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Saturday, 12 May 2012

क्या दूं तुझको अब पैग का हिसाब मेरी जान

दिमाग खराब हो या तेरी याद सताती हो
बस मैं उसी दिन पीता हूँ शराब मेरी जान

गुस्से में तो बोतल के ही मुह लगा लेता हूँ
क्या दूं तुझको अब पैग का हिसाब मेरी जान

सवालों के घेरे में आ गया हो प्यार जिसका
वो बेचारा क्या देगा बता जवाब मेरी जान

नशे की नही बात पूरे होश में कह रहा हूँ
तेरे लबों आगे कुछ नही गुलाब मेरी जान

तू मुस्कुराकर दे रहा है मुझे जाम पर जाम
बस यही आते है आजकल ख्वाब मेरी जान

इसलिए लगाता हूँ पटियाला पैग अक्सर
बेहद ही तो पसंद है मुझे पंजाब मेरी जान

जिसने कभी ना पी वही बदनामी करता है
वरना नही है बेचैन मय खराब मेरी जान

Friday, 11 May 2012

आग तू है तो मैं धुंआ हूँ तेरा

मेरी सांसो से तू निकलकर दिखा
बिन मेरे अ शमा तू पिंघलकर दिखा

ले आया हूँ तुझे इतनी दूर मैं
बिन मेरे दो कदम अब चलकर दिखा

मैं नमी बनकर आँखों में छिप गया
सुर्ख हो जाएगी आँख मलकर दिखा

बिन मेरे लडखडायेगा मयख्वार सा
मैं नही हूँ नशा तो सम्भलकर दिखा

रम चुका हूँ तुम्हारी फितरत में मैं
अपनी आदत से अब तू फिसलकर दिखा

मैं हाथों की रेखाओ में उभर रहा हूँ
तू विधाता का लिखा बदलकर दिखा

आग तू है तो मैं धुंआ हूँ तेरा
बिन मेरे तू बेचैन जलकर दिखा



Tuesday, 8 May 2012

तेरा भी हिस्सा है जमाने की खुशियों में


तैश में आने से रंग काला पड़ जाता है
गुस्से से मेरी जान तू किनारा किया कर

पहले ही गर्मी ने परेशानी बढ़ा रखी है
ठंडे दिमाग से थोडा गुज़ारा किया कर

जो बात मेरी तुझको नागवार लगती है
नही कहूँगा थोडा बस इशारा किया कर

यूं भी तेरी जुदाई में कमजोर हो गया हूं
नाराज होकर ना मुझे छुहारा किया कर

भटकते ही कमबख्त दूर निकल जाते है
तू ज़ज्बात मेरे ना यूं आवारा किया कर

कौन सी रोजाना फरमाइस करता हूँ मैं
चाहे हफ्ते में ही भला हमारा किया कर

तेरा भी हिस्सा है जमाने की खुशियों में
बेचैन सोच में शामिल जहाँ सारा किया कर

Sunday, 6 May 2012

तुमको तुम्हारी इक खता ने डूबोया है

मुझको जैसे मेरी वफा ने डूबोया है
तुमको तुम्हारी इक खता ने डूबोया है

हरेक मौज चिल्लाकर गवाही दे रही है
 कश्ती को यारों नाखुदा ने डूबोया है

मरने के बाद भी जिसे जिन्दा रहना था
उस अहसास को तो दगा ने डूबोया है

पत्थर पूजने का हश्र मालूम हुआ जब से
रो रहा हूँ मुझको श्रद्धा ने डूबोया है

बाप पर तो इल्ज़ाम लगा भी दोगे मगर
किस मुह से कहोगे मुझे माँ ने डूबोया है

सच्ची होती तो शायद जी लेता कुछ दिन
मुझे तुम्हारी झूठी अदा ने डूबोया है

घुटनों के बल ही चला था प्यार अभी बेचैन
जिसको तुम्हारे डर की सदा ने डूबोया है

जो कोई चाँद से मुखड़े को धोखा देगा

यकीनन होगा वो शख्स उल्लू का पट्ठा
जो कोई चाँद से मुखड़े को धोखा देगा

एकदम सीधी सी बात है इश्क में यारों
जो दिल नही दे पाया वो और क्या देगा

जियादा दिन नही चलती झूठी अदाकारी
सच आकर एक दिन तो पर्दा गिरा देगा

प्यार में जरूरत नही फालतू मुखबरी की
बातों का अंदाज़ ही सब कुछ बता देगा

अब क्या कहे उसकी होश्यारी बेचैन
ना सोचा था वो ऐसे बात को घुमा देगा

Friday, 4 May 2012

दिलो दिमाग पर भारी लुत्फे वस्ल क्यूं है

सोचता हूँ नसीब में इतने बल क्यूं है
जीस्त बेवफा तो बावफा अजल क्यूं है

दिल ने तो बुरा चाहा ही नही किसी का
