Friends

Sunday, 11 March 2012

निकल जाएगी बच्चे की जान बेटा

निकल जाएगी बच्चे की जान बेटा
मत ले मेरे और इंतिहान बेटा

रूबरू नही ख्वाब में ही मिला कर
तू मेरा कोई तो कहा मान बेटा

देख कही हाथ में ही ना आ जाये
मेरे मत खींच इतने कान बेटा

देकर दर्दे दिल जोर से हंसता है
मत बनो इतना भी शैतान बेटा

बता मैं तुझे छोड़कर कहाँ जाऊंगा
तू है मेरा धरती आसमान बेटा

तुम पर लिख दी गजल बेचैन होकर
बता अब कोई अच्छा सा उन्वान बेटा

Saturday, 10 March 2012

गर तेरी आँख का इशारा हो जाए

गर तेरी आँख का इशारा हो जाए
इस गरीब का भी गुज़ारा हो जाए

ना करूं जिस पल तेरा शुक्रिया जिंदगी
मेरा सांसों से ही किनारा हो जाए

आजमाकर तो देख यह जादू भी होगा
बस सोचते ही कोई तुम्हारा हो जाए

नदियाँ गर अपनी जिद पर उतर आयें
क्या मजाल समन्दर खारा हो जाये

वो चाहेगा तो हो सकता है बेचैन
तू भी उसे सबसे प्यारा हो जाए

Thursday, 8 March 2012

अबके होली पर वो इक काम कर लीजिये

यारों के जो यार है इश्क के बीमार है
अबके होली पर वो इक काम कर लीजिये

पास है महबूब जिनके प्यार से वो चूमे माथा
दूर है तो फोन पर सलाम कर लीजिये

बीवी प्यार देगी नई बनके दुल्हनिया
उसके लिए एटीम नीलाम कर लीजिये

कभी कभी पीने का शौक जिस साहब को
उसे फाग वाले दिन खुलेआम कर लीजिये

तुम रहोगे बेचैन कोई चर्चा तक ना होगी
खुद को थोड़ा थोडा बदनाम कर लीजिये

बता तो क्या बोलू तुझे मैं आज जिंदगी

तलाश रहा हूँ सुबह से अल्फाज़ जिंदगी
बता तो क्या बोलू तुझे मैं आज जिंदगी

तेरी कसम बहुत रोता फाग के दिन मैं
बात नही करती गर तू आज जिंदगी

मुझे किस्मत बेशक शहनशा ना बनाये
मगर तुझे बोलता हूँ मुमताज़ ज़िदगी

हाँ पहले भी साँस के साथ बोला है
लव यूं फिर से बोलता हूँ आज जिंदगी

जो तुझे सुहाएगा वो गीत गाऊंगा
तू बजा कर देख कोई भी साज जिंदगी

तेरे रुठते ही बेचैन हो जाता हूँ
मुझपे गिरती है जोर से गाज जिंदगी

Friday, 2 March 2012

तू जियादा दिन तडफायेगा मुझे विश्वास नही होता

तू मेरे बिना रह पायेगा मुझे विश्वास नही होता
कभी लौटकर नही आएगा मुझे विश्वास नही होता

पहला वादा तुम्हारा ही था सदा साथ रहने का
तू वादे से डगमगाएगा मुझे विश्वास नही होता

बात बात पर खुश रहने की सलाह देने वाले
तू जियादा दिन तडफायेगा मुझे विश्वास नही होता

मैं बच्चे की तरह रो रहा हूँ तुम्हारी जिद करके
तू आकर नही समझाएगा मुझे विश्वास नही होता

खुदा से भी बढ़कर जिसे मैंने चाहा है बेचैन
मेरा विश्वास तोड़ जाएगा मुझे विश्वास नही होता


बता क्यूं मेरा प्यार तुझे बेदम नजर आया

समन्दर और आसमान भी कम नजर आया
बता क्यूं मेरा प्यार तुझे बेदम नजर आया

क्या ख़ाक करू सोचा विचारी लेकर तुझको
तेरी हर बात में मुझको भरम नजर आया

मैं तो आशिक था दीवानगी कैसे छोड़ता
वही किया जो मुझे मेरा करम नजर आया

जिस सलीके से ले गया मुझे मौत के करीब
बुरा मत मानना तू मानव बम नजर आया

यही जान पाया तुझसे प्यार करके बेचैन
जुल्फों के साथ सोच मे भी खम नजर आया

Thursday, 1 March 2012

जब पंजाबी की एक महान लेखिका की कविता को पढ़ा तो मेरे भीतर का दर्द भी यूं बोल उठा,,,,,

