसे बेचैन
इसलिए मेरा सादापन बेहद नकारा था
Monday, 15 October 2012
जो पीते नही उनको बीच में आने नही देंगे
जो पीते नही उनको बीच में आने नही देंगे
काजू भूजिया मुफ्त के चने खाने नही देंगे
हम होश में रहे या नशे में याद रखना दोस्तों
अपने उसूलो से किसी को टकराने नही देंगे
हम चम्मच से बजायेंगे बोतल को खाली करके
मज़ा नशे का बेकार में यूं ही जाने नही देंगे
दम नही है जिसमे बैठकर यारों संग पीने का
महफ़िल पर उसे हक कोई भी जमाने नही देंगे
हंसकर सुनाएगा जो कोई भी दास्ताने महोब्बत
बिन रोये उसे बेचैन किस्सा सुनाने नही देंगे
काजू भूजिया मुफ्त के चने खाने नही देंगे
हम होश में रहे या नशे में याद रखना दोस्तों
अपने उसूलो से किसी को टकराने नही देंगे
हम चम्मच से बजायेंगे बोतल को खाली करके
मज़ा नशे का बेकार में यूं ही जाने नही देंगे
दम नही है जिसमे बैठकर यारों संग पीने का
महफ़िल पर उसे हक कोई भी जमाने नही देंगे
हंसकर सुनाएगा जो कोई भी दास्ताने महोब्बत
बिन रोये उसे बेचैन किस्सा सुनाने नही देंगे
ढंग ख़ामोशी का कहता है चाहत ही नही
ऐसा लगता है उसे मेरी जरूरत ही नही
यूं पेश आता है जैसे महोब्बत ही नही
पास होकर भी नही करता वो आजकल बातें
ढंग ख़ामोशी का कहता है चाहत ही नही
और यकी जियादा जां देकर ही दिला सकता हूँ
बदनसीबी जीते जी उसे अकीदत ही नही
सजने लगे गमलो में कागज़ के फूल जब से
कीचड़ के कमल की कोई कीमत ही नही
सच तो यही है सुर्ख आँखों की कसम यारो
बेचैन मिन्नते करने की और हिम्मत ही नही
यूं पेश आता है जैसे महोब्बत ही नही
पास होकर भी नही करता वो आजकल बातें
ढंग ख़ामोशी का कहता है चाहत ही नही
और यकी जियादा जां देकर ही दिला सकता हूँ
बदनसीबी जीते जी उसे अकीदत ही नही
सजने लगे गमलो में कागज़ के फूल जब से
कीचड़ के कमल की कोई कीमत ही नही
सच तो यही है सुर्ख आँखों की कसम यारो
बेचैन मिन्नते करने की और हिम्मत ही नही
Sunday, 14 October 2012
नही समझ पाता जिंदगी का क्या इशारा है
जब भी रसोई की तरफ मैंने निहारा है
महंगाई ने हाँ जोर का चांटा मारा है
तनख्वा को कभी जरुरतो को देखता हूँ
नही समझ पाता जिंदगी का क्या इशारा है
कई बार सोचा गुस्सा बीवी का है जायज़
हाँ ख्वाबो के जिसके सूली पर उतारा है
दर्द बेकारी का पहले ही कुछ कम ना था
मुझे ऊपर से महोब्बत ने चाबुक मारा है
ये सारी ऐसी तैसी नेताओ की हुई है
खौफ आम आदमी का जिसने निखारा है
शायद मिठास ज्यादा है तेरे अहसास का
मेरे अश्को का स्वाद इसलिए खारा है
बेचैन रिश्तेदारो की फ़िक्र नही करता
महबूब उसका उसके लिए ध्रुव तारा है
महंगाई ने हाँ जोर का चांटा मारा है
तनख्वा को कभी जरुरतो को देखता हूँ
नही समझ पाता जिंदगी का क्या इशारा है
कई बार सोचा गुस्सा बीवी का है जायज़
हाँ ख्वाबो के जिसके सूली पर उतारा है
दर्द बेकारी का पहले ही कुछ कम ना था
मुझे ऊपर से महोब्बत ने चाबुक मारा है
ये सारी ऐसी तैसी नेताओ की हुई है
खौफ आम आदमी का जिसने निखारा है
शायद मिठास ज्यादा है तेरे अहसास का
मेरे अश्को का स्वाद इसलिए खारा है
बेचैन रिश्तेदारो की फ़िक्र नही करता
महबूब उसका उसके लिए ध्रुव तारा है
Saturday, 13 October 2012
हूँ कसमकश में तमन्नाओं का क्या होगा
हूँ कसमकश में तमन्नाओं का क्या होगा
क्या हक में मेरे कोई ना फैंसला होगा
उन्हें ये शक में दुनिया को सब बता दूंगा
मुझे ये खौफ वो ना संग रहा तो क्या होगा
क्या हक में मेरे कोई ना फैंसला होगा
उन्हें ये शक में दुनिया को सब बता दूंगा
मुझे ये खौफ वो ना संग रहा तो क्या होगा
कही से भेज वो लम्हे सकून हो जिसमे
अ वक्त तेरा कसम से बड़ा भला होगा
वो जिरह करते करते कभी जो बिछड़ गया
ता उम्र भर के लिए बहुत ही बुरा होगा
कपकपी उनके लब्जो की यही कहती है
मजबूरियों के सिवा ना सबब दूसरा होगा
मेरे इश्क ने बेचैन पक्का सोच लिया
हर एक जन्म में मेरा वही खुदा होगा
अ वक्त तेरा कसम से बड़ा भला होगा
वो जिरह करते करते कभी जो बिछड़ गया
ता उम्र भर के लिए बहुत ही बुरा होगा
कपकपी उनके लब्जो की यही कहती है
मजबूरियों के सिवा ना सबब दूसरा होगा
मेरे इश्क ने बेचैन पक्का सोच लिया
हर एक जन्म में मेरा वही खुदा होगा
सांसे हुई है भारी भारी आपके बिना
कैसे कटेगी उम्र सारी आपके बिना
सांसे हुई है भारी भारी आपके बिना
बज्मे सुखन में जब भी कोई शेर पढूंगा
झलकेगी साफ़ लाचारी आपके बिना
सांसे हुई है भारी भारी आपके बिना
बज्मे सुखन में जब भी कोई शेर पढूंगा
झलकेगी साफ़ लाचारी आपके बिना
किसके लिए करू बता बालों में कंघी
आईने से तोड़ दी यारी आपके बिना