फिर सीने में किसी खौफ की हलचल क्यूं है

वो शख्स जो मेरा कभी हुआ ही ना था
उसकी याद में मेरी आँखें सजल क्यूं है

आंसू भी तो किसी झील की पैदाइश है
फिर इतना मशहूर दुनिया में कमल क्यूं है

हिज्र से भी तो याराना रहा है बरसों
दिलो दिमाग पर भारी लुत्फे वस्ल क्यूं है

अपनों में शामिल और भी तो है बेचैन
फिर तू ही मेरे सब मसलो का हल क्यूं है

ज़ीस्त= जिंदगी   अजल = मौत 
 लुत्फे वस्ल= मिलन का आनंद

उसके पसीने में भी खुशबू आती है

दोस्तों दौर सचमुच कलयुगी आ गया
मैं मुस्कुराया तो वो गाली सुना गया

बच्चे जवान बूढ़े सब पर शक करते है
हुस्नवालों को भ्रम का कीड़ा खा गया

शरीफों को लल्लू समझती है लडकियाँ
कल रात मुझे मेरा महबूब बता गया

देखा जब बिल्लियों को आपस में लड़ते
सच कहता हूँ मुझे तो चक्कर आ गया

पायजामा तक जिसे न पहनना आता था
पड़ा इश्क में तो कमबख्त जींस फसा गया

उसके पसीने में भी खुशबू आती है
पहचान बस बेचैन इतनी बता गया

Thursday, 3 May 2012

उसके सच में भी दोस्तों सफाई नजर आती है

आदमी की हालत जब तमाशाई नजर आती है
उसके सच में भी दोस्तों सफाई नजर आती है

जिसके जो दिल में आये उसी नजर से देखे
गरीब की जोरू सबको लुगाई नजर आती है

सब रसूखदारों से याराना रखने की सजा है
मजबूरी भी यहाँ पर बेवफाई नजर आती है

लोगो के लिए वही तो है असली मजे की जड़
रिश्तेदारों के बीच में जो खाई नजर आती है

माँ बाप की फ़िक्र है यह और कुछ नही यारों
बेटे के शौक में भी जो बुराई नजर आती है

चाँद के पार ले जायेगा तू उसको बेचैन
औकात देखकर तो बातें हवाई नजर आती है



Wednesday, 2 May 2012

हर वक्त खुले रहते है क्यूं गेसू तुम्हारे


हर वक्त खुले रहते है क्यूं गेसू तुम्हारे
किसके लहू से धोने की कसम खाई है

बस इतना जान ले मस्त होने से पहले
 जानलेवा मेरी जान तेरी अंगडाई है

जिस अदा से फेरी तुमने जीभ होठों पर
आज सौ फीसदी किसी की शामत आई है

बेशक नसीब-ओ-हालत लाख बिगड़ जाये
हमने तो तेरा होने की कसम खाई है

मत लगाया कर आँखों में सुरमा बेचैन
पहले ही इन आँखों में बहुत गहराई है

Sunday, 29 April 2012

तुझसे बिछड़ा तो जीते जी मर जाऊंगा


मैं जान दे दूंगा या तुझको पाऊंगा
तुझसे बिछड़ा तो जीते जी मर जाऊंगा

तीसरे दिन मेरा इंतिहान ना ले तू
तैश में जान कभी हद से गुजर जाऊंगा

मेरी हिम्मत है तू हमकदम बनके चल
कामयाबी को मैं बाँहों में भर जाऊंगा

अपनी आँखों में मुझको झाँकने तो दे
मेरा दावा है मैं भी संवर जाऊंगा

पढके रोयेंगे प्यार करने वाले सब
बेबसी लेके गजलो में उतर जाऊंगा

तेरे दामन पे गिरी ओंस की बूँद हूँ
छूकर देखो उंगली पे बिखर जाऊंगा

बन गया है तू मेरी कमजोरी बेचैन
छोड़ उम्मीद मेरी जान सुधर जाऊंगा


Friday, 27 April 2012

भला देखने वाला क्या आँखें फुडवाएगा


जब अदाओं के साथ हुस्न यूं पेश आएगा
भला देखने वाला क्या आँखें फुडवाएगा

बाकायदा मालूम है हलवाई को ये बात
जिसके नसीब में है मिठाई वो खाएगा

कलेजा मुह को आ गया है तस्वीर देखकर
क्या होगा गर तू रूबरू गौर फरमाएगा

अगर हो सके तो छोड़ ये अंदाज़ कतिलाने
वरना आशिको को आपस में भिडवाएगा

मजाक की सौ बातें मगर यह सच है बेचैन
मेरा महबूब  देख तू भी शरमा जाएगा

Thursday, 26 April 2012

जिंदगी तबाह करके इंतिहान ना दे


अपनी इक जिद के पीछे जान ना दे
जिंदगी तबाह करके इंतिहान ना दे

गलत फैंसला तो गलत ही होता है