,,,

मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,,
मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा
शायद तेरे स्वभाव की चिढ बनके,,
तेरे सामने आऊंगा,,
या एक अनजाना सा रहस्मय सूनापन बनके
हर वक्त तेरे साथ रहूँगा और तुझे तकता रहूँगा,,
तुझे लगेगा भी की मैं हूँ मगर दिखाई नही दूंगा,,,,,
मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,
,मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा.................
या सूरज की रौशनी बनके ,,
चाँद की चांदनी बनके तेरे आंगन में उतरूंगा
मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,
,मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा.................
या तेरा बेटा बनके तेरे कलेजे की ठंडक के रूप में
जब जब अपने बेटे को प्यार करोगी
उसकी खिलखिलाहट और रोने में अपना अक्स लेकर
मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,
,मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा.................
मैं और कुछ नही जानता
मगर इतना जानता हूँ वक्त जो भी करेगा
मेरा ये जन्म तुम्हारे साथ चलेगा,,,,,
मेरा जिस्म खत्म होता है तो सौ बार हो जाए,,,
मगर अहसास की गर्मी बनकर सदा तुम्हारी आहों में बसूँगा,,
जब भी तन्हा बैठोगी अश्क बनकर
 तुम्हारी आंख में झाँकने लगूंगा,,
जब भी हंसोगी,,,,मेरी बेबसी तुम्हारे सामने आ जायेगी,,,
मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,
,मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा.................
मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,
,मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा.................
मैं तुझे  फिर मिलूंगा ,कहाँ किस तरह मालूम नही,,
,मगर मैं तुझे फिर मिलूंगा.................



अब तो यादों के ही सहारे जीवन गुजारना है

मन की बातों को मन के भीतर ही मारना है
अब तो यादों के ही सहारे जीवन गुजारना है

तू लौटकर आये ना आये सब तुम्हारी मर्जी
मुझे तो हर हाल में तुम्हारा नाम पुकारना है

जुबा पर खरा उतरूंगा मौका लगने दे
जान देकर ही सही तुम्हारा कर्ज़ उतारना है

तुम रोज खूबसुरती पर बेशक देना तवज्जो
जुदाई में मुझको तो अपना दर्द निखारना है

तू मिल जाता तो कौन सी मौत जीत लेता
जिंदगी से तो बेचैन हर हाल में हारना है

बोल किस रोज लोगों से मिलाया तुझको

धडकनों में सांसों में बसाया तुझको
बोल किस रोज लोगों से मिलाया तुझको

मेरी रग रग में लहू बनके तू बहता है
सच बता पसीने सा कब बहाया तुझको

बस जमाने ने उसे आंसुओ का नाम दिया
जब जुगनू सा पलकों पर सजाया तुझको

दिल में बीवी का दखल जब बढने लगा
मैंने दाढ़ी के बियाबा में छिपाया तुझको

जब भी बेचैन गया शिवालों में कही
हाय अल्लाह की सुरत में पाया तुझको

पुस्तैनी जमीन सी तू निकल आई हिस्से में

पुस्तैनी जमीन सी तू निकल आई हिस्से में
बता नसीब पर नही इतराऊं तो क्या करूं

सम्भाले नही जाती तेरे पाने की ख़ुशी
मैं पागलों सा नही चिल्लाऊ तो क्या करूं

बांधा अल्फाज़ में तो कद अहसान का छोटा होगा
जाकर मन्दिर में न आंसू बहाऊँ  तो क्या करूं

तेरी जुल्फों के साए में गुजरेगी जिंदगी
सोच कर ख्याली पुलाव न पकाऊँ तो क्या करूं

तू कर गया है वादा ख्वाबों में मिलने का
खर्राटे दिन में बेचैन न लगाऊँ तो क्या करूं

चश्मे के तले आज से तेरा घर बना दिया

अब देखता हूँ लोगों की नजर कैसे पड़ेगी
चश्मे के तले आज से तेरा घर बना दिया

मुझको तो होश नही तू ही बता सच क्या है
कहते है लोग तुने मेरा बन्दर बना दिया

दिल और चेहरे से तुझे देकर विदा महबूब
तेरा पक्का ठिकाना रूह के अंदर बना दिया

तेरी हंसी सुनकर दिल में बैठा बच्चा बोल पड़ा
शुक्रिया तुमको मुझको मस्त कलंदर बना दिया

नदी तो शुरुआत से ही मीठी थी बेचैन
शक ने ही प्यार को खारा समन्दर बना दिया
मैं ही जानता हूँ जो तुझमे मिठास है
चाकलेट तो तेरे आगे बकवास है

