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Tuesday, 6 December 2011
Monday, 5 December 2011
आशु श्योराण के जन्मदिन पर विशेष
जन्मदिन पर कबूल करो मेरी दुआएं
आज से ख़ुशी आपकी गुलाम हो जाये
तंदरुस्ती पर आपका हो जाये कब्जा
फूलों की तरह आप हमेशा मुस्कुराए
दौलत-ओ-शोहरत इतनी मिले आपको
जीते जी कोई भी हिसाब ही न लग पाए
कम से कम सौ मुरादे मन की पूरी हो
ख़्वाबों ख्यालों की दुनिया संवरती जाये
बेचैन है जो आपके नाज़ ओ अंदाज़ से
खुदा उनको चैन कभी भी ना मिल पाए
आज से ख़ुशी आपकी गुलाम हो जाये
तंदरुस्ती पर आपका हो जाये कब्जा
फूलों की तरह आप हमेशा मुस्कुराए
दौलत-ओ-शोहरत इतनी मिले आपको
जीते जी कोई भी हिसाब ही न लग पाए
कम से कम सौ मुरादे मन की पूरी हो
ख़्वाबों ख्यालों की दुनिया संवरती जाये
बेचैन है जो आपके नाज़ ओ अंदाज़ से
खुदा उनको चैन कभी भी ना मिल पाए
कोई माँ जैसा नही खुली चुनौती है
रिश्तों के समन्दर में बहुत से मोती है
कोई माँ जैसा नही खुली चुनौती है
बज्म की असली जान तो वो बन बैठा
चुगली जिस शख्स के नाम पर होती है
जीते जी ना कम होगा यह खजाना
दर्द की दिल के पास तगड़ी फिरौती है
सुबकियों की भाषा तो वही समझेगा
अन्देरे में जिसकी आँखे नूर खोती है
सोचकर देखो मेरे नौजवान यारों
नई पीढ़ी औलाद खातिर क्या बोती है
होगा तेरा भी नाम इक दिन बेचैन
शेरों-सुखन किसके बाप की बपौती है
कोई माँ जैसा नही खुली चुनौती है
बज्म की असली जान तो वो बन बैठा
चुगली जिस शख्स के नाम पर होती है
जीते जी ना कम होगा यह खजाना
दर्द की दिल के पास तगड़ी फिरौती है
सुबकियों की भाषा तो वही समझेगा
अन्देरे में जिसकी आँखे नूर खोती है
सोचकर देखो मेरे नौजवान यारों
नई पीढ़ी औलाद खातिर क्या बोती है
होगा तेरा भी नाम इक दिन बेचैन
शेरों-सुखन किसके बाप की बपौती है
Sunday, 4 December 2011
क्या करू बताओ...सुलझे हुवे आशिकों
दिल में उसका गम है पहलु में बोतल
क्या करू बताओ...सुलझे हुवे आशिकों
अव्वल दर्जे की बकवास निकली महोब्बत
मेरी जां बचाओ .सुलझे हुवे आशिकों
नीलाम ना हो जाये माँ बाप की इज्जत
मुझे राह दिखाओ .सुलझे हुवे आशिकों
तुमको भी कसम है अपने अपने प्यार की
मुझे मुर्ख ना बनाओ सुलझे हुवे आशिकों
क्यूं हो जाता है बेचैन दिल लगाकर इंसा
बात से पर्दा उठाओ सुलझे हुवे आशिकों
क्या करू बताओ...सुलझे हुवे आशिकों
अव्वल दर्जे की बकवास निकली महोब्बत
मेरी जां बचाओ .सुलझे हुवे आशिकों
नीलाम ना हो जाये माँ बाप की इज्जत
मुझे राह दिखाओ .सुलझे हुवे आशिकों
तुमको भी कसम है अपने अपने प्यार की
मुझे मुर्ख ना बनाओ सुलझे हुवे आशिकों
क्यूं हो जाता है बेचैन दिल लगाकर इंसा
