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Friday, 6 January 2012
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में
मैं जकड़ा हुआ हूँ हालात की जंजीर में
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में
मैं जिंदगी के सर्कस का जोकर हूँ जान
नही लिखवाकर लाया हंसना तकदीर में
मैं नही हूँ तुम्हारे ख्वाबो का शहजादा
मत बर्बाद कीजियेगा वक्त इस कबीर में
कैसे लूं तुझे बाँहों में भरने का ख्वाब
जब दिख नही रही तुम हाथों की लकीर में
होकर बेचैन दम तोड़ता है तो तोड़ने दो
मत तरस खाना अपनी जुल्फों के असीर में
असीर= कैदी
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में
मैं जिंदगी के सर्कस का जोकर हूँ जान
नही लिखवाकर लाया हंसना तकदीर में
मैं नही हूँ तुम्हारे ख्वाबो का शहजादा
मत बर्बाद कीजियेगा वक्त इस कबीर में
कैसे लूं तुझे बाँहों में भरने का ख्वाब
जब दिख नही रही तुम हाथों की लकीर में
होकर बेचैन दम तोड़ता है तो तोड़ने दो
मत तरस खाना अपनी जुल्फों के असीर में
असीर= कैदी
Thursday, 5 January 2012
मुझसे गुठली की नही आम की बातें कर
आजमाइश छोड़ कर काम की बातें कर
मुझसे गुठली की नही आम की बातें कर
शोहरत का तो अचार भी नही डलता दोस्त
हो सके तो व्यपार में दाम की बातें कर
सिफारिस के साथ मेहनत भी लाज़िम है
ना गरुर में ज्यादा दुआ सलाम की बातें कर
तेरे मन में क्या वो तो सभी जान गए है
नेता जी जुबा से तो आवाम की बातें कर
दिन किस तरहा गुजरा भूल जाओ बेचैन
क्या करेगा ख़ास आज शाम की बातें कर
मुझसे गुठली की नही आम की बातें कर
शोहरत का तो अचार भी नही डलता दोस्त
हो सके तो व्यपार में दाम की बातें कर
सिफारिस के साथ मेहनत भी लाज़िम है
ना गरुर में ज्यादा दुआ सलाम की बातें कर
तेरे मन में क्या वो तो सभी जान गए है
नेता जी जुबा से तो आवाम की बातें कर
दिन किस तरहा गुजरा भूल जाओ बेचैन
क्या करेगा ख़ास आज शाम की बातें कर
Wednesday, 4 January 2012
देख कही ठंड ना लग जाए हमारे प्यार को
जमाने की आबो हवा से बचकर मेरी जान
देख कही ठंड ना लग जाए हमारे प्यार को
अहसास की धुंध निकलेगी दोनों के मुह से
कोई तो पिलाकर देखे चाय हमारे प्यार को
हमने तुमने शादी का फैंसला क्या लिया है
देने लगे है आशिक दुआएं हमारे प्यार को
तुम नौ हाथ की रजाई तान कर सो जाओ
छू भी नही सकती बलाएँ हमारे प्यार को
आओ जहाँ को कर दे हम इस तरह बेचैन
लोग जन्मों का बंधन बताये हमारे प्यार को
देख कही ठंड ना लग जाए हमारे प्यार को
अहसास की धुंध निकलेगी दोनों के मुह से
कोई तो पिलाकर देखे चाय हमारे प्यार को
हमने तुमने शादी का फैंसला क्या लिया है
देने लगे है आशिक दुआएं हमारे प्यार को
तुम नौ हाथ की रजाई तान कर सो जाओ
छू भी नही सकती बलाएँ हमारे प्यार को
आओ जहाँ को कर दे हम इस तरह बेचैन
लोग जन्मों का बंधन बताये हमारे प्यार को
Saturday, 31 December 2011
नये साल से मेरी जान की तकदीर संवर जाए
नये साल से मेरी जान की तकदीर संवर जाए
मेरे इश्क के भगवान की तकदीर संवर जाए
जागते ही सुबह कोई खुश खबरी मिले ख़ास
मेरी महोब्बत के ईमान की तकदीर संवर जाए
बचपन से देखा ख्वाब उसका हर हाल में हो पूरा
उसके हिस्से के आसमान की तकदीर संवर जाए