कितना ही इल्म लोगों से सीख लूं लेकिन
ना आएगी समझदारी आपके बिना
कहने को तो बैठा हूँ खोलकर बोतल
छाएगी कैसे खुमारी आपके बिना
जन्नत में बैठकर भी मैं यही कहूँगा
बेकार है सब बेकरारी आपके बिना
मैं बेचैन इसे जियादा और क्या कहूं
कुछ भी नही किस्मत हमारी आपके बिना
आईने से तोड़ दी यारी आपके बिना
कितना ही इल्म लोगों से सीख लूं लेकिन
ना आएगी समझदारी आपके बिना
कहने को तो बैठा हूँ खोलकर बोतल
छाएगी कैसे खुमारी आपके बिना
जन्नत में बैठकर भी मैं यही कहूँगा
बेकार है सब बेकरारी आपके बिना
मैं बेचैन इसे जियादा और क्या कहूं
कुछ भी नही किस्मत हमारी आपके बिना
ज़ुल्फ़ की रस्सी बनाकर मुझे फांसी तोड़ दे
ज़ुल्फ़ की रस्सी बनाकर मुझे फांसी तोड़ दे
नही बस में तो चुप रहने की जिद छोड़ दे
या तो इन घटाओ को बोल खुलकर बरसे
या बोल मुझे आँखों से समन्दर निचोड़ दे
नही बस में तो चुप रहने की जिद छोड़ दे
या तो इन घटाओ को बोल खुलकर बरसे
या बोल मुझे आँखों से समन्दर निचोड़ दे
यूं हक ना मारिये अपने गरीब आशिक का
मेरी प्यास,नींद-ओ-चैन का हिसाब जोड़ दे
दूर बहुत दूर जाकर ही मुस्कुरा लूँगा मैं
कोई तो राह ख़ुशी की मेरी और मोड़ दे
ऐसा अपाहिज बनाया है इश्क ने बेचैन
कह नही सकता खुद को कही ओर दौड़ दे
मेरी प्यास,नींद-ओ-चैन का हिसाब जोड़ दे
दूर बहुत दूर जाकर ही मुस्कुरा लूँगा मैं
कोई तो राह ख़ुशी की मेरी और मोड़ दे
ऐसा अपाहिज बनाया है इश्क ने बेचैन
कह नही सकता खुद को कही ओर दौड़ दे
तस्वीर भेज अपनी अगर मुझसे प्यार है
तू सच में कही से जो मेरा गमख्वार है
तस्वीर भेज अपनी अगर मुझसे प्यार है
मैं लाश जिंदा बन गया हूँ दो ही रोज में
दिन बाकि उम्र के पड़े अभी कई हजार है
तस्वीर भेज अपनी अगर मुझसे प्यार है
मैं लाश जिंदा बन गया हूँ दो ही रोज में
दिन बाकि उम्र के पड़े अभी कई हजार है
वादा वफा हंसने का हर हाल में होगा
वैसे भी मेरा चुटकलों का कारोबार है
मत भूलना कभी कही कोई तडफ रहा है
दुनिया में किसी को तुम्हारा इंतजार है
हम किस तरह करीब आये एक दूजे के
हाहा दास्तान अपनी वाकई मजेदार है
मजबूरी-ओ-नसीब दोनों पीछे पड़े है
शायद इसी का नाम बेचैन संसार है
वैसे भी मेरा चुटकलों का कारोबार है
मत भूलना कभी कही कोई तडफ रहा है
दुनिया में किसी को तुम्हारा इंतजार है
हम किस तरह करीब आये एक दूजे के
हाहा दास्तान अपनी वाकई मजेदार है
मजबूरी-ओ-नसीब दोनों पीछे पड़े है
शायद इसी का नाम बेचैन संसार है
बंदिश लगाके आहों पे कहता है प्यार कर
बंदिश लगाके आहों पे कहता है प्यार कर
मेरे पास बैठ कर ही मेरा इंतजार कर
मुजरिम समझ बैठा हूँ खुद को तुम्हारा मैं
इतना भी जान मुझको ना अब शर्मसार कर
आता नही समझ में अब करू तो क्या करू
कैसे मैं खुद से ही कहूं गूंगा व्यवहार कर
शक की नजर से रोज मेरा ना इंतिहान ले
इंसान गलत नही हूँ मेरा एतबार कर
मजबूरिया तुम्हारी मुझे अच्छे से पता है
मेरी बेबसी पे तू भी तो सोच विचार कर
कब तक करेंगे नसीब से दो दो हाथ हम
सिक्का उछाल कर ही सही जीत हार कर
तू भी बेचैन होता है सुनकर मेरा नाम
मिल जायेगा सकूं मुझे तू इकरार कर
मेरे पास बैठ कर ही मेरा इंतजार कर
मुजरिम समझ बैठा हूँ खुद को तुम्हारा मैं
इतना भी जान मुझको ना अब शर्मसार कर
आता नही समझ में अब करू तो क्या करू
कैसे मैं खुद से ही कहूं गूंगा व्यवहार कर
शक की नजर से रोज मेरा ना इंतिहान ले
इंसान गलत नही हूँ मेरा एतबार कर
मजबूरिया तुम्हारी मुझे अच्छे से पता है
मेरी बेबसी पे तू भी तो सोच विचार कर
कब तक करेंगे नसीब से दो दो हाथ हम
सिक्का उछाल कर ही सही जीत हार कर
तू भी बेचैन होता है सुनकर मेरा नाम
मिल जायेगा सकूं मुझे तू इकरार कर
Wednesday, 10 October 2012
जा तुझको पाकर कौन सा अमर हो जाऊंगा
मौत तो लाजिम है एक रोज सबकी दोस्त
जा तुझको पाकर कौन सा अमर हो जाऊंगा
बस इतना ही हश्र होगा तुमसे बिछड़कर
रफ्ता रफ्ता भीतर से पत्थर हो जाऊंगा
जा तुझको पाकर कौन सा अमर हो जाऊंगा
बस इतना ही हश्र होगा तुमसे बिछड़कर
रफ्ता रफ्ता भीतर से पत्थर हो जाऊंगा
गिरती रही मुझमे अगर खौफ की नदियाँ
देख लेना एक रोज समन्दर हो जाऊंगा
किस लिए करू हाय तौबा आरज़ू पालकर
साथ क्या जायेगा गर सिकन्दर हो जाऊंगा
बस इतना याद रखना बाद मेरे बेचैन
मैं झुका हुआ भरोसे का सर हो जाऊंगा
देख लेना एक रोज समन्दर हो जाऊंगा
किस लिए करू हाय तौबा आरज़ू पालकर
साथ क्या जायेगा गर सिकन्दर हो जाऊंगा
बस इतना याद रखना बाद मेरे बेचैन
मैं झुका हुआ भरोसे का सर हो जाऊंगा
तजुर्बे ने जिसको भी जितना सिखाया है
तजुर्बे ने जिसको भी जितना सिखाया है