तू करके जिरह कोई भी बयान ना दे

खुद ही कातिल है तू अपने वजूद का
इल्जाम वक्त के सर मेरी जान ना दे

डरता हूँ ले न जाए बहाकर तुझको
अपने सीने में कोई तूफ़ान ना दे

इंतजार की भी आखिर हद होती है
तू पछताने का खुद को सामान ना दे

आदत पड़ गई तो फिर छूट ना सकेगी
लबो को रोजाना झूठी मुस्कान ना दे

कोई भी मजबूरी नही कहती बेचैन
अपने हिस्से का खुद को आसमान ना दे

Wednesday, 25 April 2012

वो पांचवे दिन वस्ल का वादा कर गया


जिंदगी चार दिन की है कसमकश में हूँ
वो पांचवे दिन वस्ल का वादा कर गया

दिखाकर ख्वाब अगले जन्म का कमबख्त
अहसानमंद मुझको कुछ ज्यादा कर गया

जुल्फों की ज्यूं बातें भी पेंचभरी लगी
वो मना बेशक बे इरादा कर गया

महोब्बत में सच से जिसने गुरेज़ किया
फना उन्हें झूठ का लबादा कर गया

मैं उमर भर जिससे बचता आया था
सद हैफ वो काम दिले-नादां कर गया

औलाद के नाम तकदीर विरासत में
बताओ किसका बाप दादा कर गया

बदनसीबी तो देख राजा की बेचैन
रानी को बस मे एक प्यादा कर गया

वस्ल=मिलन
पेंचभरी=उलझी ,,, सद हैफ = सौ बार अफ़सोस

Tuesday, 24 April 2012

जिंदगी मैं तेरा एतबार तो बन सकता हूँ


हमसफर न सही गमख्वार तो बन सकता हूँ
जिंदगी मैं तेरा एतबार तो बन सकता हूँ

फूलों जितनी अहमियत शायद न हो मेरी
कांटा निकालने वाला खार तो बन सकता हूँ

पाऊँगा तुमको कभी तू जाने या नसीब
मगर तेरा मैं तलबगार तो बन सकता हूँ

हकीकत में तो शायद मेरी औकात ना हो
ख्वाबो में बसा किरदार तो बन सकता हूँ

तू जिसे चाहेगा प्यार तो उसे देगा बेचैन
नफरत का पर मैं हकदार तो बन सकता हूँ

Monday, 23 April 2012


पागल था जनूनी था ना जाने क्या था
वो शख्स दीवानगी की तस्वीरे निहा था

महफ़िल में उसे देखकर हंस रहे  थे सभी
लेकिन मैं उसके दर्द के रूबरू बैठा था

हैरान हुआ आशिक का रोना देख कर
आंसुओ में उसके महबूब का चेहरा था

तुम तो उसकी महफ़िल में सारी रात थे
बता तो सही जिक्र मेरा कैसे चला था

दौरे अलम में जिसने साथ दिया बेचैन
वो शख्स मेरी नजर में एक मसीहा था

तुमको माँ जैसी दुआओं का असर मिलेगा
सजदे में तेरे आशिक का जब सर मिलेगा

शक्ल का क्या ये तो जन्मजात झूठी होती है
मेहनत का समर तो करम देखकर मिलेगा

तुम्हारी कसम मंजिल को दुल्हन बना लूँगा
तुम्हारा प्यार गर मुझको उम्र भर मिलेगा

तंज़ कसना जिनकी फितरत में शामिल हो चुका
उन हाथों में सदा दोस्तों पत्थर मिलेगा

दुःख आने से पहले ही दुखी मत हो बेचैन
हरेक काम में वरना तुझे एक डर मिलेगा

इश्क तूने क्या से क्या मंजर दिखा दिए

इश्क तूने क्या से क्या मंजर दिखा दिए
सब के सब करेले नीम पर चढ़ा दिए

लानत तेरे धडकने पर अ कमबख्त दिल
नई पीढ़ी के तुमने दिमाग सड़ा दिए

अपनी तो समझ से है बाहर माज़रा  
भैन्गों ने भी नजरों के पेंच लड़ा दिए

क्या ख़ाक मजा ले घुड़दौड़ का जनाब
हाथी घोड़े ऊंट एक साथ दौड़ा दिए

मरकर भी बेचैन लोग याद रखते है
महबूब ने जो हंसकर सबक सीखा दिए

गुलों की खुशबू जिस्म में पुरजोर लाये हो



इतनी  सादगी कहाँ से बटोर लायें हो
लगता है खुदा के यहाँ से चोर लाये हो

शर्मों-हया से पलकें झुका कर चलना
हंसने की अदा काबिले गौर लाये हो

क्यूंकर ना परेशां हो देखकर वो चाँद
जुल्फों के साए में चेहरा चकोर लाये हो

देखकर महफ़िल में हर कोई कह रहा है
जुल्फें नही ज़ालिम रेशम की डोर लाये हो

सुनते ही लगे झूमने लोग होकर दीवाने
सावन के महीने का पायल में शोर लाये हो

