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Thursday, 1 March 2012
हर कोई चाहता है करना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
हर कोई चाहता है करना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
तुम दीखते ही नही वरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
यहाँ अच्छे खासे लोगों की तूने बैंड बजा डाली है
बुजदिल भी सीख गये मरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
हाय दुनियादारी और उम्र के सभी तकाजे छोड़कर
अब रोज पड़ता है संवरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
सचमुच हाथ जोड़कर कहता हूँ,बोलो तो पैर पकड़ लूं
मैं तो चाहता हूँ सुधरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
नही मर्दों वाली बातें आंसूं बात-बात पर बहते है
बन गई बेचैन आँखे झरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
तुम दीखते ही नही वरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
यहाँ अच्छे खासे लोगों की तूने बैंड बजा डाली है
बुजदिल भी सीख गये मरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
हाय दुनियादारी और उम्र के सभी तकाजे छोड़कर
अब रोज पड़ता है संवरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
सचमुच हाथ जोड़कर कहता हूँ,बोलो तो पैर पकड़ लूं
मैं तो चाहता हूँ सुधरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
नही मर्दों वाली बातें आंसूं बात-बात पर बहते है
बन गई बेचैन आँखे झरना इश्क तुम्हारी ऐसी तैसी
तू खूब खेला दिल खरगोश के साथ
बता कैसे रहूँगा मैं होश के साथ
तू बिछड़ा है इक अफ़सोस के साथ
गम ना कर बाद तेरे तन्हा नही हूँ
मैं रहूँगा दिल की खरोश के साथ
बीच सफर में तुझको लौटना था गर
फिर क्यूं चला था साथ जोश के साथ
क्या पता सर करके कलम दे देता
कुछ दिन तो निभाता सरफरोश के साथ
बता कैसे भूलेगा उम्र भर बेचैन
तू खूब खेला दिल खरगोश के साथ
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है
पहुँच कर हिज्र में सांसे यक-ब-यक डट गई है
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है
इंतिहा दर्द की मैं तुमको बता नही सकता
तुम्हे सोच सोच कर कैसे छाती फट गई है
हर सू दिखाई देता है तेरे बिछड़ने का गम
जब से वस्ल वाली मेरी खुशियाँ सिमट गई है
दो घड़ी तुझसे निगाह क्या मिलाई जादूगर
दुनिया की हर शै से अपनी नजर हट गई है
चाहे रोना ही आया हो हिस्से में बेचैन
तुझे मानना पड़ेगा तेरी किस्मत पलट गई है
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है
इंतिहा दर्द की मैं तुमको बता नही सकता
तुम्हे सोच सोच कर कैसे छाती फट गई है
हर सू दिखाई देता है तेरे बिछड़ने का गम
जब से वस्ल वाली मेरी खुशियाँ सिमट गई है
दो घड़ी तुझसे निगाह क्या मिलाई जादूगर
दुनिया की हर शै से अपनी नजर हट गई है
चाहे रोना ही आया हो हिस्से में बेचैन
तुझे मानना पड़ेगा तेरी किस्मत पलट गई है
Wednesday, 29 February 2012
आज बेहद ही रुंआसा है मन तुम्हारे बिन
उखड़ा-उखड़ा बुझा सा है मन तुम्हारे बिन
आज बेहद ही रुंआसा है मन तुम्हारे बिन
जमाना सारा मुझको सहरा नजर आता है
मत पूछों कितना प्यासा है मन तुम्हारे बिन
दीमक बनकर खा रही है जुदाई रात-ओ-दिन
मत सोचना अच्छा खासा है मन तुम्हारे बिन
होता था कभी जिसका आसमां जितना कद