रूप जिंदगी का वही निकलकर आया है
वक्त ने उसी को चित करके छोड़ा है
अक्लमंदी का जिसने रौब जमाया है
रूप जिंदगी का वही निकलकर आया है
वक्त ने उसी को चित करके छोड़ा है
अक्लमंदी का जिसने रौब जमाया है
भीड़ रिश्ते नातों की कुछ भी तो नही है
जान बूझकर हमने सर पर चढ़ाया है
दोस्तों उम्र पर भी हंसी आने लगती है
दिवानगी का जब दिल ने राग गाया है
जो कुछ भी है वजूद ही तो है बेचैन
फिर जिस्म पर हुश्न किसलिए इतराया है
जान बूझकर हमने सर पर चढ़ाया है
दोस्तों उम्र पर भी हंसी आने लगती है
दिवानगी का जब दिल ने राग गाया है
जो कुछ भी है वजूद ही तो है बेचैन
फिर जिस्म पर हुश्न किसलिए इतराया है
कागज़ के फूलो की मुझे क्या जरूरत है
कागज़ के फूलो की मुझे क्या जरूरत है
जब पहलू में महका गुलाब लिए बैठा हूँ
कोई सितारों सी चमक रखता है तो रखे
मैं दिल में अपने महताब लिए बैठा हूँ
जब पहलू में महका गुलाब लिए बैठा हूँ
कोई सितारों सी चमक रखता है तो रखे
मैं दिल में अपने महताब लिए बैठा हूँ
तू मंजिल की हद जिसे समझता है रकीब
मैं उससे आगे का ख्वाब लिए बैठा हूँ
यूं कम नही होगा मेरा नशा उम्र भर
इश्क की आँखों में शराब लिए बैठा हूँ
इसलिए नही देता तरजीह सवालों को
जवाबो का भी मैं जवाब लिए बैठा हूँ
वजूद के जिंदा रहने का यही सबब है
सच से टकराने की ताब लिए बैठा हूँ
बाकि है अभी मिलनी लानत दुनिया की
यही सोचकर जिंदा कसाब लिए बैठा हूँ
वक्त मुझे धोखा देगा तो कैसे देगा
पाई पाई का बेचैन हिसाब लिए बैठा हूँ
मैं उससे आगे का ख्वाब लिए बैठा हूँ
यूं कम नही होगा मेरा नशा उम्र भर
इश्क की आँखों में शराब लिए बैठा हूँ
इसलिए नही देता तरजीह सवालों को
जवाबो का भी मैं जवाब लिए बैठा हूँ
वजूद के जिंदा रहने का यही सबब है
सच से टकराने की ताब लिए बैठा हूँ
बाकि है अभी मिलनी लानत दुनिया की
यही सोचकर जिंदा कसाब लिए बैठा हूँ
वक्त मुझे धोखा देगा तो कैसे देगा
पाई पाई का बेचैन हिसाब लिए बैठा हूँ
बीवी हो बीवी की तरह रहो, दिलरुबा ना बनो
बीवी हो बीवी की तरह रहो, दिलरुबा ना बनो
तुम तो बच्चो की ही सही हो, मेरी माँ ना बनो
रहना है तो दिमाग में रहो ज़िम्मेदारी बनकर
दिल में उछल कूद करने का सिलसिला ना बनो
तुम तो बच्चो की ही सही हो, मेरी माँ ना बनो
रहना है तो दिमाग में रहो ज़िम्मेदारी बनकर
दिल में उछल कूद करने का सिलसिला ना बनो
जिसने कीमत दी है वही है ख्वाबो का मालिक
किसी की अमानत को पाने का हौसला ना बनो
कभी मत भूल हद मीठे की कडवाहट होती है
ज्यादा चासनी में डूबी हुई तुम जुबा ना बनो
उम्मीदों पर खरे ना उतरे तो पाप लगेगा
कभी इश्क में बेचैन किसी का खुदा ना बनो
किसी की अमानत को पाने का हौसला ना बनो
कभी मत भूल हद मीठे की कडवाहट होती है
ज्यादा चासनी में डूबी हुई तुम जुबा ना बनो
उम्मीदों पर खरे ना उतरे तो पाप लगेगा
कभी इश्क में बेचैन किसी का खुदा ना बनो
कैसे कटेगी उम्र सारी आपके बिना
कैसे कटेगी उम्र सारी आपके बिना
सांसे हुई है भारी भारी आपके बिना
बज्मे सुखन में जब भी कोई शेर पढूंगा
झलकेगी साफ़ लाचारी आपके बिना
सांसे हुई है भारी भारी आपके बिना
बज्मे सुखन में जब भी कोई शेर पढूंगा
झलकेगी साफ़ लाचारी आपके बिना
किसके लिए करू बता बालों में कंघी
आईने से तोड़ दी यारी आपके बिना
कितना ही इल्म लोगों से सीख लूं लेकिन
ना आएगी समझदारी आपके बिना
कहने को तो बैठा हूँ खोलकर बोतल
छाएगी कैसे खुमारी आपके बिना
जन्नत में बैठकर भी मैं यही कहूँगा
बेकार है सब बेकरारी आपके बिना
मैं बेचैन इसे जियादा और क्या कहूं
कुछ भी नही किस्मत हमारी आपके बिना
आईने से तोड़ दी यारी आपके बिना
कितना ही इल्म लोगों से सीख लूं लेकिन
ना आएगी समझदारी आपके बिना
कहने को तो बैठा हूँ खोलकर बोतल
छाएगी कैसे खुमारी आपके बिना
जन्नत में बैठकर भी मैं यही कहूँगा
बेकार है सब बेकरारी आपके बिना
मैं बेचैन इसे जियादा और क्या कहूं
कुछ भी नही किस्मत हमारी आपके बिना
वैसे भी मेरा चुटकलों का कारोबार है
तू सच में कही से जो मेरा गमख्वार है
तस्वीर भेज अपनी अगर मुझसे प्यार है
मैं लाश जिंदा बन गया हूँ दो ही रोज में
दिन बाकि उम्र के पड़े अभी कई हजार है
तस्वीर भेज अपनी अगर मुझसे प्यार है
मैं लाश जिंदा बन गया हूँ दो ही रोज में
दिन बाकि उम्र के पड़े अभी कई हजार है
वादा वफा हंसने का हर हाल में होगा
वैसे भी मेरा चुटकलों का कारोबार है
मत भूलना कभी कही कोई तडफ रहा है
दुनिया में किसी को तुम्हारा इंतजार है
हम किस तरह करीब आये एक दूजे के
हाहा दास्तान अपनी वाकई मजेदार है
मजबूरी-ओ-नसीब दोनों पीछे पड़े है