हर कोई तुम्हारी और खिंचा जा रहा है
गुलों की खुशबू जिस्म में पुरजोर लाये हो

क्यूंकर ना बढ़े धडकने देखकर बेचैन
तवज्जो आज अपना मेरी ओर लाये हो

हां आज भी मैं गरीबी से प्यार करता हूँ



मुफलिसी मेरी माँ थी स्वीकार करता हूँ
हां आज भी मैं गरीबी से प्यार करता हूँ

ज्यादा बड़ा अब भी वजूद नही है मेरा
फिर भी छोटा होने का इकरार करता हूँ

औकात की बात आप न करो तो अच्छा
मैं हैसियत वालों पे कम एतबार करता हूँ

शोहरत और दौलत मेरी नौकरानी होगी
मैं मन ही मन दोस्तों इंतजार करता हूँ

लगाकर दिल काँटों से कभी कभी बेचैन
मैं फूलों को भी अक्सर शर्मसार करता हूँ

एक प्यार स्कूली को खड़ा सामने पाता हूँ



बचपन से जवानी तक जब नजरें दौड़ाता हूँ
एक प्यार स्कूली को खड़ा सामने पाता हूँ

नही भूला हूँ दोनों ही हम उमर के कच्चे थे
अहसास में पर यारों हम बिलकुल सच्चे थे
बंद करता हूँ जब आँखें कही खो सा जाता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

उस जैसी सादगी और मुस्कान नही देखी
कहने को तो दुनिया में खूब निगाह फेंकी
हाय उसकी नजाकत पर सर को झुकाता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

रातों को उठ उठ कर मैंने रोकर भी देखा हैं
तन्हाइयों में सिसकी का होकर भी देखा हैं
नहीं कुछ भी हुआ हासिल यारों पछताता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

कितना ही मेरे दाता मेरे हिस्से कयामत दे
याददाश्त को भी बेशक कोई भी आफत दे
पर पाठ महोब्बत का नही भूलना चाहता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

नही बात अकेले की मैं सबकी करता हूँ
इल्जाम महोब्बत का हर सर पे धरता हूँ
यहाँ बेचैन हैं हर कोई सरेआम बताता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................


दुश्मन ही मेरा हिसाब रखते




मुझे मुनीमों की क्या जरूरत
दुश्मन ही मेरा हिसाब रखते

अपने जरूरी काम भूलकर भी
याद मेरा वो हर ख्वाब रखते

हो चाहे चुगली बनाम बेशक
वो चर्चा मेरी बेहिसाब रखते

नशे की हद तक गुजरते है वो
जो जाम के संग कबाब रखते

ना यादें इतना महकती उनकी
ना किताबों में जो गुलाब रखते

निहाल होते डूबकर दोनों बेचैन
जो नसीब में कोई चनाब रखते

पीने के बाद हनुमान बन जाता हूँ

 पीने के बाद हनुमान बन जाता हूँ
अपने मोहल्ले की शान बन जाता हूँ

मैं खूब खोलता हूँ पोल पड़ोसियों की
जब सच बोलने की खान बन जाता हूँ

जब लगाते है लोग शर्त मेरे होश पर
तब मैं गीता और कुरआन बन जाता हूँ

कर के देखो मुझसे किसी बात पर बहस
नशे में जहाँ भर का मैं ज्ञान बन जाता है

देता हूँ बेचैन ऊंचाई छोटे भाई को मैं
जाम लगाकर जब आसमान बन जाता हूँ

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क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में

मैं जकड़ा हुआ हूँ हालात की जंजीर में
क्या खोजती हो रोजाना मुझ फकीर में

मैं जिंदगी के सर्कस का जोकर हूँ जान
नही लिखवाकर लाया हंसना तकदीर में

मैं नही हूँ तुम्हारे ख्वाबो का शहजादा
मत बर्बाद कीजियेगा वक्त इस कबीर में

कैसे लूं तुझे बाँहों में भरने का ख्वाब
जब दिख नही रही तुम हाथों की लकीर में

होकर बेचैन दम तोड़ता है तो तोड़ने दो
मत तरस खाना अपनी जुल्फों के असीर में
असीर= कैदी



 



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क्या बताऊ क्या आज तेरे दीवाने का मन है