झुक ना पाए पलकें जब रफ्तार बढ़े धडकनों की
दोस्तों काश दिले नादान की तकदीर संवर जाए
हालात तो नही है बेचैन फिर दुआ तो दे देता हूँ
कैसे भी मेरे हिन्दुस्तान की तकदीर संवर जाए
मेरे इश्क के भगवान की तकदीर संवर जाए
जागते ही सुबह कोई खुश खबरी मिले ख़ास
मेरी महोब्बत के ईमान की तकदीर संवर जाए
बचपन से देखा ख्वाब उसका हर हाल में हो पूरा
उसके हिस्से के आसमान की तकदीर संवर जाए
झुक ना पाए पलकें जब रफ्तार बढ़े धडकनों की
दोस्तों काश दिले नादान की तकदीर संवर जाए
हालात तो नही है बेचैन फिर दुआ तो दे देता हूँ
कैसे भी मेरे हिन्दुस्तान की तकदीर संवर जाए
Friday, 30 December 2011
तारीख की पलकों पर सजाऊंगा तुझे
वो दे गया जिसकी तलाश थी मुझे
गुज़रा साल कैसे भुलाउंगा तुझे
कुछ भी दे दे अब आने वाला वक्त
मैं जीत का हासिल बताऊंगा तुझे
दिन महीने साल गुजरें कितने ही
तारीख की पलकों पर सजाऊंगा तुझे
भरोसा रख जिंदगी अपने दीवाने पर
अह्सासे-खुशनसीबी दिलाऊंगा तुझे
क्यूं हो जाता हूँ बात बात पर बेचैन
मिल किसी रोज समझाऊंगा तुझे
गुज़रा साल कैसे भुलाउंगा तुझे
कुछ भी दे दे अब आने वाला वक्त
मैं जीत का हासिल बताऊंगा तुझे
दिन महीने साल गुजरें कितने ही
तारीख की पलकों पर सजाऊंगा तुझे
भरोसा रख जिंदगी अपने दीवाने पर
अह्सासे-खुशनसीबी दिलाऊंगा तुझे
क्यूं हो जाता हूँ बात बात पर बेचैन
मिल किसी रोज समझाऊंगा तुझे
Thursday, 29 December 2011
नये साल पर मशवरा है मुफ्त में सभी को
इस साल के झगड़े इसी साल निपटा लो
भूलकर नाराजगी रूठा महबूब मना लो
एक दूसरे की गलती फिर निकलना कभी
तुम फिलहाल नये साल की धूम मचा लो
प्यार है तो रूठना भी जरूरी है मेरे दोस्त
अच्छे से ये बात दिलों-दिमाग में बिठा लो
मिलता है मौका तो माथे पर चुम्बन लेकर
पाकीजगी के अहसास का दीपक जला लो
गर अगले जन्म में भी उसी की आरजू है
दे देगा खुदा शिवाले जाकर सर झुका लो
चाहत है नये साल पर गर ज्यदा मजे की
पैग लगाकर सच बोलने की कसम खा लो
नये साल पर मशवरा है मुफ्त में बेचैन
दोस्ती के रिश्ते को थोडा सा आगे बढ़ा लो
भूलकर नाराजगी रूठा महबूब मना लो
एक दूसरे की गलती फिर निकलना कभी
तुम फिलहाल नये साल की धूम मचा लो
प्यार है तो रूठना भी जरूरी है मेरे दोस्त
अच्छे से ये बात दिलों-दिमाग में बिठा लो
मिलता है मौका तो माथे पर चुम्बन लेकर
पाकीजगी के अहसास का दीपक जला लो
गर अगले जन्म में भी उसी की आरजू है
दे देगा खुदा शिवाले जाकर सर झुका लो
चाहत है नये साल पर गर ज्यदा मजे की
पैग लगाकर सच बोलने की कसम खा लो
नये साल पर मशवरा है मुफ्त में बेचैन
दोस्ती के रिश्ते को थोडा सा आगे बढ़ा लो
जो भी उम्मीदें है इस साल पूरी हो जाएँ
जो भी उम्मीदें है इस साल पूरी हो जाएँ
है दुआ कामयाबी तुमसे मिलने घर आये
पूरे घराने और माँ-बाप का हो नाम रोशन
तुम्हारे नाम की ही हर कोई कसमे खाएं
हो मसला इश्क का या कोई व्यपार वाला
तुम्हारे वास्ते मुश्किल सभी सुलझ जाएँ
अव्वल तो आंसू कोई तुम्हारे कभी ना आये
अगर वो आये तो खुशखबरी संग में लायें
चाहे तखल्लुस में अपना नाम रख बेचैन
दिलों दिमाग मगर चैन की गजलें गाएं
है दुआ कामयाबी तुमसे मिलने घर आये
पूरे घराने और माँ-बाप का हो नाम रोशन
तुम्हारे नाम की ही हर कोई कसमे खाएं
