Friends
Sunday, 29 January 2012
Tuesday, 24 January 2012
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा
तुझसे अब ना कोई शिकवा गिला करूंगा
आगे से जिंदगी मैं कम ही मिला करूंगा
जब तुझे ही नही है कोई ख़ास दिलचस्पी
किसलिए मुलाकातों का सिलसिला करूंगा
जब तय हो चुका तू नही जीत का हासिल
फिर क्यूं साथ यादों का काफिला करूंगा
हो सके तो करना मेरी बात का यकीन
मैं कही भी रहूँ तेरे लिए दुआ करूंगा
कसमकस में शायद अब न रहूँ ज्यादा दिन
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा
कम से कम इश्क के मामले में सीख लिया
ज़ज्बात में बहकर न किसी का भला करूंगा
अब नही गुजरूँगा अहसास के जंगल से
वादा रहा बेचैन सम्भल कर चला करूंगा
आगे से जिंदगी मैं कम ही मिला करूंगा
जब तुझे ही नही है कोई ख़ास दिलचस्पी
किसलिए मुलाकातों का सिलसिला करूंगा
जब तय हो चुका तू नही जीत का हासिल
फिर क्यूं साथ यादों का काफिला करूंगा
हो सके तो करना मेरी बात का यकीन
मैं कही भी रहूँ तेरे लिए दुआ करूंगा
कसमकस में शायद अब न रहूँ ज्यादा दिन
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा
कम से कम इश्क के मामले में सीख लिया
ज़ज्बात में बहकर न किसी का भला करूंगा
अब नही गुजरूँगा अहसास के जंगल से
वादा रहा बेचैन सम्भल कर चला करूंगा
Saturday, 21 January 2012
तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी
देख लेना उस पल तुम्हारी भर आएँगी आँखें
मेरे ना होने की जब तुम तक खबर पहुंचेगी
मेरी चीख सुनाई देगी तेरे ज़हन में हरसू
तुम्हारे कसूर तक जब तुम्हारी नजर पहुंचेगी
याद आएगी जब पथराई आँखों की बेबसी
इक आह तेरी रूह तक जाने जिगर पहुंचेगी
मैं तो शहर से क्या दुनिया से ही जा चुका हूँगा
बता तो फिर चाय पीने तू किसके घर पहुंचेगी
शर्त लगा ले तब तक पैदा हो जायेगा अफ़सोस
तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी
मेरे ना होने की जब तुम तक खबर पहुंचेगी
मेरी चीख सुनाई देगी तेरे ज़हन में हरसू
तुम्हारे कसूर तक जब तुम्हारी नजर पहुंचेगी
याद आएगी जब पथराई आँखों की बेबसी
इक आह तेरी रूह तक जाने जिगर पहुंचेगी
मैं तो शहर से क्या दुनिया से ही जा चुका हूँगा
बता तो फिर चाय पीने तू किसके घर पहुंचेगी
शर्त लगा ले तब तक पैदा हो जायेगा अफ़सोस
तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता
तन्हाई में गजले मेरी गुनगुनाकर तो देखता
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता
गिर जाता कोई न कोई आंसू तेरे दामन पर
मेरी याद में पलकें झिलमिलाकर तो देखता
मेरी दीवानगी से ही तू घबराता रहा सदा
मेरा प्यार अपने डर से टकराकर तो देखता
मैं उतना पागल नही हूँ तू जितना सोचता है
समझ जाता बात प्यार से समझाकर तो देखता
जुल्फों के साथ ख्याल भी तेरे उलझे रहे सदा
सुलझा देता बेचैन जिक्र उठा कर तो देखता
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता
गिर जाता कोई न कोई आंसू तेरे दामन पर
मेरी याद में पलकें झिलमिलाकर तो देखता
मेरी दीवानगी से ही तू घबराता रहा सदा
मेरा प्यार अपने डर से टकराकर तो देखता
मैं उतना पागल नही हूँ तू जितना सोचता है
समझ जाता बात प्यार से समझाकर तो देखता
जुल्फों के साथ ख्याल भी तेरे उलझे रहे सदा
सुलझा देता बेचैन जिक्र उठा कर तो देखता
बच्चे की तरह पालूंगा ता-उम्र तुम्हारी याद
बच्चे की तरह पालूंगा ता-उम्र तुम्हारी याद
तुम ले जाना इसे बेशक जवान होने पर
तेरे इश्क ने ही सिखाया है मुझको सबक
पछताता है आदमी सच का ज्ञान होने पर
यकीन का नाम सुना है तो कर थोडा यकीन
बुरा भला बकता हूँ कुछ परेशान होने पर
मैं तो खुद पर इतरा रहा हूँ पाकर तुझको
तू भी कुछ गरूर कर मेरी जान होने पर
अगर नही मालूम तो बता देता हूँ तुझको
मन शक पर शक धरता है बेईमान होने पर
तेरे प्यार की जरा सी मुझे हवा क्या लगी
खूब रोता हूँ कच्चे दिल का इंसान होने पर
मुझे लेकर बेचैन कोई किसलिए होगा भला
क्यूं याद रखेगा पहलू में आसमान होने पर
तुम ले जाना इसे बेशक जवान होने पर
तेरे इश्क ने ही सिखाया है मुझको सबक
पछताता है आदमी सच का ज्ञान होने पर
यकीन का नाम सुना है तो कर थोडा यकीन
बुरा भला बकता हूँ कुछ परेशान होने पर
मैं तो खुद पर इतरा रहा हूँ पाकर तुझको
तू भी कुछ गरूर कर मेरी जान होने पर
अगर नही मालूम तो बता देता हूँ तुझको
मन शक पर शक धरता है बेईमान होने पर
तेरे प्यार की जरा सी मुझे हवा क्या लगी
खूब रोता हूँ कच्चे दिल का इंसान होने पर
मुझे लेकर बेचैन कोई किसलिए होगा भला
क्यूं याद रखेगा पहलू में आसमान होने पर
Wednesday, 18 January 2012
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ
उसे उल्टा सीधा बोलकर खूब रोता हूँ
या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ
शीशे की तरह साफ़ है इश्क के हालात
फिर भी रोज नये ख्वाब क्यूं संजोता हूँ
तेरी याद में मंगल वीर सब एक समान
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ
मुस्कुराना अपनी जगह मगर सच है यह
आजकल चैन की नींद नही सोता हूँ
अब भी वही जवाब है उसका बेचैन
मैं ही सवालातों का बोझ ढोता हूँ
या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ
शीशे की तरह साफ़ है इश्क के हालात
फिर भी रोज नये ख्वाब क्यूं संजोता हूँ
तेरी याद में मंगल वीर सब एक समान
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ
मुस्कुराना अपनी जगह मगर सच है यह
आजकल चैन की नींद नही सोता हूँ
अब भी वही जवाब है उसका बेचैन
मैं ही सवालातों का बोझ ढोता हूँ
Tuesday, 17 January 2012
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा
आंसू की शक्ल में ना कोई भ्रम निकलेगा
पथराई आँखों से अब तो दम निकलेगा
फिर करता हूँ आज मैं एक बार वादा
न जीते जी दिल से तेरा गम निकलेगा
मान जा सितमगर बहुत देर हो जाएगी
जब तक तेरी जुल्फों का खम निकलेगा
ओढ़ लेगा तन्हाई छोड़ कर आवारगी
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा
कर चुके होंगे लोग तेहरवी बेचैन
सुध लेने जब तक तेरा सनम निकलेगा
खम=उलझन
पथराई आँखों से अब तो दम निकलेगा
फिर करता हूँ आज मैं एक बार वादा
न जीते जी दिल से तेरा गम निकलेगा
मान जा सितमगर बहुत देर हो जाएगी
जब तक तेरी जुल्फों का खम निकलेगा
ओढ़ लेगा तन्हाई छोड़ कर आवारगी
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा
कर चुके होंगे लोग तेहरवी बेचैन
सुध लेने जब तक तेरा सनम निकलेगा
खम=उलझन
Monday, 16 January 2012
अपनी महबूबा को मैं ढाढ़ी में रखता हूँ
यूं गौर चेहरे की खेती बाड़ी में रखता हूँ
इसलिए नही आती मुझे सफर में दिक्कत
उसकी तस्वीर हमेशा गाडी में रखता हूँ
मालूम हुआ है जब से उसका पसंदीदा रंग
तब से बीवी को नीली साडी में रखता हूँ
यही तो सबब है मेरी सांसे महकने का
उसे छिपाकर दिल की फुलवाड़ी में रखता हूँ