शायद इसी का नाम बेचैन संसार है
वैसे भी मेरा चुटकलों का कारोबार है
मत भूलना कभी कही कोई तडफ रहा है
दुनिया में किसी को तुम्हारा इंतजार है
हम किस तरह करीब आये एक दूजे के
हाहा दास्तान अपनी वाकई मजेदार है
मजबूरी-ओ-नसीब दोनों पीछे पड़े है
शायद इसी का नाम बेचैन संसार है
Wednesday, 3 October 2012
हुस्न तेरी मर्जी जीने दे या मार दे
चाहे हलाल कर या जी भरके प्यार दे
हुस्न तेरी मर्जी जीने दे या मार दे
बंद कर दिया है सोचना मैंने आजकल
नही फर्क पड़ेगा कितना ही इंतजार दे
खुद से जियादा तुझपे भरोसा किया है
शर्मिंदा करना है तो झूठा एतबार दे
आती है कमी अगर सजने संवरने में
मेरे लहू का अपने लबों को सिंगार दे
बेचैन इश्क का मजा दुगना आयेगा
महबूब को दाता तडफ और खुमार दे
हुस्न तेरी मर्जी जीने दे या मार दे
बंद कर दिया है सोचना मैंने आजकल
नही फर्क पड़ेगा कितना ही इंतजार दे
खुद से जियादा तुझपे भरोसा किया है
शर्मिंदा करना है तो झूठा एतबार दे
आती है कमी अगर सजने संवरने में
मेरे लहू का अपने लबों को सिंगार दे
बेचैन इश्क का मजा दुगना आयेगा
महबूब को दाता तडफ और खुमार दे
Tuesday, 2 October 2012
खामोश रहकर जियादा बकवास ना करो
मेरी अच्छी भली छुट्टी का नाश ना करो
खामोश रहकर जियादा बकवास ना करो
चुपचाप लौट आओ अच्छे बच्चों की तरह
मुझको गुस्सा दिलाने का प्रयास ना करो
तैश में रहने से रंग काला पड़ जाता है
मुह फुलाने का इतना अभ्यास ना करो
गलतफहमी पत्थर में जान फूंक देती है
चुगलखोरो पर झटके में विश्वास ना करो
उम्र भर मल मुझे दर्दे अहसास पर बेचैन
झंडूबाम ही रहने दो च्वनप्राश ना करो
खामोश रहकर जियादा बकवास ना करो
चुपचाप लौट आओ अच्छे बच्चों की तरह
मुझको गुस्सा दिलाने का प्रयास ना करो
तैश में रहने से रंग काला पड़ जाता है
मुह फुलाने का इतना अभ्यास ना करो
गलतफहमी पत्थर में जान फूंक देती है
चुगलखोरो पर झटके में विश्वास ना करो
उम्र भर मल मुझे दर्दे अहसास पर बेचैन
झंडूबाम ही रहने दो च्वनप्राश ना करो
Sunday, 30 September 2012
आज पीकर शराब बोतल फोड़ देता हूँ
चलो कल तक के लिए पीनी छोड़ देता हूँ
आज पीकर शराब बोतल फोड़ देता हूँ
भर आती है आँखे जब उसकी याद में
जाम की ओर आंसुओ को मोड़ देता हूँ
जब भी लगाना होता है हिसाब तडफ का
वक्त और आहों की गुणा जोड़ देता हूँ
हुआ है जब भी वो कभी नाराज मुझसे
मैं झट से मन्दिर की तरफ दौड़ देता हूँ
मांगनी होती है जब गलती की मुआफी
मैं बेचैन खुद के कान मरोड़ देता हूँ
आज पीकर शराब बोतल फोड़ देता हूँ
भर आती है आँखे जब उसकी याद में
जाम की ओर आंसुओ को मोड़ देता हूँ
जब भी लगाना होता है हिसाब तडफ का
वक्त और आहों की गुणा जोड़ देता हूँ
हुआ है जब भी वो कभी नाराज मुझसे
मैं झट से मन्दिर की तरफ दौड़ देता हूँ
मांगनी होती है जब गलती की मुआफी
मैं बेचैन खुद के कान मरोड़ देता हूँ
मैं हिस्सा बन गया हूँ तेरी उलझन का कहते क्यूं नही
तुझे सोचकर दर्द बढ़ता है मेरे मन का कहते क्यूं नही
मैं हिस्सा बन गया हूँ तेरी उलझन का कहते क्यूं नही
जिंदगी सच बता वास्ता है तुझको तेरी ही पाकीजगी का
मैं तुझे चोर दिखता हूँ ना तेरे तन का कहते क्यूं नही
मैं हिस्सा बन गया हूँ तेरी उलझन का कहते क्यूं नही
जिंदगी सच बता वास्ता है तुझको तेरी ही पाकीजगी का
मैं तुझे चोर दिखता हूँ ना तेरे तन का कहते क्यूं नही
जो इल्जाम कल जमाना देगा तू आज ही दे दे तो अच्छा
मैं फायदा उठा रहा हूँ भोलेपन का कहते क्यूं नही
मेरी मुफलिसी-ओ- किरदार तेरे रुतबे आगे छोटे है
यही सबब तो है रोजाना की अनबन का कहते क्यूं नही
वैसे भी तो तुझको मर्द जात से सख्त नफरत है बेचैन
नही है भरोसा है तेरे चाल चलन का कहते क्यूं नही
मैं फायदा उठा रहा हूँ भोलेपन का कहते क्यूं नही
मेरी मुफलिसी-ओ- किरदार तेरे रुतबे आगे छोटे है
यही सबब तो है रोजाना की अनबन का कहते क्यूं नही
वैसे भी तो तुझको मर्द जात से सख्त नफरत है बेचैन
नही है भरोसा है तेरे चाल चलन का कहते क्यूं नही
हाँ समझ गया हूँ तेरी महोब्बत कितनी मीठी छूरी है
मैं झूठा मेरी तडफ झूठी सच्ची तेरी मजबूरी है
हाँ समझ गया हूँ तेरी महोब्बत कितनी मीठी छूरी है
जिस रोज मेरी प्यास तुम्हारे होठों पर पपड़ी ला देगी
तब बताना सिवा प्यार के दुनिया में क्या पाना जरूरी है
हाँ समझ गया हूँ तेरी महोब्बत कितनी मीठी छूरी है
जिस रोज मेरी प्यास तुम्हारे होठों पर पपड़ी ला देगी
तब बताना सिवा प्यार के दुनिया में क्या पाना जरूरी है
बता कोरे ज़ज्बातों के दम पर कब तक दूं खुद को तसल्ली