हो मसला इश्क का या कोई व्यपार वाला
तुम्हारे वास्ते मुश्किल सभी सुलझ जाएँ
अव्वल तो आंसू कोई तुम्हारे कभी ना आये
अगर वो आये तो खुशखबरी संग में लायें
चाहे तखल्लुस में अपना नाम रख बेचैन
दिलों दिमाग मगर चैन की गजलें गाएं
Monday, 26 December 2011
माफ़ कर देना मुझको मेरी बेबसी के लिए
आज के बाद नही रोऊंगा किसी के लिए
रखूंगा अश्को को बचाकर ख़ुशी के लिए
चाहे हालात कभी खुदखुशी के बन जाये
मुस्कुराता रहूँगा उसकी दोस्ती के लिए
अपने कमरे के शिवाले से बुत हटा दूंगा
उसकी तस्वीर को रखूंगा बन्दगी के लिए
खुदा हाफ़िज़ सलाम तुमको आखरी मेरा
अब ना आऊंगा लौटकर मैं आशिकी के लिए
तुझमे हिम्मत है गर सच में मुझे भुलाने की
मैं भी भूलूंगा तुमको सारी जिंदगी के लिए
बोल अ शमा खुदा तुम्हारा भला कैसे करे
तुमने अँधेरे को है तडफाया रौशनी के लिए
तुमको परेशान किया बेचैन मैं शर्मिंदा हूँ
माफ़ कर देना मुझको मेरी बेबसी के लिए
रखूंगा अश्को को बचाकर ख़ुशी के लिए
चाहे हालात कभी खुदखुशी के बन जाये
मुस्कुराता रहूँगा उसकी दोस्ती के लिए
अपने कमरे के शिवाले से बुत हटा दूंगा
उसकी तस्वीर को रखूंगा बन्दगी के लिए
खुदा हाफ़िज़ सलाम तुमको आखरी मेरा
अब ना आऊंगा लौटकर मैं आशिकी के लिए
तुझमे हिम्मत है गर सच में मुझे भुलाने की
मैं भी भूलूंगा तुमको सारी जिंदगी के लिए
बोल अ शमा खुदा तुम्हारा भला कैसे करे
तुमने अँधेरे को है तडफाया रौशनी के लिए
तुमको परेशान किया बेचैन मैं शर्मिंदा हूँ
माफ़ कर देना मुझको मेरी बेबसी के लिए
Sunday, 25 December 2011
बता तो क्यूं मुझको बेवकूफ बनाती रही
तेरी याद में रोते रोते सो गया था कल
इसलिए नींद में भी सुबकियां आती रही
उधर तू अपना शक समेटने में रहा उम्र भर
इधर बेबसी अपना रंग-रूप दिखाती रही
मेरे जज़्बात के संग खेलकर इत्मिनान से
बता तो क्यूं मुझको बेवकूफ बनाती रही
क्यूं नही बताती उसमे वो बेवफा तुम थी
वो कहानी जो तुम लोगों को सुनाती रही
गर बेचैन नही था मुझको लेकर तेरा दिल
किसलिए बार बार झूठी कसमे खाती रही
इसलिए नींद में भी सुबकियां आती रही
उधर तू अपना शक समेटने में रहा उम्र भर
इधर बेबसी अपना रंग-रूप दिखाती रही
मेरे जज़्बात के संग खेलकर इत्मिनान से
बता तो क्यूं मुझको बेवकूफ बनाती रही
क्यूं नही बताती उसमे वो बेवफा तुम थी
वो कहानी जो तुम लोगों को सुनाती रही
गर बेचैन नही था मुझको लेकर तेरा दिल
किसलिए बार बार झूठी कसमे खाती रही
Friday, 23 December 2011
कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
दीवानगी को पागलपन का करार देने वालों
बहुत पछताओगे जीत को हार देने वालों
कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
महबूब को महोब्बत में इंतजार देने वालों
तुम्हारे भी तो बन सकते है गोली का निशाना
इंसानियत के दुश्मनों को हथियार देने वालों
कभी आम आदमी के दर्द को भुगत कर देखो
मंचों से भीड़ को इंकलाबी विचार देने वालों
मन की ताकत बढती है सच बोलने से बेचैन
आजमाकर देखो झूठा करार देने वालों
बहुत पछताओगे जीत को हार देने वालों
कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
महबूब को महोब्बत में इंतजार देने वालों
तुम्हारे भी तो बन सकते है गोली का निशाना
इंसानियत के दुश्मनों को हथियार देने वालों