बता जीते जी कैसे वो दूर होगा बेचैन
लहू सा उसे शरीर की नाडी में रखता हूँ
Sunday, 15 January 2012
फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
कितना ही तलाश करना नजर नही आऊंगा
तुम्हारी जिंदगी से जब मैं दूर चला जाऊंगा
फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
तुम्हारी हरकतों पर कौन सा टोकने आऊंगा
बेशक से बहाना आंसू मेरी बातें याद करके
कौन सा मैं पिंघल कर उनको पोंछने आऊंगा
मैं हिन्दू हूँ जान मेरी तो कब्र भी ना बनेगी
तुम देख लेना राख के ढेर में बदल जाऊंगा
जाओ ये भी वादा रहा तेरे बेचैन का तुमसे
क्यूं आई मौत राज अपने साथ ले जाऊंगा
तुम्हारी जिंदगी से जब मैं दूर चला जाऊंगा
फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
तुम्हारी हरकतों पर कौन सा टोकने आऊंगा
बेशक से बहाना आंसू मेरी बातें याद करके
कौन सा मैं पिंघल कर उनको पोंछने आऊंगा
मैं हिन्दू हूँ जान मेरी तो कब्र भी ना बनेगी
तुम देख लेना राख के ढेर में बदल जाऊंगा
जाओ ये भी वादा रहा तेरे बेचैन का तुमसे
क्यूं आई मौत राज अपने साथ ले जाऊंगा
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी
अच्छा किया मुझे मेरी औकात याद दिला दी
जो भूल चुका मैं मुझे वो बात याद दिला दी
क्यूं रहेगी बता तेरी यादों की जमी बंजर
तूने आंसुओ की जब बरसात याद दिला दी
ज्यादा ही हवा में मैं उड़ने लगा था शायद
जो तुमने नसीब में मिली मात याद दिला दी
तन्हाई बेबसी और दर्द से डरकर भाग रहे
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी
इक हादसा बनकर आने का शुक्रिया बेचैन
है जिंदगी कितनी वाहियात याद दिला दी
जो भूल चुका मैं मुझे वो बात याद दिला दी
क्यूं रहेगी बता तेरी यादों की जमी बंजर
तूने आंसुओ की जब बरसात याद दिला दी
ज्यादा ही हवा में मैं उड़ने लगा था शायद
जो तुमने नसीब में मिली मात याद दिला दी
तन्हाई बेबसी और दर्द से डरकर भाग रहे
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी
इक हादसा बनकर आने का शुक्रिया बेचैन
है जिंदगी कितनी वाहियात याद दिला दी
Saturday, 14 January 2012
जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
अगर मुझको भ्रम है तो मेरा भ्रम तोड़ दो
नही बिगड़ा है अब भी कुछ, मुझको छोड़ दो
मन के किसी कोने में गर दिल्लगी का भूत है
जितना जल्दी हो सके उसका सर फोड़ दो
जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
चुपचाप गरीब आशिक का हिसाब जोड़ दो
हो सके तो खाना रहम मेरा पहला प्यार है
कही ऐसा ना निम्बू सा मुझको निचोड़ दो
बस तेरा नाम लेकर मिल लेंगे बेचैन
चाहे जहाँ भर के गम मेरी और मोड़ दो
नही बिगड़ा है अब भी कुछ, मुझको छोड़ दो
मन के किसी कोने में गर दिल्लगी का भूत है
जितना जल्दी हो सके उसका सर फोड़ दो
जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
चुपचाप गरीब आशिक का हिसाब जोड़ दो
हो सके तो खाना रहम मेरा पहला प्यार है
कही ऐसा ना निम्बू सा मुझको निचोड़ दो
बस तेरा नाम लेकर मिल लेंगे बेचैन
चाहे जहाँ भर के गम मेरी और मोड़ दो
कहाँ फंसी फिर बुदबुदाई होगी मगर कोई आसपास होगा
उसे मेरी याद तो आई होगी मगर कोई आसपास होगा
जुदाई के मारे मेरी हालत का अंदाज़ा लगाने पर यारों
उसकी आँख तो भर आई होगी मगर कोई आसपास होगा
बैठकर आईने आगे वो आज तो शायद सिंगार करते वक्त
अपने आप से बतियाई होगी मगर कोई आसपास होगा
उसकी फितरत में शामिल वही झूठा इक पुराना अफ़सोस
कहाँ फंसी फिर बुदबुदाई होगी मगर कोई आसपास होगा
शायद चुराकर सबसे नजरे उसने आह भरते हुवे बेचैन
मेरी गजल तो गुनगुनाई होगी मगर कोई आसपास होगा
Friday, 13 January 2012
कामयाबी दोस्तों किसी भी शक्ल में गौर फरमा सकती है
दरवाजे से ही नही दीवार फांदकर भी आ सकती है
कामयाबी दोस्तों किसी भी शक्ल में गौर फरमा सकती है
भूलकर भी मत करना मेहनतकस से कभी बेईमानी
उसकी एक बददुआ तुमको अर्श से फर्श पर ला सकती है
दुश्मन में हुनर है तो उसकी भी तारीफ करो दिल से
ना जाने कौन सी बात जिंदगी जीना सीखा सकती है
गलत अंदाजे लगा बेकार में मायूस होकर मत बैठो
यहाँ आपके काम की तारीफ कभी भी की जा सकती है
जल्दी बेचैन मत हो सब्र का फल चखकर तो देख
तकदीर तुम्हारी दोस्त कभी भी तो पलटा खा सकती है
कामयाबी दोस्तों किसी भी शक्ल में गौर फरमा सकती है
भूलकर भी मत करना मेहनतकस से कभी बेईमानी
उसकी एक बददुआ तुमको अर्श से फर्श पर ला सकती है
दुश्मन में हुनर है तो उसकी भी तारीफ करो दिल से
ना जाने कौन सी बात जिंदगी जीना सीखा सकती है
गलत अंदाजे लगा बेकार में मायूस होकर मत बैठो
यहाँ आपके काम की तारीफ कभी भी की जा सकती है
जल्दी बेचैन मत हो सब्र का फल चखकर तो देख
तकदीर तुम्हारी दोस्त कभी भी तो पलटा खा सकती है
तुमसे मिलने जब आऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
तुमसे मिलने जब आऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
मैं अपना नाम बताऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
किसी रोज भीड़ से निकल कर अचानक कभी तुमको
अपना चेहरा दिखाऊँ, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
ऑनलाइन देती हो तुम रोजाना जितना प्यार
रूबरू मांगने आऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
ख्वाब जैसे अहसास के रिश्ते को आगे बढ़ा कर
कभी हकीकत बन जाऊं , मुझे पहचान तो लोगी ना..?
भूली बिसरी किसी बज्म में होकर बेचैन तुमको
जब कोई गजल सुनाऊँ , मुझे पहचान तो लोगी ना..?
Thursday, 12 January 2012
इसलिए चाहता हूँ कुछ बात है तुझमे
मूंगफली और रेवड़ी सा स्वाद है तुझमे
इसलिए चाहता हूँ कुछ बात है तुझमे
मकर सक्रांति आई तो याद आया कुछ
गज्जक जैसे मिठास सी करामात है तुझमे
रोते हुवे बच्चों को झट गोद में ले लेते हो
क्या खूब गजब के ख्यालात है तुझमे
दुनिया जबकि मसखरों की मेरी जान
किसलिए इतने गहरे ज़ज्बात है तुझमे
मरने के बाद भी दोगे तो चलेगा बेचैन
आंसुओ भरी एक उधारी रात है तुझमे
इसलिए चाहता हूँ कुछ बात है तुझमे
मकर सक्रांति आई तो याद आया कुछ
गज्जक जैसे मिठास सी करामात है तुझमे
रोते हुवे बच्चों को झट गोद में ले लेते हो
क्या खूब गजब के ख्यालात है तुझमे
दुनिया जबकि मसखरों की मेरी जान
किसलिए इतने गहरे ज़ज्बात है तुझमे
मरने के बाद भी दोगे तो चलेगा बेचैन
आंसुओ भरी एक उधारी रात है तुझमे
मुझे तो मेरा महबूब खुदा दिखता है
कमबख्त गिरगिट तो नही था पिछले जन्म में
तेवर का रंग बार बार जुदा दिखता है
आपको लगता होगा वो आम किरदार
मुझे तो मेरा महबूब खुदा दिखता है
वही लोग झेलते है प्यार में दिक्कते
जिन्हें आसमान दूर तक झुका दिखता है
बाद में करना लोगों की बात का यकीं
बता मेरी आँखों में तुझे क्या दिखता है
जाने क्यों सताता है तुझे बार बार वो
आदमी तो तू बेचैन भला दिखता है
तेवर का रंग बार बार जुदा दिखता है