बात से पर्दा उठाओ सुलझे हुवे आशिकों
Saturday, 3 December 2011
काश रिश्तेदार सारे एक नाव में हो
काश रिश्तेदार सारे एक नाव में हो
डूब जाये सभी चर्चा पूरे गाँव में हो
मैं आज इससे बड़ी बददुआ क्या दू
रकीब मेरे सभी द्रोपदी से दाँव में हो
ख्याल रखना मौला मेरे मुरीदो का सदा
ना छाला उनके कभी दिल-ओ-पाँव में हो
न औरों को कभी जिसने तवज्जो दिया
उनका जिक्र भी कौवों सी कांव-कांव में हो
कभी मिला खुदा तो यही करूंगा जिक्र
बेचैन ख्वाबों ख्यालों की सभी छांव में हो
डूब जाये सभी चर्चा पूरे गाँव में हो
मैं आज इससे बड़ी बददुआ क्या दू
रकीब मेरे सभी द्रोपदी से दाँव में हो
ख्याल रखना मौला मेरे मुरीदो का सदा
ना छाला उनके कभी दिल-ओ-पाँव में हो
न औरों को कभी जिसने तवज्जो दिया
उनका जिक्र भी कौवों सी कांव-कांव में हो
कभी मिला खुदा तो यही करूंगा जिक्र
बेचैन ख्वाबों ख्यालों की सभी छांव में हो
प्यार इक बार ही होता है बार-बार नही
प्यार इक बार ही होता है बार-बार नही
ये तो अहसास है यारों कोई व्यपार नही
आइना देखने की जिसपे है फुर्सत बाकि
दीवानगी का वो पूरी तरह हकदार नही
दवाब मिलने का महबूब पर जो डालता है
किसी नजर से आशिक वो समझदार नही
नही है दूध से धुला हुआ कोई शख्स यहाँ
ज़ुल्फ़ की जंजीरों में कौन गिरफ्तार नही
चैन उड़ता है सभी का ही बेचैन देर सवेर
आज अपना भी उड़ा है मुझे इनकार नही
ये तो अहसास है यारों कोई व्यपार नही
आइना देखने की जिसपे है फुर्सत बाकि
दीवानगी का वो पूरी तरह हकदार नही
दवाब मिलने का महबूब पर जो डालता है
किसी नजर से आशिक वो समझदार नही
नही है दूध से धुला हुआ कोई शख्स यहाँ
ज़ुल्फ़ की जंजीरों में कौन गिरफ्तार नही
चैन उड़ता है सभी का ही बेचैन देर सवेर
आज अपना भी उड़ा है मुझे इनकार नही
Friday, 2 December 2011
अपना तो यारी से भरोसा उठ सा गया
कल जिसे ऊँगली पकड़ चलना सिखाया था
आज हमसे ही दौड़ने की शर्त लगा गया
अहसान फरामोशों की बढ़ रही है तादाद
मेरे अल्लाह जमी पर ये कैसा वक्त आ गया
उस दिन समझा औलाद की समझदारी
जब बेटा अपने बाप को नादान बता गया
वो कुत्ते पर जितना आये रोज खर्चता है
गरीब का कुनबा उतने में महिना चला गया
जिस अदा से किया है मुझे बेचैन उसने
अपना तो यारी से भरोसा उठ सा गया
आज हमसे ही दौड़ने की शर्त लगा गया
अहसान फरामोशों की बढ़ रही है तादाद
मेरे अल्लाह जमी पर ये कैसा वक्त आ गया
उस दिन समझा औलाद की समझदारी
जब बेटा अपने बाप को नादान बता गया
वो कुत्ते पर जितना आये रोज खर्चता है
गरीब का कुनबा उतने में महिना चला गया
जिस अदा से किया है मुझे बेचैन उसने
अपना तो यारी से भरोसा उठ सा गया