जी भर कर देखे बगैर मेरी प्रेम कहानी अधूरी है
तुझे कसम है तेरे ही ज़ज्बातों की मुझसे आन मिलो
मुझको लेकर अगर तुम्हारा कोई भी सपना सिन्दूरी है
हम दोनों के बीच फसाद की वही तो असली जड़ है जान
हाँ मेरे मन से तेरे मन की बेचैन जितनी दूरी है
जी भर कर देखे बगैर मेरी प्रेम कहानी अधूरी है
तुझे कसम है तेरे ही ज़ज्बातों की मुझसे आन मिलो
मुझको लेकर अगर तुम्हारा कोई भी सपना सिन्दूरी है
हम दोनों के बीच फसाद की वही तो असली जड़ है जान
हाँ मेरे मन से तेरे मन की बेचैन जितनी दूरी है
जिंदगी ज़ुल्फ़ नही है जो फिर से संवर जाएगी
एक बार उलझी तो उलझती चली जाएगी
जिंदगी ज़ुल्फ़ नही है जो फिर से संवर जाएगी
सोच समझकर ही लीजिएगा हरेक फैंसला
सदा लिए बात कोई शर्मिंदा कर जाएगी
जिंदगी ज़ुल्फ़ नही है जो फिर से संवर जाएगी
सोच समझकर ही लीजिएगा हरेक फैंसला
सदा लिए बात कोई शर्मिंदा कर जाएगी
तुम बेशक कूच कर जाओ मेरी दिल से लेकिन
मैं देखता हूँ तुम्हारी याद किधर जायेगी
जब तलक आएगा तेरे होश को होश जान
तब तक मेरी याद खुशबू बनके बिखर जाएगी
बेचैन प्यार के सिवा कोई भी और जिक्र छेड़
दास्ताने इश्क सुन मेरी आँख भर जायेगी
मैं देखता हूँ तुम्हारी याद किधर जायेगी
जब तलक आएगा तेरे होश को होश जान
तब तक मेरी याद खुशबू बनके बिखर जाएगी
बेचैन प्यार के सिवा कोई भी और जिक्र छेड़
दास्ताने इश्क सुन मेरी आँख भर जायेगी
प्यार जिंदा रहता है मुलाकातों के सहारे
प्यार जिंदा रहता है मुलाकातों के सहारे
बचाकर रखोगे कब तलक बातों के सहारे
मैं इसलिए निकल आया छोड़कर उसको
वो बहला रहा था मुझे ज़ज्बातों के सहारे
बचाकर रखोगे कब तलक बातों के सहारे
मैं इसलिए निकल आया छोड़कर उसको
वो बहला रहा था मुझे ज़ज्बातों के सहारे
बेशक से कल आती आज ही आ जाए मौत
नही लेना साँस उसकी खैरातों के सहारे
जवाब नही है तकदीर में तो नही है दोस्त
गुज़ार लूँगा जिंदगी सवालातों के सहारे
खुदा के वास्ते ना कोई भी नाम दे बेचैन
इश्क रोशन नही रिश्ते- नातों के सहारे
नही लेना साँस उसकी खैरातों के सहारे
जवाब नही है तकदीर में तो नही है दोस्त
गुज़ार लूँगा जिंदगी सवालातों के सहारे
खुदा के वास्ते ना कोई भी नाम दे बेचैन
इश्क रोशन नही रिश्ते- नातों के सहारे
चलो आज का काम तो चल गया शराब पीकर
चलो आज का काम तो चल गया शराब पीकर
कल वो फिर याद आयेंगे तो देखी जाएगी
सो जाऊंगा बिना खाए पिए मुह के बल पड़कर
रात को ख्वाब सतायेंगे तो देखी जाएगी
कल वो फिर याद आयेंगे तो देखी जाएगी
सो जाऊंगा बिना खाए पिए मुह के बल पड़कर
रात को ख्वाब सतायेंगे तो देखी जाएगी
खो जाऊंगा उसकी यादों के बियाबान में
लोग उँगली उठाएंगे तो देखी जाएगी
उसको जी भर कर देखने की आरज़ू में
हम मिट भी अगर जायेंगे तो देखी जाएगी
मैं तो कभी जफा नही करूंगा बेचैन मगर
पर बेवफा कहलायेंगे तो देखी जाएगी
लोग उँगली उठाएंगे तो देखी जाएगी
उसको जी भर कर देखने की आरज़ू में
हम मिट भी अगर जायेंगे तो देखी जाएगी
मैं तो कभी जफा नही करूंगा बेचैन मगर
पर बेवफा कहलायेंगे तो देखी जाएगी
शक खा गया है मेरा कलेजा निकाल कर
भला क्यूं ना रोऊ अपने मौजूदा हाल पर
शक खा गया है मेरा कलेजा निकाल कर
क्या यकीं मिल जाये फिर वो चेहरा बदलकर
प्यार अगले जन्म में करूंगा देखभाल कर
शक खा गया है मेरा कलेजा निकाल कर
क्या यकीं मिल जाये फिर वो चेहरा बदलकर
प्यार अगले जन्म में करूंगा देखभाल कर
हर दांव उसकी जफा के हक में जाता है
कई बार देख चुका हूँ सिक्का उछाल कर
जाने कब किस मोड़ पर हो जाये अलविदा
वो इसलिए रखता था मेरी बातें टालकर
गर आ गया है समझ में कमबख्त अच्छे से
मत रखना अब बेचैन कोई अरमां पालकर
कई बार देख चुका हूँ सिक्का उछाल कर
जाने कब किस मोड़ पर हो जाये अलविदा
वो इसलिए रखता था मेरी बातें टालकर
गर आ गया है समझ में कमबख्त अच्छे से
मत रखना अब बेचैन कोई अरमां पालकर
जिस रोज उतरूंगा मैं बेवफाई पर
सौ गुना भारी पडूंगा उस हरजाई पर
वही शख्स मेरी मुखबरी कर रहा है
दिन रात लिखता हूँ जिसकी अंगडाई पर
सौ गुना भारी पडूंगा उस हरजाई पर
वही शख्स मेरी मुखबरी कर रहा है
दिन रात लिखता हूँ जिसकी अंगडाई पर
किसके दम पर महफ़िल सजाने चला था ?
बैठा हंस रहा हूँ अपनी तन्हाई पर
दौरे-अलम में जो तमाशाबीन बने
किसलिए फक्र करूं ऐसी असनाई पर
महोब्बत का उसे देवता क्या माना ?
खूब सितम ढाता है अपनी खुदाई पर
वो ओरों पर क्या यकीं करेगा बेचैन
शक रहता है जिसे अपनी परछाई पर
बैठा हंस रहा हूँ अपनी तन्हाई पर
दौरे-अलम में जो तमाशाबीन बने
किसलिए फक्र करूं ऐसी असनाई पर
महोब्बत का उसे देवता क्या माना ?
