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Saturday, 15 October 2011

तेरी आँख में तस्वीर अपनी क्या देखी



तन भीगने से तुमने बचा लिया बेशक
मन भिगों गई बरसात क्या करूं बता
रह रहकर ख्याल तुम्हारा ही आ रहा हैं
मेरे बस में नही ज़ज्बात क्या करूं बता
कह तो दिया तुम बिन अब जीना क्या
तुम समझते नही बात क्या करूं बता
तेरी आँख में तस्वीर अपनी क्या देखी
छुट गया आईने का साथ क्या करूं बता
तुम दे दो जवाब तो बन जाएँ लाजवाब
वरना हैं वही सवालात क्या करूं बता
इश्क लडाना आता तो बेचैन ना होता
यही पर खाता हूँ मात क्या करूं बता


2 comments:

Sihag Boy said...

Tod Paad diya Sir g aap ne to jmma

Riya said...

laajawaab to aise hi ho gaye aap likh kar ...itna sunder :)