क्या बताऊ क्या आज तेरे दीवाने का मन है
बीच सफर से चुपचाप लौट जाने का मन है

थक कर चूर हो गया हूँ खुद से लड़ते -लड़ते
हार को आज तो गले लगाने का मन है

हाँ सबको रास थोड़े ही आती है महोब्बत
दिलों-दिमाग में यह बात बिठाने का मन है

ओढ़कर गुमनामी दूर बहुत दूर निकल जाऊ
बेदर्दी दुनिया में फिर कभी ना आने का मन है

बात सच्ची कहू तो आज पहली बार बेचैन
उसे क्यूं जान बनाया पछताने का मन है

बता किस रोज मेरे बारे में सोचा तुमने


हमेशा बाज़ बनकर ज़हन को दबोचा तुमने
बता किस रोज मेरे बारे में सोचा तुमने

खुद ही चुप हुआ हूँ हर बार सुबकिया लेकर
अफ़सोस मेरे आंसुओ को ना पोंछा तुमने

भरने लगे जब भी मेरी उदासियों के जख्म
जानबूझ कर अक्सर उनको खरोचा तुमने

लहू से सना हुआ दिल दिया था मैंने तुझको
मांस का टुकड़ा समझ चील सा नोचा तुमने

ये सिला मिला मुझको चाहत का बेचैन
मेरी दीवानगी को बता दिया ओछा तुमने

या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ

उसे उल्टा सीधा बोलकर खूब रोता हूँ
या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ

शीशे की तरह साफ़ है इश्क के हालात
फिर भी रोज नये ख्वाब क्यूं संजोता हूँ

तेरी याद में मंगल वीर सब एक समान
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ

मुस्कुराना अपनी जगह मगर सच है यह
आजकल चैन की नींद नही सोता हूँ

अब भी वही जवाब है उसका बेचैन
मैं ही सवालातों का बोझ ढोता हूँ

तेल लेने गया प्यार आज से

तेल लेने गया प्यार आज से
रंगीन रखूंगा विचार आज से

खूब करूंगा अब दबकर आशिकी
नही डर किसी का यार आज से

सुना है हीरोइन के फोटो छपते है
देखा करूंगा अखबार आज से

हसीनो के लिए धड़केगा दिल
बनूंगा पक्का दिलदार आज से

इश्कबाजी अब नगद बेचैन
कर दी है बंद उधार आज से

मैं काटकर जुबां दे दूं तो भी कम है


तेरे अहसान में इतना बड़ा दम है
मैं काटकर जुबां दे दूं तो भी कम है

वरना तो शक होता था अपने आप पर
तुझे पाया तो लगा मेरे अच्छे कर्म है

... क्यूं नही होगा तेरा रोजाना दीदार
जान सोच सोच कर मेरी आँखे नम है

देखना मैं भी साथ दूंगा और किस्मत भी
तेरे साथ बुरा होगा यह मन का भ्रम है

अपना तो गणित यही कहता है बेचैन
करोड़ो में तुम जैसे कुछेक ही सनम है

मैं खा गया हूँ महोब्बत की कसम मेरी जान


मैं खा गया हूँ महोब्बत की कसम मेरी जान
इस जन्म में तुझसे कभी अब बात ना करूंगा

यूं तो तुझसे बिछड़कर रोना है उम्र भर मगर
तुम्हारे लिए अब अश्को की बरसात ना करूंगा

ढलते ही साँझ चुपचाप सो जाया करूंगा कल से
तेरी याद में कभी काली अब रात ना करूंगा

बुरा हो सोच का चाँद छूने की तमन्ना कर बैठा
आइन्दा मैं कभी इतनी बड़ी औकात ना करूंगा

निजात मिल गई मुझको भी अब माथा रगड़ने से
बेचैन मन्दिरों में जाकर अब मुनाजात ना करूंगा