कभी आम आदमी के दर्द को भुगत कर देखो
मंचों से भीड़ को इंकलाबी विचार देने वालों
मन की ताकत बढती है सच बोलने से बेचैन
आजमाकर देखो झूठा करार देने वालों
पिछली मुलाकात की इक बात अधूरी है
पिछली मुलाकात की इक बात अधूरी है
वो बात ये थी तुम बिन हयात अधूरी है
सर अपनी गोद से मेरा मत उठाओ जान
अभी मेरी आँखों की बरसात अधूरी है
मैं भी देखूँगा रोज तुम भी देखना चाँद
कही भी रहे निगाहों की मुलाक़ात जरूरी है
वो मान जाये बेशक मेरी बात का बुरा
संग है महबूब तो वस्ल बिना रात अधूरी है
कितना बड़ा हो जाये किरदार तेरा बेचैन
सितमगर के बिना अब तो औकात अधूरी है
वो बात ये थी तुम बिन हयात अधूरी है
सर अपनी गोद से मेरा मत उठाओ जान
अभी मेरी आँखों की बरसात अधूरी है
मैं भी देखूँगा रोज तुम भी देखना चाँद
कही भी रहे निगाहों की मुलाक़ात जरूरी है
वो मान जाये बेशक मेरी बात का बुरा
संग है महबूब तो वस्ल बिना रात अधूरी है
कितना बड़ा हो जाये किरदार तेरा बेचैन
सितमगर के बिना अब तो औकात अधूरी है
Thursday, 22 December 2011
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर
कुछ भी नही पाओगे शायर से दिल लगाकर
देखना पछताओगे शायर से दिल लगाकर
जमाने की गिनती पहाड़े कम जानता है
तुम कैसे निभाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे रखेगा हर वक्त अहसास के जंगल में
बहुत डर जाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे हर गजल में लगेगा महबूब इक नया
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर
तेरी जुल्फों की तरह ख्याल भी उलझ जायेंगे
किसको सुलझाओगे शायर से दिल लगाकर
होना पड़ेगा आपको बेचैन हर बात पर
कितनी कसम खाओगे शायर से दिल लगाकर
देखना पछताओगे शायर से दिल लगाकर
जमाने की गिनती पहाड़े कम जानता है
तुम कैसे निभाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे रखेगा हर वक्त अहसास के जंगल में
बहुत डर जाओगे शायर से दिल लगाकर
तुझे हर गजल में लगेगा महबूब इक नया
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर
तेरी जुल्फों की तरह ख्याल भी उलझ जायेंगे
किसको सुलझाओगे शायर से दिल लगाकर
होना पड़ेगा आपको बेचैन हर बात पर
कितनी कसम खाओगे शायर से दिल लगाकर
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये
खुशखबरी के झोंके आपसे अक्सर मिलने आये
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये
हरेक ख्वाब हकीकत बनकर चले आपके संग
मेहनत के लम्हे देवें कामयाबी की दुआएं
घर में दोस्तों में और तमाम रिश्तेदारों में
आपके आसमान छूने की खूब चले चर्चाये
अव्वल तो कोई दर्द-ओ-गम ना मिले आपको
अगर मिलता है तो वो मेरी और सरक जाएँ
चेहरे की चमक बढ़े चांदनी सा बिखरे नाम
बेचैन मेरे महबूब के हक में चले हवाए
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये
हरेक ख्वाब हकीकत बनकर चले आपके संग
मेहनत के लम्हे देवें कामयाबी की दुआएं
घर में दोस्तों में और तमाम रिश्तेदारों में
आपके आसमान छूने की खूब चले चर्चाये
अव्वल तो कोई दर्द-ओ-गम ना मिले आपको
अगर मिलता है तो वो मेरी और सरक जाएँ
चेहरे की चमक बढ़े चांदनी सा बिखरे नाम
बेचैन मेरे महबूब के हक में चले हवाए
Tuesday, 20 December 2011