आज छूकर देख जरा सा है मन तुम्हारे बिन
तुम लौट आओगे फिर मेर्र पास बेचैन
शायद झूठी ही दिलासा है मन तुम्हारे बिन
आज बेहद ही रुंआसा है मन तुम्हारे बिन
जमाना सारा मुझको सहरा नजर आता है
मत पूछों कितना प्यासा है मन तुम्हारे बिन
दीमक बनकर खा रही है जुदाई रात-ओ-दिन
मत सोचना अच्छा खासा है मन तुम्हारे बिन
होता था कभी जिसका आसमां जितना कद
आज छूकर देख जरा सा है मन तुम्हारे बिन
तुम लौट आओगे फिर मेर्र पास बेचैन
शायद झूठी ही दिलासा है मन तुम्हारे बिन
दिल बच्चा नही उल्लू का पठा है
शराफत के तो नाम पर बट्टा है
दिल बच्चा नही उल्लू का पठा है
तन से नही तो मन से कमजोर है
प्यार में पड़कर कौन हट्टा कट्टा है
न यकीन तो किसी से लगाकर देख
कर देगा बरबाद दिल ऐसा सट्टा है
बेवफाई पर मार सकता है गोली
हर सीने में छिपा देसी कट्टा है
मन जानता है कुछ भी बोल बेचैन
क्यूं तेरे हिस्से का अंगूर खट्टा है
दिल बच्चा नही उल्लू का पठा है
तन से नही तो मन से कमजोर है
प्यार में पड़कर कौन हट्टा कट्टा है
न यकीन तो किसी से लगाकर देख
कर देगा बरबाद दिल ऐसा सट्टा है
बेवफाई पर मार सकता है गोली
हर सीने में छिपा देसी कट्टा है
मन जानता है कुछ भी बोल बेचैन
क्यूं तेरे हिस्से का अंगूर खट्टा है
वो रखे अपने दिल पर भार जिसे कुते ने काटा हो
इस युग में वो करे प्यार जिसे कुते ने काटा हो
दिल से वो रखे व्यवहार जिसे कुते ने काटा हो
अपना तो तजुर्बा यहाँ आकर सिमट गया है
वो करे हुश्न का एतबार जिसे कुते ने काटा हो
वादे-शिकवे और चुम्बन सब रखो नगदा नगद
महोब्बत वो करे उधार जिसे कुते ने काटा हो
मिलने का वादा तो सौ बार करेगा महबूब मगर
इनका वो करे इंतजार जिसे कुते ने काटा हो
कुछ नही पाओगे इश्क में बेचैन रहकर जनाब
वो रखे अपने दिल पर भार जिसे कुते ने काटा हो
मेरी दीवानगी की हदें तो साफ़ कहती है
तुझसे बदला जाये तो बदल जाना बेशक
मजबुरी है महीना भर ना मिलूंगा तुझसे
लगा दूसरों के हाथ तो मैं मुरझा जाऊंगा
वो गुल हूँ जो सिर्फ और सिर्फ खिलूँगा तुझसे
मेरी दीवानगी की हदें तो साफ़ कहती है
दे दो हंसकर ज़हर तक भी पी लूँगा तुझसे
मैं जिंदा हूँ जब तक मुझे अपना ले जिंदगी
गया कब्र में तो ना रती भर भी हिलूंगा तुझसे
मजबुरी है महीना भर ना मिलूंगा तुझसे
लगा दूसरों के हाथ तो मैं मुरझा जाऊंगा
वो गुल हूँ जो सिर्फ और सिर्फ खिलूँगा तुझसे
मेरी दीवानगी की हदें तो साफ़ कहती है
दे दो हंसकर ज़हर तक भी पी लूँगा तुझसे
मैं जिंदा हूँ जब तक मुझे अपना ले जिंदगी
गया कब्र में तो ना रती भर भी हिलूंगा तुझसे
तू अफसरी का दे मैं दूं प्यार का इंतिहान
तू अफसरी का दे मैं दूं प्यार का इंतिहान
और दोनों हो जाए पास तो फिर बल्ले बल्ले
मैं कहता हूँ जैसे तुझको जान चन्द्रमुखी
तू भी बोले मुझे देवदास तो फिर बल्ले बल्ले
बेशक मुझे बताना मत इन दिनों जुदाई का
है तुमको भी गर अहसास तो फिर बल्ले बल्ले
मैं तो हर मंडे तेरे नाम पर भूखा रहता हूँ
रखे तू भी कभी उपवास तो फिर बल्ले बल्ले
मेरा क्या है मैं तो नाम से भी बेचैन हूँ
पर ना हो तू कभी उदास तो फिर बल्ले बल्ले
और दोनों हो जाए पास तो फिर बल्ले बल्ले
मैं कहता हूँ जैसे तुझको जान चन्द्रमुखी
तू भी बोले मुझे देवदास तो फिर बल्ले बल्ले
बेशक मुझे बताना मत इन दिनों जुदाई का
है तुमको भी गर अहसास तो फिर बल्ले बल्ले
मैं तो हर मंडे तेरे नाम पर भूखा रहता हूँ