मैं इससे बढ़कर तारीफ क्या करूं
तेरा प्यार ही मेरा आत्म विश्वास है

तुम अगर हंसकर लिपट जाओ इक दफा
समझूंगा मेरी बाँहों में आकाश है

कई बार बोला है आज फिर बोलता हूँ
तू मेरे जन्मों जन्मों की तलाश है

रति भर भी झूठ हो तो मर जाऊं बेचैन
बता तुझसे बढ़कर मेरा कौन ख़ास है

ना महोब्बत में तू इतनी हुश्यारी शुरू कर


हर हाल के बाद जीत की तैयारी शुरू कर
ज़हन में कामयाबी की मारामारी शुरू कर

रोटियां वो भी खाता है मत भूलना कभी
ना महोब्बत में तू इतनी हुश्यारी शुरू कर

हाथ पर हाथ रखकर बैठने से क्या मिलेगा
कमी ढूंढ़कर अपनी दूसरी पारी शुरू कर

उसने कह तो दिया मैं तुम्हारे साथ हूँ सदा
बंद अब फालतू की सोचा विचारी शुरू कर

मजदूर का बेटा आज बन गया है अफसर
तुझको काम है तो बहाल रिश्तेदारी शुरू कर

औकात नापनी है तो मेरे ज़ज्बात की नाप
लिबास देखकर ना कोई कलाकारी शुरू कर

उठ गया है माँ बाप का साया अब बेचैन
बचपना छोड़ आज से समझदारी शुरू कर

मेरा नाम लेके चिल्लाओगे तो लौट आऊंगा

मुझको तुम खुद लेने आओगे तो लौट आऊंगा
मेरा नाम लेके चिल्लाओगे  तो लौट आऊंगा

बंद है आज से प्यार की तमाम सौदेबाजी
पुराना उधार चुकाओगे  तो लौट आऊंगा

नही चाहिए मुझको तुम्हारी झूठी हमदर्दी
हंस हंसकर सितम ढहाओगे तो लौट आऊंगा 

नही जानना लोगों की राय  मेरे बारे में
]दास्ताने तडफ सुनाओगे  तो लौट आऊंगा

भरोसा तो तुम पर इतना करता है बेचैन
कसमे झूठी भी खाओगे  तो लौट आऊंगा

लौट कर जिंदगानी में आने का शुक्रिया


मखमली अहसास लौटाने का शुक्रिया
लौट कर जिंदगानी में आने का शुक्रिया

भटक सा गया था ख्यालात के जंगल में
हाथ पकड़कर राह दिखाने का शुक्रिया

मैं दोजख में पड़ा कब से रो रहा था
लेकर मुझे जन्नत में जाने का शुक्रिया

इस बहाने दर्दे इश्क का पता चल गया
मुझ पर हंसकर सितम ढाने का शुक्रिया

अब तक नाम से था तुने रूह से कर दिया
मुझे सच में बेचैन बनाने का शुक्रिया

वजूद को गिरवी रखकर पाया है तुझे

वजूद को गिरवी रखकर पाया है तुझे
इसीलिए राजदार बनाया है तुझे         

मैं बिछड़ते ही तुमसे दम तोड़ दूंगा
कितनी ही दफा तो समझाया है तुझे

अंजाम-ए-इश्क खूब सोचने के बाद
धडकन-ओ- सांसों में बसाया है तुझे

कहकर तो देख सब बदल डालूँगा मैं
कौन सा अंदाज़ ना पसंद आया है तुझे

तेरे ही सकूं की दुआओं के असर ने
यकीनन बेचैन से मिलवाया है तुझे

गर वो सामने आ गया क्या हाथ पकड़कर चल दोगे

बिन वजूद के ख्वाबों को आँखों से कब तक जल दोगे
गर वो सामने आ गया क्या हाथ पकड़कर चल दोगे

तुम सदा मुस्कुराते रहे हो औरों की ख़ुशी के लिए
कहो किस रोज जिंदगी मे खुद को प्यार के पल दोगे

तन्हाइयों की नागिन तुमको कभी नही डस पायेगी
तड़फ के उस मौके पर गर खुद को मेरी गजल दोगे

यह सोचकर तुम पर अपना आज लुटाया है बेचैन
देर सवेर महोब्बत का तुम जरुर मुझको फल दोगे

तुम भी तो रखों मुझे गले का ताबीज बनाकर

मैं रखता हूँ तुझको जैसे जान अजीज बनाकर 
तुम भी तो रखों मुझे गले का ताबीज बनाकर                                                                         

कयामत तो खुदा ने उसी दिन ही कर डाली थी
तुझे भेजा था जमी पर जब ख़ास चीज़ बनाकर

सच में चारागर मैं भी ठीक होना नही चाहता
मुझको तुम रखना हमेशा अपना मरीज़ बनाकर

जमाने भर की तरफ से तुम्हारा शुक्रिया अंग्रेजों
हर मसले का हल दिया तुमने हर्फे प्लीज़ बनाकर

इसलिए नही डालता मुझ पर कोई डोरे बेचैन
मैं रखता हूँ खुद को हमेशा बदतमीज़ बनाकर

ठहरा हुआ पानी हूँ खुद सोचो क्या करना है

कभी मजबूरियों ने घेरा तो कुछ कह नही सकता
वरना तो तुम्हारे बिन मैं जिंदा रह नही सकता