खूब सितम ढाता है अपनी खुदाई पर
वो ओरों पर क्या यकीं करेगा बेचैन
शक रहता है जिसे अपनी परछाई पर
तुम दोनों ही जिंदाबाद रहो
सदा सुखी रहो आबाद रहो
तुम दोनों ही जिंदाबाद रहो
कोई तरक्की करे कितनी ही
इक दूजे की बुनियाद रहो
तुम दोनों ही जिंदाबाद रहो
कोई तरक्की करे कितनी ही
इक दूजे की बुनियाद रहो
जितने सितारे आसमान पर
आपस में उतना याद रहो
गम आये तो बाँटिये मिलकर
तुम वरना हमेशा शाद रहो
बेचैन नही होवोगे कभी
बुरे ख्यालो से आज़ाद रहो
आपस में उतना याद रहो
गम आये तो बाँटिये मिलकर
तुम वरना हमेशा शाद रहो
बेचैन नही होवोगे कभी
बुरे ख्यालो से आज़ाद रहो
घर में बर्तन है तो यारो टकरायेंगे जरुर
घर में बर्तन है तो यारो टकरायेंगे जरुर
थपेड़े इश्क में तकरार के आयेंगे जरुर
ना घबराकर लेना कभी कोई गलत फैंसला
वक्त के रहते गिले शिकवे मिट जायेंगे जरुर
थपेड़े इश्क में तकरार के आयेंगे जरुर
ना घबराकर लेना कभी कोई गलत फैंसला
वक्त के रहते गिले शिकवे मिट जायेंगे जरुर
सच्चा है अहसास अगर दोनों के दरमियान
इक दूजे के नाज़ नखरे उठाएंगे जरुर
दिलो दिमाग में मार लीजिए यह गाँठ पक्की
जहाँ वाले प्यार को गलत ठहराएंगे जरुर
गर आज नही तो तुम्हारे मरने के बाद बेचैन
तेरी याद में वो आंसू छलकायेंगे जरुर
इक दूजे के नाज़ नखरे उठाएंगे जरुर
दिलो दिमाग में मार लीजिए यह गाँठ पक्की
जहाँ वाले प्यार को गलत ठहराएंगे जरुर
गर आज नही तो तुम्हारे मरने के बाद बेचैन
तेरी याद में वो आंसू छलकायेंगे जरुर
कहते है वक्त से बड़ा मरहम नही कोई
कहते है वक्त से बड़ा मरहम नही कोई
हर जख्म भरता है बात में भ्रम नही कोई
मेरे चुटकलों पर यारों खूब हंसो मगर
मत सोचियेगा इस दिल में गम नही कोई
हर जख्म भरता है बात में भ्रम नही कोई
मेरे चुटकलों पर यारों खूब हंसो मगर
मत सोचियेगा इस दिल में गम नही कोई
बिछड़कर बेशक कभी ख्वाबो में ही मिलना
पर कभी मत बोलना तेरे हम नही कोई
जिंदगी इस बार तुझे पा गया तो पा गया
वरना भटकेगी रूह अब जन्म नही कोई
सोच लिया है बची हुई सांसो ने बेचैन
सिवा तुझको याद करने अब कर्म नही कोई
पर कभी मत बोलना तेरे हम नही कोई
जिंदगी इस बार तुझे पा गया तो पा गया
वरना भटकेगी रूह अब जन्म नही कोई
सोच लिया है बची हुई सांसो ने बेचैन
सिवा तुझको याद करने अब कर्म नही कोई
जीत जाता अगर महाभारत में दुर्योदन दोस्तों
जीत जाता अगर महाभारत में दुर्योदन दोस्तों
तारीख में लिखता द्रोपदी बेचती थी तन दोस्तों
सियासतगर्दो में रही है बुरी आदत आगाज़ से
नजर आती है इन्हें अपनी पीढ़ी निर्धन दोस्तों
—तारीख में लिखता द्रोपदी बेचती थी तन दोस्तों
सियासतगर्दो में रही है बुरी आदत आगाज़ से
नजर आती है इन्हें अपनी पीढ़ी निर्धन दोस्तों
जनता की तरह फूट है नेताओ में भी वरना
ये सौदागर बेच डालते कब का वतन दोस्तों
कहते है कभी आसमान जमीन के करीब था
इंसानियत मरी तो ऊँचा उठ गया गगन दोस्तों
दिल महबूब-ओ-समाज के लिए बराबर धडके
थोडा समझाकर रखो अपना बेचैन मन दोस्तों
ये सौदागर बेच डालते कब का वतन दोस्तों
कहते है कभी आसमान जमीन के करीब था
इंसानियत मरी तो ऊँचा उठ गया गगन दोस्तों
दिल महबूब-ओ-समाज के लिए बराबर धडके
थोडा समझाकर रखो अपना बेचैन मन दोस्तों
जफा की ओर मुझे तेरी हर बात ले जा रही है
उधेड़बुन में हूँ किस तरफ हयात ले जा रही है
जफा की ओर मुझे तेरी हर बात ले जा रही है
मैं चाहता तो नही था कभी उजालो से रुखसत
अफ़सोस मुझको अंधेरो में रात ले जा रही है
जफा की ओर मुझे तेरी हर बात ले जा रही है
मैं चाहता तो नही था कभी उजालो से रुखसत
अफ़सोस मुझको अंधेरो में रात ले जा रही है
तेरे अहसास की नदी शायद अब नदी ना रहे
दरिया की ओर अश्को की बरसात ले जा रही है
महोब्बत पर असर दुआओं का उल्टा पड गया है
गुमनामियो में वफा अपने हालात ले जा रही है
आइन्दा से अपना ख्याल खुद ही रखना जिंदगी
मुझे बज्म से उठाकर कोई करामत ले जा रही है
बेबसी में रवानगी का दिन तक तय कर लिया है
मेरी सोच साथ अपने ज़ज्बात ले जा रही है
यकीनन खो ही जाऊंगा मैं भी जमाने की भीड़ में
खींचकर बेचैन मुझको कायनात ले जा रही है
दरिया की ओर अश्को की बरसात ले जा रही है
महोब्बत पर असर दुआओं का उल्टा पड गया है
गुमनामियो में वफा अपने हालात ले जा रही है
आइन्दा से अपना ख्याल खुद ही रखना जिंदगी
मुझे बज्म से उठाकर कोई करामत ले जा रही है
बेबसी में रवानगी का दिन तक तय कर लिया है
मेरी सोच साथ अपने ज़ज्बात ले जा रही है
यकीनन खो ही जाऊंगा मैं भी जमाने की भीड़ में
खींचकर बेचैन मुझको कायनात ले जा रही है
दुआ असर लाएगी खुदा पर एतबार कर
सचमुच मेरी आरज़ू है तो इंतजार कर
दुआ असर लाएगी खुदा पर एतबार कर
नाटकबाज़ी से पर्दा अब गिरने वाला है
मेरा तब तलक खुद को थोडा तलबगार कर
दुआ असर लाएगी खुदा पर एतबार कर
नाटकबाज़ी से पर्दा अब गिरने वाला है
मेरा तब तलक खुद को थोडा तलबगार कर
तुम्हारा अपना कभी तुझसे नफरत ना करे
यकीनन चाहत है तो खरा व्यवहार कर
डूब जाएगी तेरी वफा की तमाम पूंजी
प्यार देने के मामले में ना उधार कर
तुझको रखेगा पलको पर बिठाकर बेचैन
अगर भरोसा है तो सच्चा इजहार कर
यकीनन चाहत है तो खरा व्यवहार कर