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो
मेरे भीतर के शैतान से यारी कर लो
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो
चेहरा बोल देगा मन की हर एक बात
आखिर कितनी ही तो हुश्यारी कर लो
जो नसीब में नही है कभी नही मिलेगा
तुम कितनी ही दोस्त मारामारी कर लो
नही घेरते है जब तक मुझे ऐब रिश्तेदारों
कितनी ही मेरे घर पर बमबारी कर लो
चंदा लेने आ रही है सियासत आपके द्वार
बचना है तो खुद को खदरधारी कर लो
मन में छिपा शख्स बाहर जरुर झांकेगा
तुम कितनी भी बेचैन कलाकारी कर लो
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो
चेहरा बोल देगा मन की हर एक बात
आखिर कितनी ही तो हुश्यारी कर लो
जो नसीब में नही है कभी नही मिलेगा
तुम कितनी ही दोस्त मारामारी कर लो
नही घेरते है जब तक मुझे ऐब रिश्तेदारों
कितनी ही मेरे घर पर बमबारी कर लो
चंदा लेने आ रही है सियासत आपके द्वार
बचना है तो खुद को खदरधारी कर लो
मन में छिपा शख्स बाहर जरुर झांकेगा
तुम कितनी भी बेचैन कलाकारी कर लो
Sunday, 18 December 2011
होती मेरी माँ तो आज मुझे खूब धमकाती
होती मेरी माँ तो आज मुझे खूब धमकाती
दर्दे इश्क में पड़कर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
खून के आंसू रुलायेगे तुझे तेरे ही असआर
शायरी में धंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
आसमां की और थूकोगे तो मुहं पर गिरेगा
दूसरो पर हंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
तेरी दीवानगी और पागलपन कौन सराहेगा
जिंदगी से बचकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
झटके में लगा दे होश ठिकाने जिंदगी के
टुकडो में बंटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
कयामत तक कोई नही याद रखेगा तुझको
जमाने से कटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
भूल जा बेचैन किसने क्या कहा था तुझको
बातों से लिपटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
दर्दे इश्क में पड़कर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
खून के आंसू रुलायेगे तुझे तेरे ही असआर
शायरी में धंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
आसमां की और थूकोगे तो मुहं पर गिरेगा
दूसरो पर हंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
तेरी दीवानगी और पागलपन कौन सराहेगा
जिंदगी से बचकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
झटके में लगा दे होश ठिकाने जिंदगी के
टुकडो में बंटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
कयामत तक कोई नही याद रखेगा तुझको
जमाने से कटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
भूल जा बेचैन किसने क्या कहा था तुझको
बातों से लिपटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया
मैं उससे कभी मिलने की कोशिश ना करूंगा
कमबख्त ज़ज्बात में मुझसे हामी भरा गया
पानी की जगह शराब में मिला रहा हूँ आंसू
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया
यही सोचकर कर लिया उसने मुझसे किनारा
कहाँ किस सरफिरे का उस पर दिल आ गया
जल्दी से आकर रख बेचैन हाथ मेरे दिल पर
आँखों के सामने यह कैसा अन्धेरा छा गया
उसकी चालाकी है या वक्त की नजाकत बेचैन