मुनाजात== प्रार्थना

कुछ लोगों को है मुफ्त में सलाह जारी



कुछ लोगों को है मुफ्त में सलाह जारी
वो कमीनापन छोड़ दे या रिश्तेदारी

अपनेपन की जिसमे बू तक भी नही हो
हम किसलिए करें उनकी खातिरदारी

सिक्के के पहलू ही देखे है बचपन से
खूब समझ आती है मुझे दुनियादारी

थपेड़े वक्त के खाए तो कुछ ज्ञान हुआ
नही धूप में सफेद हुई जुल्फें हमारी

 कौन पूछता था मूंग मसूर की दाल
 वक्त की हुई बेचैन ऐसी तैसी सारी

मन को जिस दिन से समझाया है


मन को जिस दिन से समझाया है
माँ कसम जीने का मजा आया है

भूख प्यास भी वक्त पर लगने लगी है
हमने भ्रम का जब से पर्दा गिराया है

भाड़ में जाए अब महोब्बत के वादे
हमने दिल की दिवार पर लिखवाया है

देख कहने लगे थे मोहल्ले वाले सब
बेचारे पर किसी चुड़ैल का साया है

मैं सेहत पर दूंगा अब गौर बेचैन
कमबख्त ने बहुत ही खून जलाया है

प्यास को उसके हिस्से का पानी दे दे


तू फिर से मेरी तबियत में रवानी दे दे
प्यास को उसके हिस्से का पानी दे दे

जीते जी तो नही मरने के बाद ही सही
तुझे भी प्यार था मुझे बदगुमानी दे दे

कम से कम रूह तो भटकने से बच जाएगी
मेरे कफन वास्ते अपना चुनर धानी दे दे

पहले भी देर सवेर तू देता आया है
आज फिर से मुझे अपनी मेहरबानी दे दे

नही मांगता कुछ भी नया तुझसे बेचैन
मुझको मेरी वही दास्तान पुरानी दे दे

प्यार है तू मेरा अफ़सोस नही


दिल तेरी याद में सुबकता है
आके चुप क्यूं नही तू करवाता

दम निकलने को है तुम्हारी कसम
है आखरी पल क्यूं नही तू आता

मैं बिखर जाऊंगा खुशबू की तरह
ता-उम्र रहियों फिर तू पछताता

तुझको चाहा यही है जुर्म मेरा
इस खता की सज़ा तो दे जाता

रोज कहता है आईने से जो
काश मुझसे कभी तू कह पाता

प्यार है तू मेरा अफ़सोस नही
आ जाता तो मैं तुझको समझाता

आहें बेचैन सुनता जो मेरी
जाके मन्दिर में आंसू छलकाता

जिंदगी तू जो नही हासिल तो मरने दे मुझे


अपनी आँखों के समन्दर में उतरने दे मुझे
जिंदगी तू जो नही हासिल तो मरने दे मुझे

लडखडाने को तो बाकि है उम्र भर का सफर
प्यार का पहला कदम ढंग से तो धरने दे मुझे

तुझको पाना ही तो बाकि है अब ख्वाब मेरा
ख्वाब से थोड़ी सी मिन्नत तो करने दे मुझे

इस कदर होती है खूबसूरती मालूम ना था
सामने आ गये हो तो देख जी भरने दे मुझे

अच्छे खासे इंसा को हां तुमने बेचैन किया
गलती किसकी है सोच से तो गुजरने दे मुझे

भीड़ से आया था लौटकर भीड़ में ही जा रहा हूँ


भीड़ से आया था लौटकर भीड़ में ही जा रहा हूँ
मैं सदा के लिए तुझको मेरी जान भूला रहा हूँ

दिल में ज्यादा तो नही दर्द मगर इतनी सी कसक है
मैं अपने आप से अबकी बार धोखा खा रहा हूँ

हो सके तो मुआफ करना मेरी तमाम गलतियों को
अपने आज तक के किये पर मैं खूब पछता रहा हूँ

छोड़ दिया वक्त पर मैंने अपनी हालत का फैंसला
मालूम नही कल का फिलहाल आंसू बहा रहा हूँ

बार बार चोट मारी है तुमने वजूद पर बेचैन
मैं जख्मी हालत अपनी इसलिए भी छिपा रहा हूं

उभरे है तेरे रुख पर किस नादानी के मुहांसे


उभरे है तेरे रुख पर किस नादानी के मुहांसे
मच्छरों ने काट खाया या है जवानी के मुहांसे

चेहरा मन का आइना है  क्या क्या छिपाओगे
छोड़ते है निशान अक्सर कारस्तानी के मुहांसे

हाँ रखते है लेखा जोखा हर अच्छे और बुरे का
खोलते है पोल चिल्लाकर प्रेम कहानी के मुहांसे

बस यही तो चाहता है दुनिया का हरेक दीवाना
मिट जाये जड़ से पल में मेरी रानी के मुहांसे

छिपा नही पता है उसे अच्छे से अच्छा मैकअप
अलग दिख जाते है बेचैन परेशानी के मुहांसे