आपको लगता होगा वो आम किरदार
मुझे तो मेरा महबूब खुदा दिखता है
वही लोग झेलते है प्यार में दिक्कते
जिन्हें आसमान दूर तक झुका दिखता है
बाद में करना लोगों की बात का यकीं
बता मेरी आँखों में तुझे क्या दिखता है
जाने क्यों सताता है तुझे बार बार वो
आदमी तो तू बेचैन भला दिखता है
Wednesday, 11 January 2012
उसे गणित में फंसाकर तूने अच्छा नही किया
दोजख में भी तुझको पंडित जगह ना मिलेगी
महबूब बरगलाकर तूने अच्छा नही किया
राहू-शनि के डर से मुलाक़ात नही करता
उसे गणित में फंसाकर तूने अच्छा नही किया
तेरी बात तुझको भारी पड़ेगी एक दिन
यूं झूठी कसम खाकर तूने अच्छा नही किया
फिर कुछेक कमीनो से हाथ मिलाना पड़ेगा
मुझे बज्म में बुलाकर तूने अच्छा नही किया
बिना बेचैन किये भी तो समझा सकता था
बातों को उलझाकर तूने अच्छा नही किया
महबूब बरगलाकर तूने अच्छा नही किया
राहू-शनि के डर से मुलाक़ात नही करता
उसे गणित में फंसाकर तूने अच्छा नही किया
तेरी बात तुझको भारी पड़ेगी एक दिन
यूं झूठी कसम खाकर तूने अच्छा नही किया
फिर कुछेक कमीनो से हाथ मिलाना पड़ेगा
मुझे बज्म में बुलाकर तूने अच्छा नही किया
बिना बेचैन किये भी तो समझा सकता था
बातों को उलझाकर तूने अच्छा नही किया
Tuesday, 10 January 2012
ढाढ़ी क्या बढ़ी वो बेचारा दिखने लगा
ढाढ़ी क्या बढ़ी वो बेचारा दिखने लगा
अंधे को भी इश्क का मारा दिखने लगा
चुराने लगा आँखे हर एक बात पर जब
हरकतों में छिपा हाल सारा दिखने लगा
महबूब का साथ उसको क्या मिला यारों
कमबख्त में हर वक्त तरारा दिखने लगा
सदियों से जिसे जमाना ताज कह रहा था
गरीब आशिक को वो ईंट गारा दिखने लगा
दिखाया उसने जब दिल का छाला बेचैन
वो उसी पल से अक्स हमारा दिखने लगा
अंधे को भी इश्क का मारा दिखने लगा
चुराने लगा आँखे हर एक बात पर जब
हरकतों में छिपा हाल सारा दिखने लगा
महबूब का साथ उसको क्या मिला यारों
कमबख्त में हर वक्त तरारा दिखने लगा
सदियों से जिसे जमाना ताज कह रहा था
गरीब आशिक को वो ईंट गारा दिखने लगा
दिखाया उसने जब दिल का छाला बेचैन
वो उसी पल से अक्स हमारा दिखने लगा
Monday, 9 January 2012
भूत बनकर डराती है यादें तुम्हारी
भूत बनकर डराती है यादें तुम्हारी
अंदर ही अंदर खाती है यादें तुम्हारी
जैसे तुम गई पैर पटक कर उस रोज
ऐसे क्यूं नही जाती है यादें तुम्हारी
सर्दी-गर्मी या बरसात का मौसम हो
कभी नही मुरझाती है यादें तुम्हारी
कई दफा तुम्हारी कसम रो पड़ता हूँ
जब सिसकियाँ सुनाती है यादें तुम्हारी
चेहरे से साफ झलक जाता है बेचैन हूँ
जब बिजलियाँ गिराती है यादें तुम्हारी
अंदर ही अंदर खाती है यादें तुम्हारी
जैसे तुम गई पैर पटक कर उस रोज
ऐसे क्यूं नही जाती है यादें तुम्हारी
सर्दी-गर्मी या बरसात का मौसम हो
कभी नही मुरझाती है यादें तुम्हारी
कई दफा तुम्हारी कसम रो पड़ता हूँ
जब सिसकियाँ सुनाती है यादें तुम्हारी
चेहरे से साफ झलक जाता है बेचैन हूँ
जब बिजलियाँ गिराती है यादें तुम्हारी
Saturday, 7 January 2012
बना लो कोई प्रोग्राम ठंड और संडे दोनों है
सुन बिन गुठली वाले आम ठंड और संडे दोनों है
बना भी ले कोई प्रोग्राम ठंड और संडे दोनों है
मुझे टोकने की गुस्ताखी हो सके तो मत करना
भाड़ में जाए काम धाम ठंड और संडे दोनों है
हद से ज्यादा जरूरत है दिल के दर्द को तुम्हारी
मत दूर जा अ झंडूबाम ठंड और संडे दोनों है
बस आँखों में डाल आँखें पास मेरे बैठी रह
कबूल तेरे सब इल्जाम ठंड और संडे दोनों है
नही आएगी कमज़ोरी इक रोज की छुट्टी से
नही करते आज व्यायाम ठंड और संडे दोनों है
मौसम के बहाने मस्ती से मिलना हो जायेगा
देख लगाकर तू भी जाम ठंड और संडे दोनों है
ना रहे बेचैन कोई सबका दाता करे जुगाड़
सबके मन को मिले आराम ठंड और संडे दोनों है
बना भी ले कोई प्रोग्राम ठंड और संडे दोनों है
मुझे टोकने की गुस्ताखी हो सके तो मत करना
भाड़ में जाए काम धाम ठंड और संडे दोनों है
हद से ज्यादा जरूरत है दिल के दर्द को तुम्हारी
मत दूर जा अ झंडूबाम ठंड और संडे दोनों है
बस आँखों में डाल आँखें पास मेरे बैठी रह
कबूल तेरे सब इल्जाम ठंड और संडे दोनों है
नही आएगी कमज़ोरी इक रोज की छुट्टी से
नही करते आज व्यायाम ठंड और संडे दोनों है
मौसम के बहाने मस्ती से मिलना हो जायेगा
देख लगाकर तू भी जाम ठंड और संडे दोनों है
ना रहे बेचैन कोई सबका दाता करे जुगाड़
सबके मन को मिले आराम ठंड और संडे दोनों है
कमबख्त दिल के साथ मेरा दिमाग ले गया
वो सोचने समझने की सब आग ले गया
कमबख्त दिल के साथ मेरा दिमाग ले गया
काम कोई भी ढंग से नही हो रहा है
मेरी जादूगरी के वो सब्जबाग ले गया
खुद तो गया दो जहाँ से मगर साथ अपने
तमाम गिद्ध और चीलों को काग ले गया
उसकी शक्ल के सिवा सब धुंधला दिख रहा है
वो आँखों की पुतलियों का चिराग ले गया
इसलिए रहता हूँ बेचैनी में बेचैन
वो मुस्कुराकर मन का सुरीला राग ले गया
कमबख्त दिल के साथ मेरा दिमाग ले गया
काम कोई भी ढंग से नही हो रहा है
मेरी जादूगरी के वो सब्जबाग ले गया
खुद तो गया दो जहाँ से मगर साथ अपने
तमाम गिद्ध और चीलों को काग ले गया
उसकी शक्ल के सिवा सब धुंधला दिख रहा है
वो आँखों की पुतलियों का चिराग ले गया
इसलिए रहता हूँ बेचैनी में बेचैन
वो मुस्कुराकर मन का सुरीला राग ले गया
तू फिक्रमंद निकली अपने दीवाने के लिए
शुक्रिया अहसास का जाम पिलाने के लिए
तू फिक्रमंद निकली अपने दीवाने के लिए
तुम आँखों से पिलाने को तैयार हो जब
मैं क्यूं भटकता फिरूंगा मयखाने के लिए
जान देकर भी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा
कैसे भी पेश आ मुझे आजमाने के लिए
इश्क को पैदा किया है जां लूटाने के लिए
हुश्न तराशा है खुदा ने गजब ढाने के लिए
आइन्दा से आँख ख़ुशी में ही छलकेगी
सबब नही अब पलके झिलमिलाने के लिए
आगे बढ़कर थाम लिया सौ बार शुक्रिया
जो बेचैन था लम्हा पास आने के लिए
तू फिक्रमंद निकली अपने दीवाने के लिए
तुम आँखों से पिलाने को तैयार हो जब
मैं क्यूं भटकता फिरूंगा मयखाने के लिए
जान देकर भी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा
कैसे भी पेश आ मुझे आजमाने के लिए
इश्क को पैदा किया है जां लूटाने के लिए
हुश्न तराशा है खुदा ने गजब ढाने के लिए
आइन्दा से आँख ख़ुशी में ही छलकेगी
सबब नही अब पलके झिलमिलाने के लिए
आगे बढ़कर थाम लिया सौ बार शुक्रिया
जो बेचैन था लम्हा पास आने के लिए
Friday, 6 January 2012
कभी मौका लगे तो नाचता मोर देखना
इश्क में आयेंगे क्या क्या दौर देखना
जिक्रे-शराफत में खुद को चोर देखना
तुम खुद महसूस करोगी फर्क चेहरे में
बस इक बार जरा आइना और देखना
क्यूं रोता हूँ हंसते हंसते जान जाओगी
कभी मौका लगे तो नाचता मोर देखना
बैठकर तन्हाई में बंद करके दोनों आँखे
मेरी तडफ का धडकनों में शोर देखना
बेचैन होकर पहले मेरी आरज़ू तो कर
फिर उसके बाद तकदीर का जोर देखना
जिक्रे-शराफत में खुद को चोर देखना