डूब जाएगी तेरी वफा की तमाम पूंजी
प्यार देने के मामले में ना उधार कर
तुझको रखेगा पलको पर बिठाकर बेचैन
अगर भरोसा है तो सच्चा इजहार कर
चबा डाले मुफलिसी ने बड़े बड़े हुनरमंद
उसने दिल नही सदा औकात को देखा
शायद ही कभी मेरे ज़ज्बात को देखा
इसलिए बेअसर रही मेरी पाक दुआए
खुदा ने मुझे देखकर कायनात को देखा
शायद ही कभी मेरे ज़ज्बात को देखा
इसलिए बेअसर रही मेरी पाक दुआए
खुदा ने मुझे देखकर कायनात को देखा
उसे अपनी कसमकश से ही फुर्सत ना थी
भला कब उसने मेरे ख्यालात को देखा
चबा डाले मुफलिसी ने बड़े बड़े हुनरमंद
जब झांक कर मरहूमो के हालात को देखा
वही समझेगा तुम्हारे दर्द को बेचैन
महोब्बत में जिस किसी ने मात को देखा
भला कब उसने मेरे ख्यालात को देखा
चबा डाले मुफलिसी ने बड़े बड़े हुनरमंद
जब झांक कर मरहूमो के हालात को देखा
वही समझेगा तुम्हारे दर्द को बेचैन
महोब्बत में जिस किसी ने मात को देखा
Friday, 21 September 2012
प्यार जिंदा रहता है मुलाकातों के सहारे
प्यार जिंदा रहता है मुलाकातों के सहारे
बचाकर रखोगे कब तलक बातों के सहारे
मैं इसलिए निकल आया छोड़कर उसको
वो बहला रहा था मुझे ज़ज्बातों के सहारे
बेशक से कल आती आज ही आ जाए मौत
नही लेना साँस उसकी खैरातों के सहारे
जवाब नही है तकदीर में तो नही है दोस्त
गुज़ार लूँगा जिंदगी सवालातों के सहारे
खुदा के वास्ते ना कोई भी नाम दे बेचैन
इश्क रोशन नही रिश्ते- नातों के सहारे
बचाकर रखोगे कब तलक बातों के सहारे
मैं इसलिए निकल आया छोड़कर उसको
वो बहला रहा था मुझे ज़ज्बातों के सहारे
बेशक से कल आती आज ही आ जाए मौत
नही लेना साँस उसकी खैरातों के सहारे
जवाब नही है तकदीर में तो नही है दोस्त
गुज़ार लूँगा जिंदगी सवालातों के सहारे
खुदा के वास्ते ना कोई भी नाम दे बेचैन
इश्क रोशन नही रिश्ते- नातों के सहारे
जिंदगी ज़ुल्फ़ नही है जो फिर से संवर जाएगी
एक बार उलझी तो उलझती चली जाएगी
जिंदगी ज़ुल्फ़ नही है जो फिर से संवर जाएगी
सोच समझकर ही लीजिएगा हरेक फैंसला
सदा लिए बात कोई शर्मिंदा कर जाएगी
तुम बेशक कूच कर जाओ मेरी दिल से लेकिन
मैं देखता हूँ तुम्हारी याद किधर जायेगी
जब तलक आएगा तेरे होश को होश जान
तब तक मेरी याद खुशबू बनके बिखर जाएगी
बेचैन प्यार के सिवा कोई भी और जिक्र छेड़
दास्ताने इश्क सुन मेरी आँख भर जायेगी
जिंदगी ज़ुल्फ़ नही है जो फिर से संवर जाएगी
सोच समझकर ही लीजिएगा हरेक फैंसला
सदा लिए बात कोई शर्मिंदा कर जाएगी
तुम बेशक कूच कर जाओ मेरी दिल से लेकिन
मैं देखता हूँ तुम्हारी याद किधर जायेगी
जब तलक आएगा तेरे होश को होश जान
तब तक मेरी याद खुशबू बनके बिखर जाएगी
बेचैन प्यार के सिवा कोई भी और जिक्र छेड़
दास्ताने इश्क सुन मेरी आँख भर जायेगी
कल वो फिर याद आयेंगे तो देखी जाएगी
चलो आज का काम तो चल गया शराब पीकर
कल वो फिर याद आयेंगे तो देखी जाएगी
सो जाऊंगा बिना खाए पिए नशे में पड़कर
रात को ख्वाब सतायेंगे तो देखी जाएगी
खो जाऊंगा उसकी यादों के बियाबान में
लोग उँगली उठाएंगे तो देखी जाएगी
उसको जी भर कर देखने की आरज़ू में
हम मिट भी अगर जायेंगे तो देखी जाएगी
मैं तो कभी जफा नही करूंगा बेचैन मगर
पर बेवफा कहलायेंगे तो देखी जाएगी
कल वो फिर याद आयेंगे तो देखी जाएगी
सो जाऊंगा बिना खाए पिए नशे में पड़कर
रात को ख्वाब सतायेंगे तो देखी जाएगी
खो जाऊंगा उसकी यादों के बियाबान में
लोग उँगली उठाएंगे तो देखी जाएगी
उसको जी भर कर देखने की आरज़ू में
हम मिट भी अगर जायेंगे तो देखी जाएगी
मैं तो कभी जफा नही करूंगा बेचैन मगर
पर बेवफा कहलायेंगे तो देखी जाएगी
Wednesday, 19 September 2012
जी भर कर देखे बगैर मेरी प्रेम कहानी अधूरी है
मैं झूठा मेरी तडफ झूठी सच्ची तेरी मजबूरी है
हाँ समझ गया हूँ तेरी महोब्बत कितनी मीठी छूरी है
जिस रोज मेरी प्यास तुम्हारे होठों पर पपड़ी ला देगी
तब बताना सिवा प्यार के दुनिया में क्या पाना जरूरी है
बता कोरे ज़ज्बातों के दम पर कब तक दूं खुद को तसल्ली
जी भर कर देखे बगैर मेरी प्रेम कहानी अधूरी है
तुझे कसम है तेरे ही ज़ज्बातों की मुझसे आन मिलो
मुझको लेकर अगर तुम्हारा कोई भी सपना सिन्दूरी है
हम दोनों के बीच फसाद की वही तो असली जड़ है जान
हाँ मेरे मन से तेरे मन की बेचैन जितनी दूरी है
Tuesday, 18 September 2012
मैं फायदा उठा रहा हूँ भोलेपन का कहते क्यूं नही
तुझे सोचकर दर्द बढ़ता है मेरे मन का कहते क्यूं नही
मैं हिस्सा बन गया हूँ तेरी उलझन का कहते क्यूं नही
जिंदगी सच बता वास्ता है तुझको तेरी ही पाकीजगी का
मैं तुझे चोर दिखता हूँ ना तेरे तन का कहते क्यूं नही
जो इल्जाम कल जमाना देगा तू आज ही दे दे तो अच्छा
मैं फायदा उठा रहा हूँ भोलेपन का कहते क्यूं नही
मेरी मुफलिसी-ओ- किरदार तेरे रुतबे आगे छोटे है
यही सबब तो है रोजाना की अनबन का कहते क्यूं नही
वैसे भी तो तुझको मर्द जात से सख्त नफरत है बेचैन
नही है भरोसा है तेरे चाल चलन का कहते क्यूं नही
मैं हिस्सा बन गया हूँ तेरी उलझन का कहते क्यूं नही
जिंदगी सच बता वास्ता है तुझको तेरी ही पाकीजगी का
मैं तुझे चोर दिखता हूँ ना तेरे तन का कहते क्यूं नही