Sunday, 22 April 2012

तू फसा तो बताऊंगा क्या चीज़ हूँ साले


मुझे इश्क की सूली पर लटकाने वाले
तू फसा तो बताऊंगा क्या चीज़ हूँ साले

हरेक नौजवान से है यही दरखास्त मेरी
कोई जानबूझ कर प्यार का पंगा ना ले

हर चीज़ में दिखती हो जब सूरत उसकी
खाना तक भी ऐसे में कोई कैसे खा ले

सच्ची महोब्बत है और वो नाराज तुझसे
अगर माँ का दूध पीया है तो मुस्कुरा ले

बार बार यही गुजारिस करता है बेचैन
दीवानगी किसी की कोई मजाक में ना ले

Thursday, 19 April 2012

मेरे ख्वाबो की परवाज हो तुम


मेरे ख्वाबो की परवाज हो तुम
जिंदगी किसलिए नाराज हो तुम

गुज़रा वक्त तो मुझे भी याद नही
मगर मेरा कल और आज हो तुम

मैं बेशक शाहशाह नही हूँ मगर
याद रखना मेरी मुमताज़ हो तुम

बिन तेरे मर जाऊंगा तडफ कर
मेरे दर्दे दिल का इलाज़ हो तुम

पाप मन का तेरे आगे रख दिया
मेरी उम्र भर का हमराज हो तुम

इक तेरे ही तो दम पर गूंज है
मेरी जुबां मेरी आवाज़ हो तुम

नही है कोई तुझ जैसा जहाँ में
बेचैन कर दे वो अंदाज़ हो तुम

Friday, 23 March 2012

खुदा और बढ़ाए नूर तेरे रुखसार का

ना कम हो कभी गुलाबी रंग बहार का
खुदा और बढ़ाए नूर तेरे रुखसार का

पड़ते रहे हमेशा हंसते वक्त डिम्पल
यूं ही जले जी तुझे देखकर गुलज़ार का

हर दुआ के बाद यह दुआ मांगता हूँ
शकून मिले तुझको सारे संसार का

बस इतनी सी है उम्मीद शायरी से
असर हो उसपे किसी भी अशआर का


इश्क ने यही तो सीखाया है बेचैन
दिल देना खेल ही समझो दिलदार का

Thursday, 22 March 2012

माता रानी सबको फल दे

माता रानी सबको फल दे
आज नही तो चाहे कल दे

देखकर के खुशियाँ आपकी
गम चुपचाप उठकर चल दे

सौ फीसदी शोहरत मिलेगी
आप चढ़ते सूरज को जल दे

कुछ मत देना जान मुझे पर
रोज कलम को एक गजल दे

माँ मैं बेशक बेचैन रहू
उसके माथे पर ना बल दे

अच्छा नही है इंसान का बाज़ होना

इक शख्स से मुझको बदला लेना है
कोई तो सीखा दे मुझे नाराज होना

रिश्तो पर नजर तो रखे मगर हद में
अच्छा नही है इंसान का बाज़ होना

जमाने की तरह दे दूं धोखा मगर
मैं चाहता ही नही दगाबाज़ होना

सब दौलत के ही बूते की बात है
कौन सी महाभारत है ताज होना 

बता कैसे होगा कल वो सब बेचैन
जो तकदीर में लिखा है आज होना

Tuesday, 20 March 2012

मगर मुझे तुम्हारी आँखों में तन्हाई नजर आई

 देखने वालों को झील सी गहराई नजर आई
मगर मुझे तुम्हारी आँखों में तन्हाई नजर आई

चाहकर भी नही लिख पाया अशआर कोई झूठा
वरना कह सकता था आँखे सुरमाई नजर आई

हां बड़े से बड़े दर्द छुपा सकती है पलकों तले
इस मामले में आँखें करिश्माई नजर आई

बुलंदी तेरे हौसलों की मालूम हुई जब से
तुझसे रश्क रखती तुम्हारी असनाई नजर आई

बताओ क्यूं रखेगा दुनिया से वास्ता बेचैन
तेरी आँखों में ही जब उसे खुदाई नजर आई

Monday, 19 March 2012

आशिक ही नही रास्ते भी शुक्रिया जताते है

तुम्हारी जुल्फों के जो तार बंध नही पाते है
मेरे अरमां है वो जो हवा में लहराते है

मैं तो दूर हूँ कर लूँगा किसी तरह से सब्र
उनका क्या जो तुम्हे रोज देख पछताते है

नही दिखता जहाँ में कोई तुम जैसा दूसरा
हमसे हुस्न के रोजाना कारवां टकराते है

मुस्कुराते हुवे आप जिधर से भी गुजर जाते है
आशिक ही नही रास्ते भी शुक्रिया जताते है


इस जन्म में तुझे पाना कोरा ख्वाब है बेचैन
तेरी तस्वीर देख यूं आंसू निकल आते है

Friday, 16 March 2012

दिल का फिर रोज हिसाब दूं कितनी दफा



एक ही सवाल का मैं जवाब दूं कितनी दफा
बता जिंदगी तुझे मैं ख्वाब दूं कितनी दफा

जिद छोड़ दे बिन बात परेशान होने की
तुझे खुश रखने को गुलाब दूं कितनी दफा

हो सके तो मेरा बन जा सदा के लिए
तुझको वास्ता-ए-सवाब दूं कितनी दफा

तू जानता है मैं रती भर भी बेईमान नही
दिल का फिर रोज हिसाब दूं कितनी दफा

तू समझदार है चल तू ही बता दे आज
बेचैन आँखों को मैं आब दू कितनी दफा

Thursday, 15 March 2012

जिंदगी यूं ही रख आगोश में अपने

मैं जब तलक ना आऊँ होश में अपने
जिंदगी यूं ही रख आगोश में अपने

तूफां में ज्यादा देर ना ठहरने का
कभी मलाल न जुड़े अफ़सोस में अपने

गुफ्तगू का सिलसिला जारी रहे सदा
हरगिज़ ना कमी आये जोश में अपने

तेरी जुस्तजू को जिसकी भी तलाश है
वो सब कुछ पाओगे सरफरोश में अपने

इसलिए रहता हूँ बेचैन हर घड़ी
तुझे रखता हूँ दिल की खरोस में अपने

 