तुम खुद महसूस करोगी फर्क चेहरे में
बस इक बार जरा आइना और देखना
क्यूं रोता हूँ हंसते हंसते जान जाओगी
कभी मौका लगे तो नाचता मोर देखना
बैठकर तन्हाई में बंद करके दोनों आँखे
मेरी तडफ का धडकनों में शोर देखना
बेचैन होकर पहले मेरी आरज़ू तो कर
फिर उसके बाद तकदीर का जोर देखना
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में
मैं जकड़ा हुआ हूँ हालात की जंजीर में
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में
मैं जिंदगी के सर्कस का जोकर हूँ जान
नही लिखवाकर लाया हंसना तकदीर में
मैं नही हूँ तुम्हारे ख्वाबो का शहजादा
मत बर्बाद कीजियेगा वक्त इस कबीर में
कैसे लूं तुझे बाँहों में भरने का ख्वाब
जब दिख नही रही तुम हाथों की लकीर में
होकर बेचैन दम तोड़ता है तो तोड़ने दो
मत तरस खाना अपनी जुल्फों के असीर में
असीर= कैदी
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में
मैं जिंदगी के सर्कस का जोकर हूँ जान
नही लिखवाकर लाया हंसना तकदीर में
मैं नही हूँ तुम्हारे ख्वाबो का शहजादा
मत बर्बाद कीजियेगा वक्त इस कबीर में
कैसे लूं तुझे बाँहों में भरने का ख्वाब
जब दिख नही रही तुम हाथों की लकीर में
होकर बेचैन दम तोड़ता है तो तोड़ने दो
मत तरस खाना अपनी जुल्फों के असीर में
असीर= कैदी
Thursday, 5 January 2012
मुझसे गुठली की नही आम की बातें कर
आजमाइश छोड़ कर काम की बातें कर
मुझसे गुठली की नही आम की बातें कर
शोहरत का तो अचार भी नही डलता दोस्त
हो सके तो व्यपार में दाम की बातें कर
सिफारिस के साथ मेहनत भी लाज़िम है
ना गरुर में ज्यादा दुआ सलाम की बातें कर
तेरे मन में क्या वो तो सभी जान गए है
नेता जी जुबा से तो आवाम की बातें कर
दिन किस तरहा गुजरा भूल जाओ बेचैन
क्या करेगा ख़ास आज शाम की बातें कर
मुझसे गुठली की नही आम की बातें कर
शोहरत का तो अचार भी नही डलता दोस्त
हो सके तो व्यपार में दाम की बातें कर
सिफारिस के साथ मेहनत भी लाज़िम है
ना गरुर में ज्यादा दुआ सलाम की बातें कर
तेरे मन में क्या वो तो सभी जान गए है
नेता जी जुबा से तो आवाम की बातें कर
दिन किस तरहा गुजरा भूल जाओ बेचैन
क्या करेगा ख़ास आज शाम की बातें कर
Wednesday, 4 January 2012
देख कही ठंड ना लग जाए हमारे प्यार को
जमाने की आबो हवा से बचकर मेरी जान
देख कही ठंड ना लग जाए हमारे प्यार को
अहसास की धुंध निकलेगी दोनों के मुह से
कोई तो पिलाकर देखे चाय हमारे प्यार को
हमने तुमने शादी का फैंसला क्या लिया है
देने लगे है आशिक दुआएं हमारे प्यार को
तुम नौ हाथ की रजाई तान कर सो जाओ
छू भी नही सकती बलाएँ हमारे प्यार को
आओ जहाँ को कर दे हम इस तरह बेचैन
लोग जन्मों का बंधन बताये हमारे प्यार को
देख कही ठंड ना लग जाए हमारे प्यार को
अहसास की धुंध निकलेगी दोनों के मुह से
कोई तो पिलाकर देखे चाय हमारे प्यार को
हमने तुमने शादी का फैंसला क्या लिया है
देने लगे है आशिक दुआएं हमारे प्यार को
तुम नौ हाथ की रजाई तान कर सो जाओ
छू भी नही सकती बलाएँ हमारे प्यार को
आओ जहाँ को कर दे हम इस तरह बेचैन
लोग जन्मों का बंधन बताये हमारे प्यार को
Saturday, 31 December 2011
नये साल से मेरी जान की तकदीर संवर जाए
नये साल से मेरी जान की तकदीर संवर जाए
मेरे इश्क के भगवान की तकदीर संवर जाए
जागते ही सुबह कोई खुश खबरी मिले ख़ास
मेरी महोब्बत के ईमान की तकदीर संवर जाए
बचपन से देखा ख्वाब उसका हर हाल में हो पूरा
उसके हिस्से के आसमान की तकदीर संवर जाए
झुक ना पाए पलकें जब रफ्तार बढ़े धडकनों की
दोस्तों काश दिले नादान की तकदीर संवर जाए
हालात तो नही है बेचैन फिर दुआ तो दे देता हूँ
कैसे भी मेरे हिन्दुस्तान की तकदीर संवर जाए
मेरे इश्क के भगवान की तकदीर संवर जाए
जागते ही सुबह कोई खुश खबरी मिले ख़ास
मेरी महोब्बत के ईमान की तकदीर संवर जाए
बचपन से देखा ख्वाब उसका हर हाल में हो पूरा
उसके हिस्से के आसमान की तकदीर संवर जाए
झुक ना पाए पलकें जब रफ्तार बढ़े धडकनों की
दोस्तों काश दिले नादान की तकदीर संवर जाए
हालात तो नही है बेचैन फिर दुआ तो दे देता हूँ
कैसे भी मेरे हिन्दुस्तान की तकदीर संवर जाए
Friday, 30 December 2011
तारीख की पलकों पर सजाऊंगा तुझे
वो दे गया जिसकी तलाश थी मुझे
गुज़रा साल कैसे भुलाउंगा तुझे
कुछ भी दे दे अब आने वाला वक्त
मैं जीत का हासिल बताऊंगा तुझे
दिन महीने साल गुजरें कितने ही
तारीख की पलकों पर सजाऊंगा तुझे
भरोसा रख जिंदगी अपने दीवाने पर
अह्सासे-खुशनसीबी दिलाऊंगा तुझे
क्यूं हो जाता हूँ बात बात पर बेचैन
मिल किसी रोज समझाऊंगा तुझे
गुज़रा साल कैसे भुलाउंगा तुझे
कुछ भी दे दे अब आने वाला वक्त
मैं जीत का हासिल बताऊंगा तुझे
दिन महीने साल गुजरें कितने ही
तारीख की पलकों पर सजाऊंगा तुझे
भरोसा रख जिंदगी अपने दीवाने पर
अह्सासे-खुशनसीबी दिलाऊंगा तुझे
क्यूं हो जाता हूँ बात बात पर बेचैन
मिल किसी रोज समझाऊंगा तुझे
Thursday, 29 December 2011
नये साल पर मशवरा है मुफ्त में सभी को
इस साल के झगड़े इसी साल निपटा लो
भूलकर नाराजगी रूठा महबूब मना लो
एक दूसरे की गलती फिर निकलना कभी
तुम फिलहाल नये साल की धूम मचा लो
प्यार है तो रूठना भी जरूरी है मेरे दोस्त
अच्छे से ये बात दिलों-दिमाग में बिठा लो
मिलता है मौका तो माथे पर चुम्बन लेकर
पाकीजगी के अहसास का दीपक जला लो
गर अगले जन्म में भी उसी की आरजू है
दे देगा खुदा शिवाले जाकर सर झुका लो
चाहत है नये साल पर गर ज्यदा मजे की
पैग लगाकर सच बोलने की कसम खा लो
नये साल पर मशवरा है मुफ्त में बेचैन
दोस्ती के रिश्ते को थोडा सा आगे बढ़ा लो
भूलकर नाराजगी रूठा महबूब मना लो
एक दूसरे की गलती फिर निकलना कभी
तुम फिलहाल नये साल की धूम मचा लो
प्यार है तो रूठना भी जरूरी है मेरे दोस्त
अच्छे से ये बात दिलों-दिमाग में बिठा लो
मिलता है मौका तो माथे पर चुम्बन लेकर
पाकीजगी के अहसास का दीपक जला लो
गर अगले जन्म में भी उसी की आरजू है
दे देगा खुदा शिवाले जाकर सर झुका लो
चाहत है नये साल पर गर ज्यदा मजे की
पैग लगाकर सच बोलने की कसम खा लो
नये साल पर मशवरा है मुफ्त में बेचैन
दोस्ती के रिश्ते को थोडा सा आगे बढ़ा लो
जो भी उम्मीदें है इस साल पूरी हो जाएँ
जो भी उम्मीदें है इस साल पूरी हो जाएँ
है दुआ कामयाबी तुमसे मिलने घर आये
पूरे घराने और माँ-बाप का हो नाम रोशन
तुम्हारे नाम की ही हर कोई कसमे खाएं
हो मसला इश्क का या कोई व्यपार वाला
तुम्हारे वास्ते मुश्किल सभी सुलझ जाएँ
अव्वल तो आंसू कोई तुम्हारे कभी ना आये
अगर वो आये तो खुशखबरी संग में लायें
चाहे तखल्लुस में अपना नाम रख बेचैन
दिलों दिमाग मगर चैन की गजलें गाएं
है दुआ कामयाबी तुमसे मिलने घर आये
पूरे घराने और माँ-बाप का हो नाम रोशन
तुम्हारे नाम की ही हर कोई कसमे खाएं
हो मसला इश्क का या कोई व्यपार वाला
तुम्हारे वास्ते मुश्किल सभी सुलझ जाएँ