रखी है मैंने भरोसे की इंटों पर बुनियाद
मेरी महोब्बत का किला शक से ढह नही सकता

ठहरा हुआ पानी हूँ खुद सोचो क्या करना है
अपनी मर्जी से मैं किसी और बह नही सकता

वो तो तुम्ही हो जिसकी बेरुखी भी झेल रहा हूँ
वरना कांटे की चुभन तक मैं सह नही सकता

समर पिछले जन्म का है या अगले जन्म की तैयारी
जा बेचैन के बिना तू भी चैन से रह नही सकता

कल से तुम्हारी तरह फज़ुली बात करूंगा

कसम खाता हूँ ना संजीदा ज़ज्बात करूंगा
कल से तुम्हारी तरह फज़ुली बात करूंगा

बिना मिले ही इतनी तकलीफ दे रही हो
बता किसलिए मैं तुमसे मुलाकात करूंगा

जब मालूम हो गया मेरा देवता पत्थर है
किसलिए माथा रगड़कर मुनाजात करूंगा

इस जन्म का तो कोटा पूरा हो गया बेचैन
अब तो अगले जन्म प्यार के ख्यालात करूंगा

तेरी ज़ुल्फ़ मेरे हालात उलझे है


जुदाई और मौत दोनों है सामने
कसमकस में हूँ गले लगाऊं किसको

तुमने ही रोका है जिक्र करने से
अब हाल-ए दिल जाकर बताऊ किसको

तेरी ज़ुल्फ़ मेरे हालात उलझे है
सोचता हूँ पहले सुलझाऊं किसको

मेरी अकेले की नही है गलतियाँ
परेशान हूँ हकीकत समझाऊं किसको

प्यार में उसे तो मिल गया तू बेचैन
उसकी तरह मैं भी तडफाऊं किसको

हर कोई चाहता है करना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी

हर कोई चाहता है करना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
तुम दीखते ही नही वरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी

यहाँ अच्छे खासे लोगों की तूने बैंड बजा डाली है
बुजदिल भी सीख गये मरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी

हाय दुनियादारी और उम्र के सभी तकाजे छोड़कर
अब रोज पड़ता है संवरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी

सचमुच हाथ जोड़कर कहता हूँ,बोलो तो पैर पकड़ लूं
मैं तो चाहता हूँ सुधरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी

नही मर्दों वाली बातें आंसूं बात-बात पर बहते है
बन गई बेचैन आँखे झरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी

तू खूब खेला दिल खरगोश के साथ



बता कैसे रहूँगा मैं होश के साथ
तू बिछड़ा है इक अफ़सोस के साथ

गम ना कर बाद तेरे तन्हा नही हूँ
मैं रहूँगा दिल की खरोश के साथ

बीच सफर में तुझको लौटना था गर
फिर क्यूं चला था साथ जोश के साथ

क्या पता सर करके कलम दे देता
कुछ दिन तो निभाता सरफरोश के साथ

बता कैसे भूलेगा उम्र भर बेचैन
तू खूब खेला दिल खरगोश के साथ

यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है

पहुँच कर हिज्र में सांसे यक-ब-यक डट गई है
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है

इंतिहा दर्द की मैं तुमको बता नही सकता
तुम्हे सोच सोच कर कैसे छाती फट गई है

हर सू दिखाई देता है तेरे बिछड़ने का गम
जब से वस्ल वाली मेरी खुशियाँ सिमट गई है

दो घड़ी तुझसे निगाह क्या मिलाई जादूगर 
दुनिया की हर शै से अपनी नजर हट गई है

चाहे रोना ही आया हो हिस्से में बेचैन
तुझे मानना पड़ेगा तेरी किस्मत पलट गई है

Wednesday, 29 February 2012

आज बेहद ही रुंआसा है मन तुम्हारे बिन

उखड़ा-उखड़ा बुझा सा है मन तुम्हारे बिन
आज बेहद ही रुंआसा है मन तुम्हारे बिन

जमाना सारा मुझको सहरा नजर आता है
मत पूछों कितना प्यासा है मन तुम्हारे बिन

दीमक बनकर खा रही है जुदाई रात-ओ-दिन
मत सोचना अच्छा खासा है मन तुम्हारे बिन

होता था कभी जिसका आसमां जितना कद
आज छूकर देख जरा सा है मन तुम्हारे बिन

तुम लौट आओगे फिर मेर्र पास बेचैन
शायद झूठी ही दिलासा है मन तुम्हारे बिन

दिल बच्चा नही उल्लू का पठा है

शराफत के तो नाम पर बट्टा है
दिल बच्चा नही उल्लू का पठा है

तन से नही तो मन से कमजोर है
प्यार में पड़कर कौन हट्टा कट्टा है

न यकीन तो किसी से लगाकर देख
कर देगा बरबाद दिल ऐसा सट्टा है

बेवफाई पर मार सकता है गोली
हर सीने में छिपा देसी कट्टा है

 मन जानता है कुछ भी बोल बेचैन
क्यूं तेरे हिस्से का अंगूर खट्टा है

वो रखे अपने दिल पर भार जिसे कुते ने काटा हो


इस युग में वो करे प्यार जिसे कुते ने काटा हो
दिल से वो रखे व्यवहार जिसे कुते ने काटा हो