मुझसे बात बातों में ज़ालिम पीछा छुड़ा गया
कमबख्त ज़ज्बात में मुझसे हामी भरा गया
पानी की जगह शराब में मिला रहा हूँ आंसू
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया
यही सोचकर कर लिया उसने मुझसे किनारा
कहाँ किस सरफिरे का उस पर दिल आ गया
जल्दी से आकर रख बेचैन हाथ मेरे दिल पर
आँखों के सामने यह कैसा अन्धेरा छा गया
उसकी चालाकी है या वक्त की नजाकत बेचैन
मुझसे बात बातों में ज़ालिम पीछा छुड़ा गया
दिल का मसला तो मुझसे ही सुलझेगा
दिल का मसला तो मुझसे ही सुलझेगा
सत्संग में जाकर वक्त खराब ना कीजे
नसीब में लिखा है तो हो जायेगा मिलन
बैठ के बेकार जुदाई का हिसाब ना कीजे
सोचने से पहले लोग फसाना बना देंगे
मुझको देख कर आँखें पुर आब ना कीजे
आबरू और समाज पर पड़ जाए महंगी
कभी भी ऐसी हरकत मेरे जनाब ना कीजे
सब घड़ी भर की बेकरारी होती है बेचैन
आप अपने आपको इतना बेताब ना कीजे
सत्संग में जाकर वक्त खराब ना कीजे
नसीब में लिखा है तो हो जायेगा मिलन
बैठ के बेकार जुदाई का हिसाब ना कीजे
सोचने से पहले लोग फसाना बना देंगे
मुझको देख कर आँखें पुर आब ना कीजे
आबरू और समाज पर पड़ जाए महंगी
कभी भी ऐसी हरकत मेरे जनाब ना कीजे
सब घड़ी भर की बेकरारी होती है बेचैन
आप अपने आपको इतना बेताब ना कीजे
Saturday, 17 December 2011
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है
जोशे जवानी में ना तुम आओ ना हम आये
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है
कमीनी है दुनिया साथ साथ रहने नही देगी
चलो मन ही मन आपस में इजहार करते है
हम बिस्तर पकड़ लेंगे तो ख्याल खूब घेरेंगे
आज से थोडा थोडा खुद को बीमार करते है
इश्क में उन्ही के हिस्से में आती है शर्मिंदगी
जो खुद को हद से ज्यादा होशियार करते है
उनको हर हाल में होता है उनको घाटा बेचैन
अक्सर दिल लेने देने का जो व्यपार करते है
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है
कमीनी है दुनिया साथ साथ रहने नही देगी
चलो मन ही मन आपस में इजहार करते है
हम बिस्तर पकड़ लेंगे तो ख्याल खूब घेरेंगे
आज से थोडा थोडा खुद को बीमार करते है
इश्क में उन्ही के हिस्से में आती है शर्मिंदगी
जो खुद को हद से ज्यादा होशियार करते है
उनको हर हाल में होता है उनको घाटा बेचैन
अक्सर दिल लेने देने का जो व्यपार करते है
अपनी माँ को भी इतना ही चाहता था
अपनी माँ को भी इतना ही चाहता था
मैं जितना आज तुझसे प्यार करता हूँ
इससे पहले की लोग मुझे कहे दीवाना
मैं खुद सरे महफ़िल इकरार करता हूँ
तुम्ही कहो किसकी कसम खाकर कहू
मैं जन्मों से तुम्हारा इंतजार करता हूँ
डूब सा जाता हूँ आखों की गहराइयों में
तेरी तस्वीर का मैं जब दीदार करता हूँ
इसीलिए तो जीतूँगा दिल की बाज़ी बेचैन
खुद से जियादा तुम पर एतबार करता हूँ
मैं जितना आज तुझसे प्यार करता हूँ
इससे पहले की लोग मुझे कहे दीवाना
मैं खुद सरे महफ़िल इकरार करता हूँ
तुम्ही कहो किसकी कसम खाकर कहू
मैं जन्मों से तुम्हारा इंतजार करता हूँ
डूब सा जाता हूँ आखों की गहराइयों में
तेरी तस्वीर का मैं जब दीदार करता हूँ
इसीलिए तो जीतूँगा दिल की बाज़ी बेचैन
खुद से जियादा तुम पर एतबार करता हूँ
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