अव्वल तो आंसू कोई तुम्हारे कभी ना आये
अगर वो आये तो खुशखबरी संग में लायें
चाहे तखल्लुस में अपना नाम रख बेचैन
दिलों दिमाग मगर चैन की गजलें गाएं
Monday, 26 December 2011
माफ़ कर देना मुझको मेरी बेबसी के लिए
आज के बाद नही रोऊंगा किसी के लिए
रखूंगा अश्को को बचाकर ख़ुशी के लिए
चाहे हालात कभी खुदखुशी के बन जाये
मुस्कुराता रहूँगा उसकी दोस्ती के लिए
अपने कमरे के शिवाले से बुत हटा दूंगा
उसकी तस्वीर को रखूंगा बन्दगी के लिए
खुदा हाफ़िज़ सलाम तुमको आखरी मेरा
अब ना आऊंगा लौटकर मैं आशिकी के लिए
तुझमे हिम्मत है गर सच में मुझे भुलाने की
मैं भी भूलूंगा तुमको सारी जिंदगी के लिए
बोल अ शमा खुदा तुम्हारा भला कैसे करे
तुमने अँधेरे को है तडफाया रौशनी के लिए
तुमको परेशान किया बेचैन मैं शर्मिंदा हूँ
माफ़ कर देना मुझको मेरी बेबसी के लिए
रखूंगा अश्को को बचाकर ख़ुशी के लिए
चाहे हालात कभी खुदखुशी के बन जाये
मुस्कुराता रहूँगा उसकी दोस्ती के लिए
अपने कमरे के शिवाले से बुत हटा दूंगा
उसकी तस्वीर को रखूंगा बन्दगी के लिए
खुदा हाफ़िज़ सलाम तुमको आखरी मेरा
अब ना आऊंगा लौटकर मैं आशिकी के लिए
तुझमे हिम्मत है गर सच में मुझे भुलाने की
मैं भी भूलूंगा तुमको सारी जिंदगी के लिए
बोल अ शमा खुदा तुम्हारा भला कैसे करे
तुमने अँधेरे को है तडफाया रौशनी के लिए
तुमको परेशान किया बेचैन मैं शर्मिंदा हूँ
माफ़ कर देना मुझको मेरी बेबसी के लिए
Sunday, 25 December 2011
बता तो क्यूं मुझको बेवकूफ बनाती रही
तेरी याद में रोते रोते सो गया था कल
इसलिए नींद में भी सुबकियां आती रही
उधर तू अपना शक समेटने में रहा उम्र भर
इधर बेबसी अपना रंग-रूप दिखाती रही
मेरे जज़्बात के संग खेलकर इत्मिनान से
बता तो क्यूं मुझको बेवकूफ बनाती रही
क्यूं नही बताती उसमे वो बेवफा तुम थी
वो कहानी जो तुम लोगों को सुनाती रही
गर बेचैन नही था मुझको लेकर तेरा दिल
किसलिए बार बार झूठी कसमे खाती रही
इसलिए नींद में भी सुबकियां आती रही
उधर तू अपना शक समेटने में रहा उम्र भर
इधर बेबसी अपना रंग-रूप दिखाती रही
मेरे जज़्बात के संग खेलकर इत्मिनान से
बता तो क्यूं मुझको बेवकूफ बनाती रही
क्यूं नही बताती उसमे वो बेवफा तुम थी
वो कहानी जो तुम लोगों को सुनाती रही
गर बेचैन नही था मुझको लेकर तेरा दिल
किसलिए बार बार झूठी कसमे खाती रही
Friday, 23 December 2011
कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
दीवानगी को पागलपन का करार देने वालों
बहुत पछताओगे जीत को हार देने वालों
कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
महबूब को महोब्बत में इंतजार देने वालों
तुम्हारे भी तो बन सकते है गोली का निशाना
इंसानियत के दुश्मनों को हथियार देने वालों
कभी आम आदमी के दर्द को भुगत कर देखो
मंचों से भीड़ को इंकलाबी विचार देने वालों
मन की ताकत बढती है सच बोलने से बेचैन
आजमाकर देखो झूठा करार देने वालों
बहुत पछताओगे जीत को हार देने वालों
कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
महबूब को महोब्बत में इंतजार देने वालों
तुम्हारे भी तो बन सकते है गोली का निशाना
इंसानियत के दुश्मनों को हथियार देने वालों
कभी आम आदमी के दर्द को भुगत कर देखो
मंचों से भीड़ को इंकलाबी विचार देने वालों
मन की ताकत बढती है सच बोलने से बेचैन
आजमाकर देखो झूठा करार देने वालों
पिछली मुलाकात की इक बात अधूरी है
पिछली मुलाकात की इक बात अधूरी है
वो बात ये थी तुम बिन हयात अधूरी है
सर अपनी गोद से मेरा मत उठाओ जान
अभी मेरी आँखों की बरसात अधूरी है
मैं भी देखूँगा रोज तुम भी देखना चाँद
कही भी रहे निगाहों की मुलाक़ात जरूरी है
वो मान जाये बेशक मेरी बात का बुरा
संग है महबूब तो वस्ल बिना रात अधूरी है
कितना बड़ा हो जाये किरदार तेरा बेचैन
सितमगर के बिना अब तो औकात अधूरी है
वो बात ये थी तुम बिन हयात अधूरी है
सर अपनी गोद से मेरा मत उठाओ जान
अभी मेरी आँखों की बरसात अधूरी है
मैं भी देखूँगा रोज तुम भी देखना चाँद
कही भी रहे निगाहों की मुलाक़ात जरूरी है
वो मान जाये बेशक मेरी बात का बुरा
संग है महबूब तो वस्ल बिना रात अधूरी है
कितना बड़ा हो जाये किरदार तेरा बेचैन
सितमगर के बिना अब तो औकात अधूरी है
Thursday, 22 December 2011
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर
कुछ भी नही पाओगे शायर से दिल लगाकर
देखना पछताओगे शायर से दिल लगाकर
जमाने की गिनती पहाड़े कम जानता है
तुम कैसे निभाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे रखेगा हर वक्त अहसास के जंगल में
बहुत डर जाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे हर गजल में लगेगा महबूब इक नया
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर
तेरी जुल्फों की तरह ख्याल भी उलझ जायेंगे
किसको सुलझाओगे शायर से दिल लगाकर
होना पड़ेगा आपको बेचैन हर बात पर
कितनी कसम खाओगे शायर से दिल लगाकर
देखना पछताओगे शायर से दिल लगाकर
जमाने की गिनती पहाड़े कम जानता है
तुम कैसे निभाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे रखेगा हर वक्त अहसास के जंगल में
बहुत डर जाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे हर गजल में लगेगा महबूब इक नया
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर
तेरी जुल्फों की तरह ख्याल भी उलझ जायेंगे
किसको सुलझाओगे शायर से दिल लगाकर
होना पड़ेगा आपको बेचैन हर बात पर
कितनी कसम खाओगे शायर से दिल लगाकर
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये
खुशखबरी के झोंके आपसे अक्सर मिलने आये
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये
हरेक ख्वाब हकीकत बनकर चले आपके संग
मेहनत के लम्हे देवें कामयाबी की दुआएं
घर में दोस्तों में और तमाम रिश्तेदारों में
आपके आसमान छूने की खूब चले चर्चाये
अव्वल तो कोई दर्द-ओ-गम ना मिले आपको
अगर मिलता है तो वो मेरी और सरक जाएँ
चेहरे की चमक बढ़े चांदनी सा बिखरे नाम
बेचैन मेरे महबूब के हक में चले हवाए
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये
हरेक ख्वाब हकीकत बनकर चले आपके संग
मेहनत के लम्हे देवें कामयाबी की दुआएं
घर में दोस्तों में और तमाम रिश्तेदारों में
आपके आसमान छूने की खूब चले चर्चाये
अव्वल तो कोई दर्द-ओ-गम ना मिले आपको
अगर मिलता है तो वो मेरी और सरक जाएँ
चेहरे की चमक बढ़े चांदनी सा बिखरे नाम
बेचैन मेरे महबूब के हक में चले हवाए
Tuesday, 20 December 2011
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो
मेरे भीतर के शैतान से यारी कर लो
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो
चेहरा बोल देगा मन की हर एक बात
आखिर कितनी ही तो हुश्यारी कर लो
जो नसीब में नही है कभी नही मिलेगा
तुम कितनी ही दोस्त मारामारी कर लो
नही घेरते है जब तक मुझे ऐब रिश्तेदारों