अपना तो तजुर्बा यहाँ आकर सिमट गया है
वो करे हुश्न का एतबार जिसे कुते ने काटा हो

वादे-शिकवे और चुम्बन सब रखो नगदा नगद
महोब्बत वो करे उधार जिसे कुते ने काटा हो

मिलने का वादा तो सौ बार करेगा महबूब मगर
इनका वो करे इंतजार जिसे कुते ने काटा हो

कुछ नही पाओगे इश्क में बेचैन रहकर जनाब
वो रखे अपने दिल पर भार जिसे कुते ने काटा हो

मेरी दीवानगी की हदें तो साफ़ कहती है

तुझसे बदला जाये तो बदल जाना बेशक
मजबुरी है महीना भर ना मिलूंगा तुझसे

लगा दूसरों के हाथ तो मैं मुरझा जाऊंगा
वो गुल हूँ जो सिर्फ और सिर्फ खिलूँगा तुझसे

मेरी दीवानगी की हदें तो साफ़ कहती है
दे दो हंसकर ज़हर तक भी पी लूँगा तुझसे 

मैं जिंदा हूँ जब तक मुझे अपना ले जिंदगी
गया कब्र में तो ना रती भर भी हिलूंगा तुझसे

बेचैन मत तोड़ सब भ्रम मेरे


दर्द पहले ही ना थे कम मेरे
क्यूं कुरेदे तुमने जख्म मेरे

तेरे बाद मरने की आरज़ू है
मत भेज कही मुझे सनम मेरे

क्यू करूं तुझसे दिल की बात
जब रहे नही तुम हमदम मेरे

कितनी पी है तुझे खबर है साकी
अब तो लडखडाने दे कदम मेरे

किसी बहाने से साँस लेने दे
बेचैन मत तोड़ सब भ्रम मेरे

तू अफसरी का दे मैं दूं प्यार का इंतिहान

तू अफसरी का दे मैं दूं प्यार का इंतिहान
और दोनों हो जाए पास तो फिर बल्ले बल्ले

मैं कहता हूँ जैसे तुझको जान चन्द्रमुखी 
तू भी बोले मुझे देवदास तो फिर बल्ले बल्ले

बेशक मुझे बताना मत इन दिनों जुदाई का
है तुमको भी गर अहसास तो फिर बल्ले बल्ले

मैं तो हर मंडे तेरे नाम पर भूखा रहता हूँ
रखे तू भी कभी उपवास तो फिर बल्ले बल्ले

मेरा क्या है मैं तो नाम से भी बेचैन हूँ
पर ना हो तू कभी उदास तो फिर बल्ले बल्ले

मुझको कितना छोड़ दिया है

जा तूने दिखना छोड़ दिया है
मैंने भी लिखना छोड़ दिया है

नही लेना है कोई भी तजुर्बा
जिंदगी से सीखना छोड़ दिया है

तू ही खरीदेगा उम्मीद थी
अब मैंने बिकना छोड़ दिया है

मैं कोरी झूठ बोलूँगा अब
जुबा पर टिकना छोड़ दिया है

यह तो बता जाते बेचैन
मुझको कितना छोड़ दिया है

तू बिछड़ा है इक अफ़सोस के साथ


बता कैसे रहूँगा मैं होश के साथ
तू बिछड़ा है इक अफ़सोस के साथ

गम ना कर बाद तेरे तन्हा नही हूँ
मैं रहूँगा दिल की खरोश के साथ

बीच सफर में तुझको लौटना था गर
फिर क्यूं चला था साथ जोश के साथ

क्या पता सर करके कलम दे देता
कुछ दिन तो निभाता सरफरोश के साथ

बता कैसे भूलेगा उम्र भर बेचैन
तू खूब खेला दिल खरगोश के साथ

यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है


पहुँच कर हिज्र में सांसे यक-ब-यक डट गई है
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है