Tuesday, 13 March 2012

लोग शैदा होते है वरना जर के बाईस

वो मुरीद है मेरा मेरे हुनर के बाईस
लोग शैदा होते है वरना जर के बाईस

कबका भूल गया होता घर गाँव का लेकिन
इक पहचान बाकि है सूखे शजर के बाईस

मैं सह नही सकता नशा नींद का लेकिन
रातों जाग सकता हूँ बज्मे सुखनवर के बाईस

कनखियों से घूरकर मुझे क्या देखा तुमने
दिल हो गया बिस्मिल तेगे नजर के बाईस

जर्फ़ वालों की कसौटी से निकला है जुमला
इश्क रोशन है यारों सितमगर के बाईस

बाप होने का हक अदा यूं किया उसने
हो गया नीलाम लख्ते-जिगर के बाईस

आवारगी ने तो कोई कमी न छोड़ी मगर
न हो सका आवारा बेचैन घर  के बाईस

मुरीद=प्रसंशक, बाईस = कारण, शैदा- आशिक ,,जर=धन ,,,शजर- पेड़,,..बज्मे सुखनवर= कवि सम्मेलन ,,,,बिस्मिल= घायल ...तेगे नजर=निगाहों की तलवार....जर्फ़=श्रेष्ठ ....कसोटी=अनुभव ...लख्ते जिगर= दिल का टुकडा























Monday, 12 March 2012

तुम परी हो अंधा भी पहचान लेगा

मैं क्या छोटा बच्चा भी मान लेगा
तुम परी हो अंधा भी पहचान लेगा

सजधज कर कभी बाहर ना निकलना
वरना गाँव पटाने की ठान लेगा

मेरी हंसी पर भी शक जताता है
ज़ालिम तू कितने इंतिहान लेगा

तुझे खुदा से भी बड़ा बना दूंगा 
ज़माना मेरा जब भी बयान लेगा

बस यूं ही बेचैन होकर पूछ रहा हूँ
क्या प्यार में तू मेरी जान लेगा


Sunday, 11 March 2012

बोलो ॐ जय मह्बूबाये





ॐ जय महबूबाये,बोलो ॐ जय मह्बूबाये
प्यार करे जो भी तुझसे, उसपे ना कष्ट आये.......ॐ जय.........

जो ध्यावे तुझे दिल से,उसको प्यार मिले...जानू उसको प्यार मिले...
सोचते ही तुम हो प्रकट ना इंतजार मिले ......ॐ जय.........

सब रिश्तों से बढ़कर तुझे आशिक माने...जानू तुझे आशिक माने
हाय दर दर तुझको ढूंढे तेरे ये दीवाने .......ॐ जय........

तुम हो दिल की धडकन.तुम सांसों में बहते ,,,जानू तुम सांसो में बहते
तुम बिन और ना दूजा मेरे आंसू कहते .......ॐ जय........

तुमको पाकर मैं हंसता तुम्हे खोकर रोऊ,,,जानू तुम्हे खोकर रोऊ,,,
तेरे ही सपनों ने घेरा है जब जब मैं सोऊ.......ॐ जय........

तुम लैला जूलियट और तुम हो हीर मेरी ..जानू तुम हो हीर मेरी...
तुम चाहोगी वही होगा कहे तकदीर मेरी .......ॐ जय........

श्रद्धा भक्ति बनी रहे तेरे प्रति मेरी ..जानू तेरे प्रति मेरी....
सारे भाड़ में जाए रहे ठंडी नजर तेरी .......ॐ जय........

जो महबूबा की आरती सुबहा शाम गाये .,,.यारों सुबह शाम गाये
बेचैन जुदाई की नागिन उसे ना डस पाए .......ॐ जय........




निकल जाएगी बच्चे की जान बेटा

निकल जाएगी बच्चे की जान बेटा
मत ले मेरे और इंतिहान बेटा

रूबरू नही ख्वाब में ही मिला कर
तू मेरा कोई तो कहा मान बेटा

देख कही हाथ में ही ना आ जाये
मेरे मत खींच इतने कान बेटा

देकर दर्दे दिल जोर से हंसता है
मत बनो इतना भी शैतान बेटा

बता मैं तुझे छोड़कर कहाँ जाऊंगा
तू है मेरा धरती आसमान बेटा

तुम पर लिख दी गजल बेचैन होकर
बता अब कोई अच्छा सा उन्वान बेटा

निकल जाएगी बच्चे की जान बेटा

निकल जाएगी बच्चे की जान बेटा
मत ले मेरे और इंतिहान बेटा

रूबरू नही ख्वाब में ही मिला कर
तू मेरा कोई तो कहा मान बेटा

देख कही हाथ में ही ना आ जाये
मेरे मत खींच इतने कान बेटा

देकर दर्दे दिल जोर से हंसता है
मत बनो इतना भी शैतान बेटा

बता मैं तुझे छोड़कर कहाँ जाऊंगा
तू है मेरा धरती आसमान बेटा

तुम पर लिख दी गजल बेचैन होकर
बता अब कोई अच्छा सा उन्वान बेटा