कितनी ही मेरे घर पर बमबारी कर लो
चंदा लेने आ रही है सियासत आपके द्वार
बचना है तो खुद को खदरधारी कर लो
मन में छिपा शख्स बाहर जरुर झांकेगा
तुम कितनी भी बेचैन कलाकारी कर लो
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो
चेहरा बोल देगा मन की हर एक बात
आखिर कितनी ही तो हुश्यारी कर लो
जो नसीब में नही है कभी नही मिलेगा
तुम कितनी ही दोस्त मारामारी कर लो
नही घेरते है जब तक मुझे ऐब रिश्तेदारों
कितनी ही मेरे घर पर बमबारी कर लो
चंदा लेने आ रही है सियासत आपके द्वार
बचना है तो खुद को खदरधारी कर लो
मन में छिपा शख्स बाहर जरुर झांकेगा
तुम कितनी भी बेचैन कलाकारी कर लो
Sunday, 18 December 2011
होती मेरी माँ तो आज मुझे खूब धमकाती
होती मेरी माँ तो आज मुझे खूब धमकाती
दर्दे इश्क में पड़कर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
खून के आंसू रुलायेगे तुझे तेरे ही असआर
शायरी में धंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
आसमां की और थूकोगे तो मुहं पर गिरेगा
दूसरो पर हंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
तेरी दीवानगी और पागलपन कौन सराहेगा
जिंदगी से बचकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
झटके में लगा दे होश ठिकाने जिंदगी के
टुकडो में बंटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
कयामत तक कोई नही याद रखेगा तुझको
जमाने से कटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
भूल जा बेचैन किसने क्या कहा था तुझको
बातों से लिपटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
दर्दे इश्क में पड़कर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
खून के आंसू रुलायेगे तुझे तेरे ही असआर
शायरी में धंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
आसमां की और थूकोगे तो मुहं पर गिरेगा
दूसरो पर हंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
तेरी दीवानगी और पागलपन कौन सराहेगा
जिंदगी से बचकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
झटके में लगा दे होश ठिकाने जिंदगी के
टुकडो में बंटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
कयामत तक कोई नही याद रखेगा तुझको
जमाने से कटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
भूल जा बेचैन किसने क्या कहा था तुझको
बातों से लिपटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया
मैं उससे कभी मिलने की कोशिश ना करूंगा
कमबख्त ज़ज्बात में मुझसे हामी भरा गया
पानी की जगह शराब में मिला रहा हूँ आंसू
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया
यही सोचकर कर लिया उसने मुझसे किनारा
कहाँ किस सरफिरे का उस पर दिल आ गया
जल्दी से आकर रख बेचैन हाथ मेरे दिल पर
आँखों के सामने यह कैसा अन्धेरा छा गया
उसकी चालाकी है या वक्त की नजाकत बेचैन
मुझसे बात बातों में ज़ालिम पीछा छुड़ा गया
कमबख्त ज़ज्बात में मुझसे हामी भरा गया
पानी की जगह शराब में मिला रहा हूँ आंसू
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया
यही सोचकर कर लिया उसने मुझसे किनारा
कहाँ किस सरफिरे का उस पर दिल आ गया
जल्दी से आकर रख बेचैन हाथ मेरे दिल पर
आँखों के सामने यह कैसा अन्धेरा छा गया
उसकी चालाकी है या वक्त की नजाकत बेचैन
मुझसे बात बातों में ज़ालिम पीछा छुड़ा गया
दिल का मसला तो मुझसे ही सुलझेगा
दिल का मसला तो मुझसे ही सुलझेगा
सत्संग में जाकर वक्त खराब ना कीजे
नसीब में लिखा है तो हो जायेगा मिलन
बैठ के बेकार जुदाई का हिसाब ना कीजे
सोचने से पहले लोग फसाना बना देंगे
मुझको देख कर आँखें पुर आब ना कीजे
आबरू और समाज पर पड़ जाए महंगी
कभी भी ऐसी हरकत मेरे जनाब ना कीजे
सब घड़ी भर की बेकरारी होती है बेचैन
आप अपने आपको इतना बेताब ना कीजे
सत्संग में जाकर वक्त खराब ना कीजे
नसीब में लिखा है तो हो जायेगा मिलन
बैठ के बेकार जुदाई का हिसाब ना कीजे
सोचने से पहले लोग फसाना बना देंगे
मुझको देख कर आँखें पुर आब ना कीजे
आबरू और समाज पर पड़ जाए महंगी
कभी भी ऐसी हरकत मेरे जनाब ना कीजे
सब घड़ी भर की बेकरारी होती है बेचैन
आप अपने आपको इतना बेताब ना कीजे
Saturday, 17 December 2011
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है
जोशे जवानी में ना तुम आओ ना हम आये
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है
कमीनी है दुनिया साथ साथ रहने नही देगी
चलो मन ही मन आपस में इजहार करते है
हम बिस्तर पकड़ लेंगे तो ख्याल खूब घेरेंगे
आज से थोडा थोडा खुद को बीमार करते है
इश्क में उन्ही के हिस्से में आती है शर्मिंदगी
जो खुद को हद से ज्यादा होशियार करते है
उनको हर हाल में होता है उनको घाटा बेचैन
अक्सर दिल लेने देने का जो व्यपार करते है
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है
कमीनी है दुनिया साथ साथ रहने नही देगी
चलो मन ही मन आपस में इजहार करते है
हम बिस्तर पकड़ लेंगे तो ख्याल खूब घेरेंगे
आज से थोडा थोडा खुद को बीमार करते है
इश्क में उन्ही के हिस्से में आती है शर्मिंदगी
जो खुद को हद से ज्यादा होशियार करते है
उनको हर हाल में होता है उनको घाटा बेचैन
अक्सर दिल लेने देने का जो व्यपार करते है
अपनी माँ को भी इतना ही चाहता था
अपनी माँ को भी इतना ही चाहता था
मैं जितना आज तुझसे प्यार करता हूँ
इससे पहले की लोग मुझे कहे दीवाना
मैं खुद सरे महफ़िल इकरार करता हूँ
तुम्ही कहो किसकी कसम खाकर कहू
मैं जन्मों से तुम्हारा इंतजार करता हूँ
डूब सा जाता हूँ आखों की गहराइयों में
तेरी तस्वीर का मैं जब दीदार करता हूँ
इसीलिए तो जीतूँगा दिल की बाज़ी बेचैन
खुद से जियादा तुम पर एतबार करता हूँ
मैं जितना आज तुझसे प्यार करता हूँ
इससे पहले की लोग मुझे कहे दीवाना
मैं खुद सरे महफ़िल इकरार करता हूँ
तुम्ही कहो किसकी कसम खाकर कहू
मैं जन्मों से तुम्हारा इंतजार करता हूँ
डूब सा जाता हूँ आखों की गहराइयों में
तेरी तस्वीर का मैं जब दीदार करता हूँ
इसीलिए तो जीतूँगा दिल की बाज़ी बेचैन
खुद से जियादा तुम पर एतबार करता हूँ
Friday, 16 December 2011
देखा जब से तुझे हंसते शमा सा पिंघलता हूँ
तेरी तस्वीर तकता हूँ और करवट बदलता हूँ
देखा जब से तुझे हंसते शमा सा पिंघलता हूँ
इससे और ज्यादा क्या कहू दीवानगी अपनी
तुम्हारा नाम ले लेकर मैं नींद में चलता हूँ
याद आती है जब तुमको न पाने की मजबूरी
कभी रोता हूँ सिसकी ले,कभी हाथ मलता हूँ
शहर में लौटने की तुमने जबसे बात बताई है
कैसी होगी मुलाक़ात सोचकर मैं मचलता हूँ
सदा यूं खाद पानी देते रहना प्यार की मुझको
तेरे दिल में भी मैं अगर पौधे सा पलता हूँ
बात कर लेते हो जिस दिन अपने बेचैन से तुम
मैं उस दिन बच्चों की तरह सारा दिन उछलता हूँ
देखा जब से तुझे हंसते शमा सा पिंघलता हूँ