इंतिहा दर्द की मैं तुमको बता नही सकता
तुम्हे सोच सोच कर कैसे छाती फट गई है

हर सू दिखाई देता है तेरे बिछड़ने का गम
जब से वस्ल वाली मेरी खुशियाँ सिमट गई है

दो घड़ी तुझसे निगाह क्या मिलाई जादूगर 
दुनिया की हर शै से अपनी नजर हट गई है

चाहे रोना ही आया हो हिस्से में बेचैन
तुझे मानना पड़ेगा तेरी किस्मत पलट गई है

समंदर का पानी उतना खारा नही है

मुझे खुश देखना गर तुम्हे गवारा नही है
जा फिर निभाने का इरादा हमारा नही है

खुशनसीबी रही तो मरकर भी दिखाऊंगा
जिंदगी तूने ढंग से मुझको मारा नही है

तू इसलिए रोज खून के आंसू रुलाता है
तू जानता है तुमसे कोई प्यारा नही है

लोगों ने जितनी अफवाह उड़ा डाली है 
समंदर का पानी उतना खारा नही है

जब तक निभी तो  मैंने खूब निभाई बेचैन
तेरी बेरुखी संग अब अपना गुज़ारा नही है

तुम्हारी तरह मैं किसी का भगवान नही हूँ

यूं भी आये दिन इंतिहान तू ना ले मेरा
तू समझता है मैं उतना सख्तजान नही हूँ

तुझमे और मुझमे फकत इतना ही फर्क है
तुम्हारी तरह मैं किसी का भगवान नही हूँ

तेरी बेरुखी का मुझको सदमा है मगर
अपनी नासाज़ तबीयत से परेशान नही हूँ

गम ना कर मुझमे तुझे न देख पायेगा कोई
मैं जहाँ में इतनी बड़ी पहचान नही हूँ

कभी हरगिज़ न बताता अपनी बेचैन हालत
बदनसीबी है मेरी मैं बेजुबान नही हूँ

Sunday, 5 February 2012

यह क्यूं नही बताते अपने आप से डरते हो



मैं तो मरे हुवो की भी याद में रोता हूँ
तुम तो जीते जी जुदाई की बात करते हो

मुझ पर बेवफाई का इल्जाम लगाने वाले
यह क्यूं नही बताते अपने आप से डरते हो

मैंने पढ़ा है तुम्हारी आँखों का सूनापन
तुम जान बूझकर पल पल घुट घुट मरते हो

अब हाँ ना भरो वो तो तुम्हारी अपनी मर्जी है
तुम्हारा दिल जानता है तुम जैसा संवरते हो