रखे तू भी कभी उपवास तो फिर बल्ले बल्ले
मेरा क्या है मैं तो नाम से भी बेचैन हूँ
पर ना हो तू कभी उदास तो फिर बल्ले बल्ले
तू बिछड़ा है इक अफ़सोस के साथ
बता कैसे रहूँगा मैं होश के साथ
तू बिछड़ा है इक अफ़सोस के साथ
गम ना कर बाद तेरे तन्हा नही हूँ
मैं रहूँगा दिल की खरोश के साथ
बीच सफर में तुझको लौटना था गर
फिर क्यूं चला था साथ जोश के साथ
क्या पता सर करके कलम दे देता
कुछ दिन तो निभाता सरफरोश के साथ
बता कैसे भूलेगा उम्र भर बेचैन
तू खूब खेला दिल खरगोश के साथ
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है
पहुँच कर हिज्र में सांसे यक-ब-यक डट गई है
यकीन है तो कर लो तुम बिन उम्र घट गई है
इंतिहा दर्द की मैं तुमको बता नही सकता
तुम्हे सोच सोच कर कैसे छाती फट गई है
हर सू दिखाई देता है तेरे बिछड़ने का गम
जब से वस्ल वाली मेरी खुशियाँ सिमट गई है
दो घड़ी तुझसे निगाह क्या मिलाई जादूगर
दुनिया की हर शै से अपनी नजर हट गई है
चाहे रोना ही आया हो हिस्से में बेचैन
तुझे मानना पड़ेगा तेरी किस्मत पलट गई है
समंदर का पानी उतना खारा नही है
मुझे खुश देखना गर तुम्हे गवारा नही है
जा फिर निभाने का इरादा हमारा नही है
खुशनसीबी रही तो मरकर भी दिखाऊंगा
जिंदगी तूने ढंग से मुझको मारा नही है
तू इसलिए रोज खून के आंसू रुलाता है
तू जानता है तुमसे कोई प्यारा नही है
लोगों ने जितनी अफवाह उड़ा डाली है
समंदर का पानी उतना खारा नही है
जब तक निभी तो मैंने खूब निभाई बेचैन
तेरी बेरुखी संग अब अपना गुज़ारा नही है
जा फिर निभाने का इरादा हमारा नही है
खुशनसीबी रही तो मरकर भी दिखाऊंगा
जिंदगी तूने ढंग से मुझको मारा नही है
तू इसलिए रोज खून के आंसू रुलाता है
तू जानता है तुमसे कोई प्यारा नही है
लोगों ने जितनी अफवाह उड़ा डाली है
समंदर का पानी उतना खारा नही है
जब तक निभी तो मैंने खूब निभाई बेचैन
तेरी बेरुखी संग अब अपना गुज़ारा नही है
तुम्हारी तरह मैं किसी का भगवान नही हूँ
यूं भी आये दिन इंतिहान तू ना ले मेरा
तू समझता है मैं उतना सख्तजान नही हूँ
तुझमे और मुझमे फकत इतना ही फर्क है
तुम्हारी तरह मैं किसी का भगवान नही हूँ
तेरी बेरुखी का मुझको सदमा है मगर
अपनी नासाज़ तबीयत से परेशान नही हूँ
गम ना कर मुझमे तुझे न देख पायेगा कोई
मैं जहाँ में इतनी बड़ी पहचान नही हूँ
कभी हरगिज़ न बताता अपनी बेचैन हालत
बदनसीबी है मेरी मैं बेजुबान नही हूँ
तू समझता है मैं उतना सख्तजान नही हूँ
तुझमे और मुझमे फकत इतना ही फर्क है
तुम्हारी तरह मैं किसी का भगवान नही हूँ
तेरी बेरुखी का मुझको सदमा है मगर
अपनी नासाज़ तबीयत से परेशान नही हूँ
गम ना कर मुझमे तुझे न देख पायेगा कोई
मैं जहाँ में इतनी बड़ी पहचान नही हूँ
कभी हरगिज़ न बताता अपनी बेचैन हालत
बदनसीबी है मेरी मैं बेजुबान नही हूँ
Sunday, 5 February 2012
यह क्यूं नही बताते अपने आप से डरते हो
मैं तो मरे हुवो की भी याद में रोता हूँ
तुम तो जीते जी जुदाई की बात करते हो
मुझ पर बेवफाई का इल्जाम लगाने वाले
यह क्यूं नही बताते अपने आप से डरते हो
मैंने पढ़ा है तुम्हारी आँखों का सूनापन
तुम जान बूझकर पल पल घुट घुट मरते हो
अब हाँ ना भरो वो तो तुम्हारी अपनी मर्जी है
तुम्हारा दिल जानता है तुम जैसा संवरते हो
मत पूछ प्यार में परेशान हुआ कितना
मत पूछ प्यार में परेशान हुआ कितना
तन मन और धन का नुकसान हुआ कितना