इससे और ज्यादा क्या कहू दीवानगी अपनी
तुम्हारा नाम ले लेकर मैं नींद में चलता हूँ
याद आती है जब तुमको न पाने की मजबूरी
कभी रोता हूँ सिसकी ले,कभी हाथ मलता हूँ
शहर में लौटने की तुमने जबसे बात बताई है
कैसी होगी मुलाक़ात सोचकर मैं मचलता हूँ
सदा यूं खाद पानी देते रहना प्यार की मुझको
तेरे दिल में भी मैं अगर पौधे सा पलता हूँ
बात कर लेते हो जिस दिन अपने बेचैन से तुम
मैं उस दिन बच्चों की तरह सारा दिन उछलता हूँ
इसीलिए शायद साफ़ दिल कहते है उसे
वो जवाब के साथ सवालात छोड़ देता हैं
सोचते ही रहो ऐसे ज़ज्बात छोड़ देता हैं
जाने कहाँ से लाया है महोब्बत की अदा
बिगाड़कर दिल के हालात छोड़ देता हैं
उसके सिवा तो खुदा ही जानता है उसे
काम की अधूरी हर बात छोड़ देता हैं
इसीलिए शायद साफ़ दिल कहते है उसे
कडवे विचारों को हाथों हाथ छोड़ देता हैं
सांप से भी खतरनाक है वो शख्स बेचैन
जो केचुली की तरह औकात छोड़ देता है
सोचते ही रहो ऐसे ज़ज्बात छोड़ देता हैं
जाने कहाँ से लाया है महोब्बत की अदा
बिगाड़कर दिल के हालात छोड़ देता हैं
उसके सिवा तो खुदा ही जानता है उसे
काम की अधूरी हर बात छोड़ देता हैं
इसीलिए शायद साफ़ दिल कहते है उसे
कडवे विचारों को हाथों हाथ छोड़ देता हैं
सांप से भी खतरनाक है वो शख्स बेचैन
जो केचुली की तरह औकात छोड़ देता है
Thursday, 15 December 2011
मुझसे मेरी जान यूं भागा मत कर
मुझसे मेरी जान यूं भागा मत कर
तेरे हक में उठती हुई दुआ हूँ मैं
टकटकी लगाकर देख तस्वीर मेरी
फिर बताइयेगा की कैसा हूँ मैं
अब जीते जी कैसे छुड़ाओगे पीछा
लहू बनकर तेरी रगों में रवां हूँ
ख़ुशी में बेशक मुझे याद ना कर
मगर गम की तेरे लिए दवा हूँ मैं
बेचैनी और शकुन दोनों मिलेंगे
आंसू का एक ऐसा कतरा हूँ मैं
बेवजह बेचैन मुझपर शक ना कर
रो पडूंगा बहुत ज्यादा दिलजला हूँ
तेरे हक में उठती हुई दुआ हूँ मैं
टकटकी लगाकर देख तस्वीर मेरी
फिर बताइयेगा की कैसा हूँ मैं
अब जीते जी कैसे छुड़ाओगे पीछा
लहू बनकर तेरी रगों में रवां हूँ
ख़ुशी में बेशक मुझे याद ना कर
मगर गम की तेरे लिए दवा हूँ मैं
बेचैनी और शकुन दोनों मिलेंगे
आंसू का एक ऐसा कतरा हूँ मैं
बेवजह बेचैन मुझपर शक ना कर
रो पडूंगा बहुत ज्यादा दिलजला हूँ
Wednesday, 14 December 2011
हर शख्स मुझको अब दीवाना कहता है
वो हवा बन करके सांसो में यूं बहता है
खुशबू का झोंका जैसे गुलों में रहता है
मेरी हरकतों में जाने ऐसा क्या हो गया
हर शख्स मुझको अब दीवाना कहता है
रखी गई हो जिस पर झूठ की बुनियाद
महोब्बत में वो किला बनते ही ढहता है
अबतक इसीलिए शायद धडक रहा है दिल
वो लहू बनकर रगों में हर वक्त बहता हैं
अपनापन तो उससे हो गया है बेचैन
बेगानों के नखरो को भला कौन सहता है
खुशबू का झोंका जैसे गुलों में रहता है
मेरी हरकतों में जाने ऐसा क्या हो गया
हर शख्स मुझको अब दीवाना कहता है
रखी गई हो जिस पर झूठ की बुनियाद
महोब्बत में वो किला बनते ही ढहता है
अबतक इसीलिए शायद धडक रहा है दिल
वो लहू बनकर रगों में हर वक्त बहता हैं
अपनापन तो उससे हो गया है बेचैन
बेगानों के नखरो को भला कौन सहता है
Tuesday, 13 December 2011
ज़ज्बात का खरगोश निशाना था उसका
उम्र भर के साथ को तो गोली मारो
वो हमसे दो दिन में ही खफा हो गये
मुद्दत से भर रहा था जिनमे में रंग
झटके में ख्वाब सारे सफा हो गये
ज़ज्बात का खरगोश निशाना था उसका
कमबख्त करके शिकार दफा हो गये
यह खूब रही इश्क ने राख कर डाला
जलाकर मुझे कमबख्त धुंआ हो गये
गम का जश्न मना बोतल खोल ले बेचैन
सब वादे महोब्बत के जफा होग गये
वो हमसे दो दिन में ही खफा हो गये
मुद्दत से भर रहा था जिनमे में रंग
झटके में ख्वाब सारे सफा हो गये
ज़ज्बात का खरगोश निशाना था उसका
कमबख्त करके शिकार दफा हो गये
यह खूब रही इश्क ने राख कर डाला
जलाकर मुझे कमबख्त धुंआ हो गये
गम का जश्न मना बोतल खोल ले बेचैन
सब वादे महोब्बत के जफा होग गये
तुमको पाया तो लगा इंतज़ार अच्छा था
इकरार से सौ गुना इनकार अच्छा था
तुमको पाया तो लगा इंतज़ार अच्छा था
तारे गिनने का क्या काम सौंपा तुने इश्क
आशिक बनने से पहले बेकार अच्छा था
छोड़ दिया उसने मेरा हाल चाल पूछना
ठीक होने से तो मैं बीमार अच्छा था
अब बेचैन रहता हूँ जबसे जवानी आई है
पहले यारों बचपन वाला करार अच्छा था
दोस्ती के नाते सही हंसकर तो बोलते थे
इस बेरुखी से तो उसका प्यार अच्छा था
तुमको पाया तो लगा इंतज़ार अच्छा था
तारे गिनने का क्या काम सौंपा तुने इश्क
आशिक बनने से पहले बेकार अच्छा था
छोड़ दिया उसने मेरा हाल चाल पूछना
ठीक होने से तो मैं बीमार अच्छा था
अब बेचैन रहता हूँ जबसे जवानी आई है
पहले यारों बचपन वाला करार अच्छा था
दोस्ती के नाते सही हंसकर तो बोलते थे
इस बेरुखी से तो उसका प्यार अच्छा था
Monday, 12 December 2011
उसने छोड़ने की धमकी दी है
उसने छोड़ने की धमकी दी है
दिल को तोड़ने की धमकी दी है
मेरी रातें तन्हाइयों के साथ
फिर से जोड़ने की धमकी दी है
कशमकश में हूँ क्या करूं उसने
गुमनामी ओढने की धमकी दी है
वो जनता है मैं चल नही सकता
उसने दौड़ने की धमकी दी है
करके बहाना जमाने का बेचैन
दिल को मोड़ने की धमकी दी है
दिल को तोड़ने की धमकी दी है
मेरी रातें तन्हाइयों के साथ
फिर से जोड़ने की धमकी दी है
कशमकश में हूँ क्या करूं उसने
गुमनामी ओढने की धमकी दी है
वो जनता है मैं चल नही सकता
उसने दौड़ने की धमकी दी है
करके बहाना जमाने का बेचैन
दिल को मोड़ने की धमकी दी है
होश वालों से पूछो उन्हें कब शर्म आती है
शौक नही है पीने का मजबूरी पिलाती है
मूड़ बनता है तब जब उसकी याद आती है
दर्दे-दिल बर्दाश्त करना सबके बस का नही
इसे वो समझेगा लोहे की जिसकी छाती है
दगा देता है जब यार प्यार और रिश्तेदार
दवा के भेष में शराब ही साथ निभाती है
उस दिन तो दोस्तों हर हाल में जाम लगाता हूँ
जब लड़ाई के अंदेशे से बाई आँख फडफडाती है
खूब लिहाज़ बरतता हूँ पीने के बाद बेचैन
होश वालों से पूछो उन्हें कब शर्म आती है
मूड़ बनता है तब जब उसकी याद आती है
दर्दे-दिल बर्दाश्त करना सबके बस का नही
इसे वो समझेगा लोहे की जिसकी छाती है
दगा देता है जब यार प्यार और रिश्तेदार
दवा के भेष में शराब ही साथ निभाती है
उस दिन तो दोस्तों हर हाल में जाम लगाता हूँ
जब लड़ाई के अंदेशे से बाई आँख फडफडाती है
खूब लिहाज़ बरतता हूँ पीने के बाद बेचैन
होश वालों से पूछो उन्हें कब शर्म आती है
अच्छे अच्छे तन्हाई के हवाले किए है
इश्क तूने खूब गडबड घोटाले किए है
अच्छे अच्छे तन्हाई के हवाले किए है
कर दिया साबित पल में दिल को बच्चा
प्यार ने पैदा ऐसे ऐसे दिलवाले किए है
जां छिडकने को मजबूर हुवे है परवाने
शमा ने जब भी दोस्तों उजाले किए है
सरे बज्म की है जिसने चुगली किसी की
उसकी जुबान पर वक्त ने छाले किए है
बढ़ी है जिन धडकनों की रफ्तार बेचैन
उस दिल ने काम सबसे ही निराले किए है