जो इल्जाम कल जमाना देगा तू आज ही दे दे तो अच्छा
मैं फायदा उठा रहा हूँ भोलेपन का कहते क्यूं नही
मेरी मुफलिसी-ओ- किरदार तेरे रुतबे आगे छोटे है
यही सबब तो है रोजाना की अनबन का कहते क्यूं नही
वैसे भी तो तुझको मर्द जात से सख्त नफरत है बेचैन
नही है भरोसा है तेरे चाल चलन का कहते क्यूं नही
Monday, 17 September 2012
तेरा ही तो इंतजार है पथराई आँखों में
तू अश्क बनकर रहता है डबडबाई आँखों में
तेरा ही तो इंतजार है पथराई आँखों में
तू मिले जिस रोज उस दिन झांक कर देख लेना
सुबक सुबक कर पड़ गई है कितनी काई आँखों में
इसलिए ज्यादा फिक्रमंद मैं आजकल रहने लगा हूँ
अपना घर बसा चुकी है जान तन्हाई आँखों में
तू करता तो है बात के साथ मुझ पर शक मगर
क्या लगती है तुझे कही से बेवफाई आँखों में
इससे जियादा तुझे और क्या कहू बेचैन
तडफती रहती है प्यार की सच्चाई आँखों में
तेरा ही तो इंतजार है पथराई आँखों में
तू मिले जिस रोज उस दिन झांक कर देख लेना
सुबक सुबक कर पड़ गई है कितनी काई आँखों में
इसलिए ज्यादा फिक्रमंद मैं आजकल रहने लगा हूँ
अपना घर बसा चुकी है जान तन्हाई आँखों में
तू करता तो है बात के साथ मुझ पर शक मगर
क्या लगती है तुझे कही से बेवफाई आँखों में
इससे जियादा तुझे और क्या कहू बेचैन
तडफती रहती है प्यार की सच्चाई आँखों में
Sunday, 16 September 2012
दिल जब महबूब के इशारों के बीच बैठा
आज मैं सच्चे कलमकारों के बीच बैठा ,,,
जज्बात में डूबे हुवे यारो के बीच बैठा
उम्मीदों से सौ गुना सफल हुआ आयोजन
शहर जब धुरंधर फनकारों के बीच बैठा ,,,
सभी को तो भा गया अंदाज़ कवि संगम का
दिल जब हमख्याल बंजारों के बीच बैठा ,,,,
लागू हो जाये देश में तो आ जाये बदलाव
दोस्तों आज ऐसे विचारों के बीच बैठा
हां बेचैन को भी उस वक्त चैन मिल गया
दिल जब महबूब के इशारों के बीच बैठा
जज्बात में डूबे हुवे यारो के बीच बैठा
उम्मीदों से सौ गुना सफल हुआ आयोजन
शहर जब धुरंधर फनकारों के बीच बैठा ,,,
सभी को तो भा गया अंदाज़ कवि संगम का
दिल जब हमख्याल बंजारों के बीच बैठा ,,,,
लागू हो जाये देश में तो आ जाये बदलाव
दोस्तों आज ऐसे विचारों के बीच बैठा
हां बेचैन को भी उस वक्त चैन मिल गया
दिल जब महबूब के इशारों के बीच बैठा
Saturday, 15 September 2012
अगले जन्म में मुझे भी किसी जान बनाना दाता
जमाना औरत को हद से ज्यादा बेबस कहता है
मर्द के उस दर्द का क्या जिसे मन में सहता है
नजर अंदाज़ कर दी जाती है हर एक तकलीफ
आदमी की रूह से जब कभी भी आंसू बहता है
खासकर शादीशुदा लोगो की दिक्कत मत पूछो
जिनके ख्वाबो का किला कंवारेपन से ढहता है
माँ बहन बेटी ओ महबूबा को कितना ही प्यार दे
फिर भी बेचारे पर बेवफाई का दाग रहता है
अगले जन्म में मुझे भी किसी जान बनाना दाता
इस जन्म का कर्ज़ बेचैन चीख चीखकर कहता है
मर्द के उस दर्द का क्या जिसे मन में सहता है
नजर अंदाज़ कर दी जाती है हर एक तकलीफ
आदमी की रूह से जब कभी भी आंसू बहता है
खासकर शादीशुदा लोगो की दिक्कत मत पूछो
जिनके ख्वाबो का किला कंवारेपन से ढहता है
माँ बहन बेटी ओ महबूबा को कितना ही प्यार दे
फिर भी बेचारे पर बेवफाई का दाग रहता है
अगले जन्म में मुझे भी किसी जान बनाना दाता
इस जन्म का कर्ज़ बेचैन चीख चीखकर कहता है
Friday, 14 September 2012
न जाने कौन पायेगा मुस्कुराहट तुम्हारी
हमें तो अक्सर मिलती है गुर्राहट तुम्हारी
न जाने कौन पायेगा मुस्कुराहट तुम्हारी
उफ़.जिस्म के पुर्जे पुर्जे की बेजोड़ नक्कासी
फिर ऊपर से जानलेवा खिलखिलाहट तुम्हारी
ये तेरे हुश्न की महक है या काला जादू
अंधे तलक पहचान लेते है आहट तुम्हारी
जब भी देखा है गुस्सा नाक पर देखा है
आखिर कब देख पायेंगे नरमाहट तुम्हारी
सच बता तो सही बेचैन ये क्या माजरा है
क्यूं बढ़ रही दिनों दिन छटपटाहट तुम्हारी
न जाने कौन पायेगा मुस्कुराहट तुम्हारी
उफ़.जिस्म के पुर्जे पुर्जे की बेजोड़ नक्कासी
फिर ऊपर से जानलेवा खिलखिलाहट तुम्हारी
ये तेरे हुश्न की महक है या काला जादू
अंधे तलक पहचान लेते है आहट तुम्हारी
जब भी देखा है गुस्सा नाक पर देखा है
आखिर कब देख पायेंगे नरमाहट तुम्हारी
सच बता तो सही बेचैन ये क्या माजरा है
क्यूं बढ़ रही दिनों दिन छटपटाहट तुम्हारी
Thursday, 13 September 2012
वो जिंदा था तो तेरे नखरे नही सिमटे
वो जिंदा था तो तेरे नखरे नही सिमटे
अब रो उमर भर उस बदनसीब के लिए
वो प्यार में फरेब खाकर यूं कर गया कूच
छोटी पड़ गई थी दुनिया गरीब के लिए
शक्ल तो दूर आवाज़ तक न सुनाई देगी
अब रोजाना तरसो उस हबीब के लिए
तू मूंदकर आँखे जरा याद करके देख
वो सदा रोता था तेरे करीब के लिए
तू ही तो समझता था आबरू का दुश्मन
अब क्यूं बेचैन है मरहूम रकीब के लिए
अब रो उमर भर उस बदनसीब के लिए
वो प्यार में फरेब खाकर यूं कर गया कूच
छोटी पड़ गई थी दुनिया गरीब के लिए
शक्ल तो दूर आवाज़ तक न सुनाई देगी
अब रोजाना तरसो उस हबीब के लिए
तू मूंदकर आँखे जरा याद करके देख
वो सदा रोता था तेरे करीब के लिए
तू ही तो समझता था आबरू का दुश्मन
अब क्यूं बेचैन है मरहूम रकीब के लिए
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