मैं खुद की नजर में गिरकर जब खड़ा हुआ
अंदाज़ा नही है पशेमान हुआ कितना
मजबूरी तो देख पूछ भी नही सकता
जख्मी ज़हन पर तू मेहरबान हुआ कितना
नही पडती आदत तो ना होता यह सब
मैं ही जानता हूँ तुझपर कुर्बान हुआ कितना
बता नही सकता मगर सच है बेचैन
अबके तेरा मुझ पर अहसान हुआ कितना
तन मन और धन का नुकसान हुआ कितना
मैं खुद की नजर में गिरकर जब खड़ा हुआ
अंदाज़ा नही है पशेमान हुआ कितना
मजबूरी तो देख पूछ भी नही सकता
जख्मी ज़हन पर तू मेहरबान हुआ कितना
नही पडती आदत तो ना होता यह सब
मैं ही जानता हूँ तुझपर कुर्बान हुआ कितना
बता नही सकता मगर सच है बेचैन
अबके तेरा मुझ पर अहसान हुआ कितना
तैश में आकर तू गोली से उड़ा दे मुझको
तेरी नजरों से गिरा हूँ तो उठा दे मुझको
पौंछकर आंसू तू सीने से लगा दे मुझको
तुमसे खैरात की तरह ही मांग लूँगा मैं
माफ़ी तू कैसे देता है बता दे मुझको
सोचते सोचते तुझको मैं थक गया हूँ अब
थपकिया देकर तू बच्चे सा सुला दे मुझको
यूं भी औकात तेरे आगे मेरी कुछ भी नही
तैश में आकर तू गोली से उड़ा दे मुझको
महज़ औरों की तरह है गर दीवाना बेचैन
फिर तो बेहतर होगा सचमुच भुला दे मुझको
पौंछकर आंसू तू सीने से लगा दे मुझको
तुमसे खैरात की तरह ही मांग लूँगा मैं
माफ़ी तू कैसे देता है बता दे मुझको
सोचते सोचते तुझको मैं थक गया हूँ अब
थपकिया देकर तू बच्चे सा सुला दे मुझको
यूं भी औकात तेरे आगे मेरी कुछ भी नही
तैश में आकर तू गोली से उड़ा दे मुझको
महज़ औरों की तरह है गर दीवाना बेचैन
फिर तो बेहतर होगा सचमुच भुला दे मुझको
मैं इक रोज तुझे सचमुच खुदा कर दूंगा
शायद मैं तुझे जल्द ही अलविदा कर दूंगा
रूह को भी पापी जिस्म से जुदा कर दूंगा
चारागरों ने आज मुझे बतला दिया है सब
दर्दे जिगर पर जान को मैं फ़िदा कर दूंगा
रखवा कर शिवाले में तस्वीरे-संग तेरी
मैं इक रोज तुझे सचमुच खुदा कर दूंगा
नही रोक पाओगे तुम बरसात अश्कों की
जिस दिन तमाम यादों को धुंआ कर दूंगा
जां निकालने आयेंगे मेरी जब फरिश्ते
मेरे बाद तू बेचैन ना हो दुआ कर दूंगा
रूह को भी पापी जिस्म से जुदा कर दूंगा
चारागरों ने आज मुझे बतला दिया है सब
दर्दे जिगर पर जान को मैं फ़िदा कर दूंगा
रखवा कर शिवाले में तस्वीरे-संग तेरी
मैं इक रोज तुझे सचमुच खुदा कर दूंगा
नही रोक पाओगे तुम बरसात अश्कों की
जिस दिन तमाम यादों को धुंआ कर दूंगा
जां निकालने आयेंगे मेरी जब फरिश्ते
मेरे बाद तू बेचैन ना हो दुआ कर दूंगा
तडफ किस्तों में मुझे यूं ना हमदम देता
जुर्म था जो भी सज़ा मुझको एकदम देता
तडफ किस्तों में मुझे यूं ना हमदम देता
याद रखना था तुझे यूं भी उम्र भर मुझको
बेरुखी का न मुझे इतना बड़ा गम देता
यूं पलटकर तुझे बीच-राह से जाना ना था
सफर ये गलत था तो ध्यान पहले कम देता
आज धोखा मेरा समझाने से समझ जाता
प्यार के भेष में कल तू ना अगर भ्रम देता
बोलता तुझपे दिलो-जान से मरता हूँ
चाहे बेचैन की झूठी ही कसम देता
तडफ किस्तों में मुझे यूं ना हमदम देता
याद रखना था तुझे यूं भी उम्र भर मुझको
बेरुखी का न मुझे इतना बड़ा गम देता
यूं पलटकर तुझे बीच-राह से जाना ना था
सफर ये गलत था तो ध्यान पहले कम देता
आज धोखा मेरा समझाने से समझ जाता
प्यार के भेष में कल तू ना अगर भ्रम देता
बोलता तुझपे दिलो-जान से मरता हूँ
चाहे बेचैन की झूठी ही कसम देता
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