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Saturday, 17 September 2011

कौन जख्मी ख्यालात करेगा

खुदा जब करामात करेगा
फैंसले हाथों हाथ करेगा
मतलबियों के मोहल्ले में 
कौन गहरे ज़ज्बात करेगा
वो नेता जी है आदमी नही
क्यूं भूखों का साथ करेगा
फिर खोली है जुल्फें उसने
फिर वो दिन को रात करेगा
शादी शुदा से दिल लगाकर
कौन जख्मी ख्यालात करेगा
बड़े से बड़ा चोर भी बेचैन
घर से ही शुरुआत करेगा

8 comments:

Pradeep Sheoran said...

kamal kar diya ji

ARIHANT JAIN said...

kamaal

parbhawi kathan said...

bahut khoob..... bechain ji ...aap se judkar acchha laga...

डॅा वेदप्रकाश श्योराण said...

wo neta hai aadmi nhin kyon bhukon se pyar karege..........why to put g before neta?.........................achhi lgi

prabhat said...

एक छोटी सी बात पर परिवार बदलते देखे है,
जरुरत पड़ी तो सब रिश्तेदार बदलते देखे है,
अब यकीन सा उठ चला, हर शख्स से "प्रभात"
मैंने अक्सर अपनों के किरदार बदलते देखे है.
कवि प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
ब्लॉग का पता : http://prabhat-wwwprabhatkumarbhardwaj.blogspot.com/

J.S.Parmar said...

कमाल है जी आप भी .....जय हो......

Ms Bharti said...

baut umda..

V M BECHAIN said...

THNX DOSTON