अच्छे अच्छे तन्हाई के हवाले किए है
कर दिया साबित पल में दिल को बच्चा
प्यार ने पैदा ऐसे ऐसे दिलवाले किए है
जां छिडकने को मजबूर हुवे है परवाने
शमा ने जब भी दोस्तों उजाले किए है
सरे बज्म की है जिसने चुगली किसी की
उसकी जुबान पर वक्त ने छाले किए है
बढ़ी है जिन धडकनों की रफ्तार बेचैन
उस दिल ने काम सबसे ही निराले किए है
Sunday, 11 December 2011
अहसास के पलों की हिफाजत करेंगे हम
जिंदगी भर आपकी इबादत करेंगे हम
अहसास के पलों की हिफाजत करेंगे हम
हरगिज़ ना आंसू आने देंगे आपको कभी
आयेंगे तो पीने की आदत करेंगे हम
होगा वजूद दुनिया में बेशक खुदाओं का
तुम मिल गये हो सबकी खिलाफत करेंगे हम
जीते जी आम होगा ना रिश्ता रूहानियत
लोगों से जिक्र करके क्यूं आफत करेंगे हम
कभी आजमाके देखना अपने बेचैन को
चाहोगे जितना उतनी महोब्बत करेंगे हम
अहसास के पलों की हिफाजत करेंगे हम
हरगिज़ ना आंसू आने देंगे आपको कभी
आयेंगे तो पीने की आदत करेंगे हम
होगा वजूद दुनिया में बेशक खुदाओं का
तुम मिल गये हो सबकी खिलाफत करेंगे हम
जीते जी आम होगा ना रिश्ता रूहानियत
लोगों से जिक्र करके क्यूं आफत करेंगे हम
कभी आजमाके देखना अपने बेचैन को
चाहोगे जितना उतनी महोब्बत करेंगे हम
नही समझ पाया हूँ कमबख्त को मैं
वो बारहा जिक्र जमाने का उठाते है
क्या हमको लोग समझ नही आते है
खुदा जाने वो कैसा दिमाग रखते है
जहाँ से शुरू होते है वही आ जाते है
कहते है वो मेरी खुशियों में खुश है
मगर मिलते ही मौक़ा खूब सताते है
करते है जब वो घुमा फिराकर बात
अपने तो दोस्तों तोते उड़ जाते है
नही समझ पाया हूँ कमबख्त को मैं
अक्सर बेचैन करके प्यार जताते है
क्या हमको लोग समझ नही आते है
खुदा जाने वो कैसा दिमाग रखते है
जहाँ से शुरू होते है वही आ जाते है
कहते है वो मेरी खुशियों में खुश है
मगर मिलते ही मौक़ा खूब सताते है
करते है जब वो घुमा फिराकर बात
अपने तो दोस्तों तोते उड़ जाते है
नही समझ पाया हूँ कमबख्त को मैं
अक्सर बेचैन करके प्यार जताते है
इश्क दरिया-ए-अंगार है सम्भल कर मेरी जान
ये अहसास का व्यपार है सम्भल कर मेरी जान
इश्क दरिया-ए-अंगार है सम्भल कर मेरी जान
हम मर्दों का क्या है हम तो होते है अफलातून
औरतों पर शक हजार है सम्भल कर मेरी जान
अच्छा ही होगा अपनी-अपनी हदें बाँट ले हम
दोनों के पीछे परिवार है सम्भल कर मेरी जान
तुम बेशक कर लो दिल की सौदेबाजी मुझसे
अगर खुद पर एतबार है, सम्भल कर मेरी जान
नही होता जिनके दिल पर दिमाग की पहरेदारी
बेचैन वो लोग शर्मसार है सम्भलकर मेरी जान
इश्क दरिया-ए-अंगार है सम्भल कर मेरी जान
हम मर्दों का क्या है हम तो होते है अफलातून
औरतों पर शक हजार है सम्भल कर मेरी जान
अच्छा ही होगा अपनी-अपनी हदें बाँट ले हम
दोनों के पीछे परिवार है सम्भल कर मेरी जान
तुम बेशक कर लो दिल की सौदेबाजी मुझसे
अगर खुद पर एतबार है, सम्भल कर मेरी जान
नही होता जिनके दिल पर दिमाग की पहरेदारी
बेचैन वो लोग शर्मसार है सम्भलकर मेरी जान
Saturday, 10 December 2011
मेरी बुढ़ी भी पठा कहती है
"आज तुमको गुलाब देता है "
इक महकता ख्वाब देता हूँ
लो देख लो अपना चेहरा
मैं आँखे पुर आब देता हूँ
मुझे हिज्र कहते वस्ल धारी
जब हालत इज़्तिराब देता हूँ
हंसी है जब मुझे देख तन्हाई
बदले में उसको शराब देता हूँ
ना बुरा मानिएगा आदत का
मैं तो यूं ही जवाब देता हूँ
मेरी बुढ़ी भी पठा कहती है
जब बालों में हिजाब देता हूँ
बेचैन समझ माफ़ कर देना
गर मैं गजले खराब देता हूँ
वो भी शादीशुदा निकली मेरे भी दो साले है
खुदा जाने क्या होगा बड़े गडबड घोटाले है
वो भी शादीशुदा निकली मेरे भी दो साले है
उम्र के इस दोराहे पर ख़ाक इकरार कर ले हम
ज़िम्मेदारी के दोनों ने गले में पट्टे डाले है
गिरे है सर के बल यारों अब तक तो वो लोग
बुढ़ापे में आशिकी के जिसने भी पर निकाले है
ज़ुल्फ़ को रंग देने से रंगने से कभी उम्र नही घटती
अलग महफ़िल में दीखते है जिनके बाल काले है
बुरा मत मानना मेरे महबूब मेरे दोस्त
आज हम जैसो के कारण दोस्ती में उजाले है
कही भी दिल लगा लूं मैं झट से टांग अदा देंगे
एक बीवी और दो बच्चे मेरे ऐसे घरवाले है
उन्हें बेचैन मत करना जो मुझको चाहते है मौला
बड़ी मुश्किल से यारों ने एक दो यार सम्भाले है
वो भी शादीशुदा निकली मेरे भी दो साले है
उम्र के इस दोराहे पर ख़ाक इकरार कर ले हम
ज़िम्मेदारी के दोनों ने गले में पट्टे डाले है
गिरे है सर के बल यारों अब तक तो वो लोग
बुढ़ापे में आशिकी के जिसने भी पर निकाले है
ज़ुल्फ़ को रंग देने से रंगने से कभी उम्र नही घटती
अलग महफ़िल में दीखते है जिनके बाल काले है
बुरा मत मानना मेरे महबूब मेरे दोस्त
आज हम जैसो के कारण दोस्ती में उजाले है
कही भी दिल लगा लूं मैं झट से टांग अदा देंगे
एक बीवी और दो बच्चे मेरे ऐसे घरवाले है
उन्हें बेचैन मत करना जो मुझको चाहते है मौला
बड़ी मुश्किल से यारों ने एक दो यार सम्भाले है
Friday, 9 December 2011
सबके टकराते है बरतन ना झूठ बोलिए
चेहरा है मन का दरपन ना झूठ बोलिए
तेज़ हो जाएगी धडकन ना झूठ बोलिए
मियाँ-बीवी की तकरार पे शर्मिंदगी कैसी
सबके टकराते है बरतन ना झूठ बोलिए
मुमकिन नही जो बात उसका वादा ना करो
कर दोगे सब कुछ अरपन ना झूठ बोलिए
जब देखते है आप मुझे मुस्कुराकर हुजुर
बढती है दिल की तडफन ना झूठ बोलिए
बेचैन जमाने में पूछ लीजिये किसी से भी
याद आता है सबको बचपन ना झूठ बोलिए
तेज़ हो जाएगी धडकन ना झूठ बोलिए
मियाँ-बीवी की तकरार पे शर्मिंदगी कैसी
सबके टकराते है बरतन ना झूठ बोलिए
मुमकिन नही जो बात उसका वादा ना करो
कर दोगे सब कुछ अरपन ना झूठ बोलिए
जब देखते है आप मुझे मुस्कुराकर हुजुर
बढती है दिल की तडफन ना झूठ बोलिए
बेचैन जमाने में पूछ लीजिये किसी से भी
याद आता है सबको बचपन ना झूठ बोलिए
अहसास की औकात हो पर रूबरू नही
चाहता हूँ मुलाकात हो पर रूबरू नही
रोजाना उनसे बात हो पर रूबरू नही
इक दूजे को समझाने और कुछ बताने में
चाहे जख्मी ख्यालात हो पर रूबरू नही
बनकर भ्रम उनकी मैं रूह से चिपक जाऊ
इक ऐसी करामात हो पर रूबरू नही
हम जिम्मेदारियों को भी हरगिज़ दगा ना दे
अहसास की औकात हो पर रूबरू नही
वो प्यार करे जिस भी पल अपने आप से
मेरे हिस्से भी खैरात हो पर रूबरू नही
होकर बेचैन मुझको महसूस वो करें
uske दिल पे मेरे हाथ हो पर रूबरू नही
रोजाना उनसे बात हो पर रूबरू नही
इक दूजे को समझाने और कुछ बताने में
चाहे जख्मी ख्यालात हो पर रूबरू नही
बनकर भ्रम उनकी मैं रूह से चिपक जाऊ
इक ऐसी करामात हो पर रूबरू नही
हम जिम्मेदारियों को भी हरगिज़ दगा ना दे
अहसास की औकात हो पर रूबरू नही
वो प्यार करे जिस भी पल अपने आप से
मेरे हिस्से भी खैरात हो पर रूबरू नही
होकर बेचैन मुझको महसूस वो करें
uske दिल पे मेरे हाथ हो पर रूबरू नही
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