मत पूछ प्यार में परेशान हुआ कितना

मत पूछ प्यार में परेशान हुआ कितना
तन मन और धन का नुकसान हुआ कितना

मैं खुद की नजर में गिरकर जब खड़ा हुआ
अंदाज़ा नही है पशेमान हुआ कितना

 मजबूरी तो देख पूछ भी नही सकता
 जख्मी ज़हन पर तू मेहरबान हुआ कितना

नही पडती आदत तो ना होता यह सब
मैं ही जानता हूँ तुझपर कुर्बान हुआ कितना

बता नही सकता मगर सच है बेचैन
अबके तेरा मुझ पर अहसान हुआ कितना

तैश में आकर तू गोली से उड़ा दे मुझको

तेरी नजरों से गिरा हूँ तो उठा दे मुझको
पौंछकर आंसू तू सीने से लगा दे मुझको

तुमसे खैरात की तरह ही मांग लूँगा मैं
माफ़ी तू कैसे देता है बता दे मुझको

सोचते सोचते तुझको मैं थक गया हूँ अब
थपकिया देकर तू बच्चे सा सुला दे मुझको

यूं भी औकात तेरे आगे मेरी कुछ भी नही
तैश में आकर तू गोली से उड़ा दे मुझको

महज़ औरों की तरह है गर दीवाना बेचैन
फिर तो बेहतर होगा सचमुच भुला दे मुझको

मैं इक रोज तुझे सचमुच खुदा कर दूंगा

शायद मैं तुझे जल्द ही अलविदा कर दूंगा
रूह को भी पापी जिस्म से जुदा कर दूंगा

चारागरों ने आज मुझे बतला दिया है सब
दर्दे जिगर पर जान को मैं फ़िदा कर दूंगा

रखवा कर शिवाले में तस्वीरे-संग तेरी
मैं इक रोज तुझे सचमुच खुदा कर दूंगा

नही रोक पाओगे तुम बरसात अश्कों की
जिस दिन तमाम यादों को धुंआ कर दूंगा

जां निकालने आयेंगे मेरी जब फरिश्ते
मेरे बाद तू बेचैन ना हो दुआ कर दूंगा

तडफ किस्तों में मुझे यूं ना हमदम देता

जुर्म था जो भी सज़ा मुझको एकदम देता
तडफ किस्तों में मुझे यूं ना हमदम देता

याद रखना था तुझे यूं भी उम्र भर मुझको
बेरुखी का न मुझे इतना बड़ा गम देता

यूं पलटकर तुझे बीच-राह से जाना ना था
सफर ये गलत था तो ध्यान पहले कम देता

आज धोखा मेरा समझाने से समझ जाता 
प्यार के भेष में कल तू ना अगर भ्रम देता

बोलता तुझपे दिलो-जान से मरता हूँ
चाहे बेचैन की झूठी ही कसम देता


Tuesday, 31 January 2012

अ दोगले इंसान तुझे मेरी हाय लगेगी

अ बेवफा बेईमान तुझे मेरी हाय लगेगी
तू मान या ना मान तुझे मेरी हाय लगेगी

मैं आधी रात में रोते हुवे सच कह रहा हूँ
होगा कोई नुकसान तुझे मेरी हाय लगेगी

मेरी दीवानगी को बेवफाई का नाम देकर
नही अच्छा किया जान तुझे मेरी हाय लगेगी

अपनी आवारगी को सही ठहराने वाले
अ दोगले इंसान तुझे मेरी हाय लगेगी

जल्द हो जायेगा दुनिया से रुखसत बेचैन
रहना अब परेशान तुझे मेरी हाय लगेगी

Monday, 30 January 2012

खुद ही बोल इस हफ्ते कितना मुस्कुराया है

महबूब से बिछड़कर कौन खुश रह पाया है
खुद ही बोल इस हफ्ते कितना मुस्कुराया है

पिछले दो महीनो की तस्वीरे भेज रहा हूँ
देख कर बता नूरे-शक्ल कितना गवांया है

साफ़ साफ़ बक दिए हालात जिसने दिल के
बाद में उसी का लोगों ने मजाक उड़ाया है

माँ के मरने पर भी ना रोया हूँ इतना
 तुम्हारी नाराजगी ने जितना रुलाया है

मुआमला इश्क का हो व्यापार का बेचैन
ना ज़हन में रख दिक्कतों ने यही सिखाया है

Sunday, 29 January 2012

तेल लेने गया प्यार आज से

तेल लेने गया प्यार आज से
रंगीन रखूंगा विचार आज से

खूब करूंगा अब दबकर आशिकी
नही डर किसी का यार आज से

सुना है हीरोइन के फोटो छपते है
देखा करूंगा अखबार आज से

हसीनो के लिए धड़केगा दिल
बनूंगा पक्का दिलदार आज से

इश्कबाजी अब नगद बेचैन
कर दी है बंद उधार आज से

haryanavi kavi samelan rohtak.dat

haryanavi kavi samelan rohtak 2.dat

Tuesday, 24 January 2012

मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा

तुझसे अब ना कोई शिकवा गिला करूंगा
आगे से जिंदगी मैं कम ही मिला करूंगा

जब तुझे ही नही है कोई ख़ास दिलचस्पी
किसलिए मुलाकातों का सिलसिला करूंगा

जब तय हो चुका तू नही जीत का हासिल
फिर क्यूं साथ यादों का काफिला करूंगा

हो सके तो करना मेरी बात का यकीन
मैं कही भी रहूँ तेरे लिए दुआ करूंगा

कसमकस में शायद अब न रहूँ ज्यादा दिन
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा

कम से कम इश्क के मामले में सीख लिया
ज़ज्बात में बहकर न किसी का भला करूंगा

अब नही गुजरूँगा अहसास के जंगल से
वादा रहा बेचैन सम्भल कर चला करूंगा

Saturday, 21 January 2012

तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी

देख लेना उस पल तुम्हारी भर आएँगी आँखें
मेरे ना होने की जब तुम तक खबर पहुंचेगी

मेरी चीख सुनाई देगी तेरे ज़हन में हरसू
तुम्हारे कसूर तक जब तुम्हारी नजर पहुंचेगी

याद आएगी जब पथराई आँखों की बेबसी
इक आह तेरी रूह तक जाने जिगर पहुंचेगी

मैं तो शहर से क्या दुनिया से ही जा चुका हूँगा
बता तो फिर चाय पीने तू किसके घर पहुंचेगी

शर्त लगा ले तब तक पैदा हो जायेगा अफ़सोस
तू  बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी

चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता

तन्हाई में गजले मेरी गुनगुनाकर तो देखता
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता

गिर जाता कोई न कोई आंसू तेरे दामन पर
मेरी याद में पलकें झिलमिलाकर तो देखता

मेरी दीवानगी से ही तू घबराता रहा सदा
मेरा प्यार अपने डर से टकराकर तो देखता

मैं उतना पागल नही हूँ तू जितना सोचता है
समझ जाता बात प्यार से समझाकर तो देखता

जुल्फों के साथ ख्याल भी तेरे उलझे रहे सदा
सुलझा देता बेचैन जिक्र उठा कर तो देखता

बच्चे की तरह पालूंगा ता-उम्र तुम्हारी याद

बच्चे की तरह पालूंगा ता-उम्र तुम्हारी याद
तुम ले जाना इसे बेशक जवान होने पर

तेरे इश्क ने ही सिखाया है मुझको सबक
पछताता है आदमी सच का ज्ञान होने पर

यकीन का नाम सुना है तो कर थोडा यकीन
बुरा भला बकता हूँ कुछ परेशान होने पर

मैं तो खुद पर इतरा रहा हूँ पाकर तुझको
तू भी कुछ गरूर कर मेरी जान होने पर

अगर नही मालूम तो बता देता हूँ  तुझको
मन शक पर शक धरता है बेईमान होने पर

तेरे प्यार की जरा सी मुझे हवा क्या लगी
खूब रोता हूँ कच्चे दिल का इंसान होने पर

मुझे लेकर बेचैन कोई किसलिए होगा भला
क्यूं याद रखेगा पहलू में आसमान होने पर


Wednesday, 18 January 2012

बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ

 उसे उल्टा सीधा बोलकर खूब रोता हूँ
या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ

शीशे की तरह साफ़ है इश्क के हालात
फिर भी रोज नये ख्वाब क्यूं संजोता हूँ

तेरी याद में मंगल वीर सब एक समान
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ

मुस्कुराना अपनी जगह मगर सच है यह
आजकल चैन की नींद नही सोता हूँ

अब भी वही जवाब है उसका बेचैन
मैं ही सवालातों का बोझ ढोता हूँ

Tuesday, 17 January 2012

कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा

आंसू की शक्ल में ना कोई भ्रम निकलेगा
पथराई आँखों से अब तो दम निकलेगा

फिर करता हूँ  आज मैं एक बार वादा
न जीते जी दिल से तेरा गम निकलेगा

मान जा सितमगर बहुत देर हो जाएगी
जब तक तेरी जुल्फों का खम निकलेगा

ओढ़ लेगा तन्हाई छोड़ कर आवारगी
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा

कर चुके होंगे लोग तेहरवी बेचैन
सुध लेने जब तक तेरा सनम निकलेगा
खम=उलझन 

Monday, 16 January 2012

अपनी महबूबा को मैं ढाढ़ी में रखता हूँ






अपनी महबूबा को मैं ढाढ़ी में रखता हूँ
यूं गौर चेहरे की खेती बाड़ी में रखता हूँ

इसलिए नही आती मुझे सफर में दिक्कत
उसकी तस्वीर हमेशा गाडी में रखता हूँ

मालूम हुआ है जब से उसका पसंदीदा रंग
तब से बीवी को नीली साडी में रखता हूँ

यही तो सबब है मेरी सांसे महकने का
उसे छिपाकर दिल की फुलवाड़ी में रखता हूँ

बता जीते जी कैसे वो दूर होगा बेचैन
लहू सा उसे शरीर की नाडी में रखता हूँ

Sunday, 15 January 2012

फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है

कितना ही तलाश करना नजर नही आऊंगा
तुम्हारी जिंदगी से जब मैं दूर चला जाऊंगा

फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
तुम्हारी हरकतों पर कौन सा टोकने आऊंगा

बेशक से बहाना आंसू मेरी बातें याद करके
कौन सा मैं पिंघल कर उनको पोंछने आऊंगा

मैं हिन्दू  हूँ जान मेरी तो कब्र भी ना बनेगी 
तुम देख लेना राख के ढेर में बदल जाऊंगा

जाओ ये भी वादा रहा तेरे बेचैन का तुमसे
क्यूं आई मौत राज अपने साथ ले जाऊंगा

बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी

अच्छा किया मुझे मेरी औकात याद दिला दी
जो भूल चुका मैं मुझे वो बात याद दिला दी

क्यूं रहेगी बता तेरी यादों की जमी बंजर
तूने आंसुओ की जब बरसात याद दिला दी

ज्यादा ही हवा में मैं उड़ने लगा था शायद
जो तुमने नसीब में मिली मात याद दिला दी

तन्हाई बेबसी और दर्द से डरकर भाग रहे
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी

इक हादसा बनकर आने का शुक्रिया बेचैन
है जिंदगी कितनी वाहियात याद दिला दी

Saturday, 14 January 2012

जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी

अगर मुझको भ्रम है तो मेरा भ्रम तोड़ दो
नही बिगड़ा है अब भी कुछ, मुझको छोड़ दो

मन के किसी कोने में गर दिल्लगी का भूत है
जितना जल्दी हो सके उसका सर फोड़ दो

जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
चुपचाप गरीब आशिक का हिसाब जोड़ दो

हो सके तो खाना रहम मेरा पहला प्यार है
कही ऐसा ना निम्बू सा मुझको निचोड़ दो

बस तेरा नाम लेकर मिल लेंगे बेचैन
चाहे जहाँ भर के गम मेरी और मोड़ दो

कहाँ फंसी फिर बुदबुदाई होगी मगर कोई आसपास होगा


उसने ली जरुर अंगडाई होगी मगर कोई आसपास होगा
उसे मेरी याद तो आई होगी मगर कोई आसपास होगा

जुदाई के मारे मेरी हालत का अंदाज़ा लगाने पर यारों
उसकी आँख तो भर आई होगी मगर कोई आसपास होगा

बैठकर आईने आगे वो आज तो शायद सिंगार करते वक्त
अपने आप से बतियाई होगी मगर कोई आसपास होगा

उसकी फितरत में शामिल वही झूठा इक पुराना अफ़सोस
कहाँ फंसी फिर बुदबुदाई होगी मगर कोई आसपास होगा

शायद चुराकर सबसे नजरे उसने आह भरते हुवे बेचैन
मेरी गजल तो गुनगुनाई होगी मगर कोई आसपास होगा