Thursday, 1 December 2011
बहुत बड़ा कमबख्त इंतजार है वो
वादा खिलाफी में हुशियार है वो
इसलिए तो यारों का यार है वो
सबको नही हासिल आसानी से
बहुत बड़ा कमबख्त इंतजार है वो
मैं ही सोचा विचारी में फसां हुआ हूँ
अपने किये पर कहाँ शर्मसार है वो
ता-उम्र शुमार होगा मेरे अजीजों में
फक्त इसलिए की मेरा इकरार है वो
इसलिए नही बनी उसकी आबरू पर
मेरा गलती से बेचैन रिश्तेदार है वो
इसलिए तो यारों का यार है वो
सबको नही हासिल आसानी से
बहुत बड़ा कमबख्त इंतजार है वो
मैं ही सोचा विचारी में फसां हुआ हूँ
अपने किये पर कहाँ शर्मसार है वो
ता-उम्र शुमार होगा मेरे अजीजों में
फक्त इसलिए की मेरा इकरार है वो
इसलिए नही बनी उसकी आबरू पर
मेरा गलती से बेचैन रिश्तेदार है वो
Sunday, 27 November 2011
पीने के बाद हनुमान बन जाता हूँ
पीने के बाद हनुमान बन जाता हूँ
अपने मोहल्ले की शान बन जाता हूँ
मैं खूब खोलता हूँ पोल पड़ोसियों की
जब सच बोलने की खान बन जाता हूँ
जब लगाते है लोग शर्त मेरे होश पर
तब मैं गीता और कुरआन बन जाता हूँ
कर के देखो मुझसे किसी बात पर बहस
नशे में जहाँ भर का मैं ज्ञान बन जाता है
देता हूँ बेचैन ऊंचाई छोटे भाई को मैं
जाम लगाकर जब आसमान बन जाता हूँ
अपने मोहल्ले की शान बन जाता हूँ
मैं खूब खोलता हूँ पोल पड़ोसियों की
जब सच बोलने की खान बन जाता हूँ
जब लगाते है लोग शर्त मेरे होश पर
तब मैं गीता और कुरआन बन जाता हूँ
कर के देखो मुझसे किसी बात पर बहस
नशे में जहाँ भर का मैं ज्ञान बन जाता है
देता हूँ बेचैन ऊंचाई छोटे भाई को मैं
जाम लगाकर जब आसमान बन जाता हूँ
Friday, 25 November 2011
बस उम्मीद ने ही जीना दुश्वार कर दिया
दुश्मनों की चालों का मैं तो दे दूंगा जवाब
क्या होगा गर दोस्तों ने भी वार कर दिया
अब तक तो यही सिखलाया है तजुर्बे ने
वही मुकरेगा जिसने इकरार कर दिया
वही जुबान कहलाएगी रसभरी दोस्तों
जिसने वादों का तीर दिल के पार कर दिया
महज़ एक वादा वफा करने की चाह में
क्यूं भरोसे का कत्ल तुमने यार कर दिया
बकाया तो सब कुछ काबू में है बेचैन
बस उम्मीद ने ही जीना दुश्वार कर दिया
क्या होगा गर दोस्तों ने भी वार कर दिया
अब तक तो यही सिखलाया है तजुर्बे ने
वही मुकरेगा जिसने इकरार कर दिया
वही जुबान कहलाएगी रसभरी दोस्तों
जिसने वादों का तीर दिल के पार कर दिया
महज़ एक वादा वफा करने की चाह में
क्यूं भरोसे का कत्ल तुमने यार कर दिया
बकाया तो सब कुछ काबू में है बेचैन
बस उम्मीद ने ही जीना दुश्वार कर दिया
Wednesday, 23 November 2011
मेरे हिस्से की मुझको खैरात याद आई
तेरे लबों को देखकर इक बात याद आई
गुलाब को भी अपनी औकात याद आई
सरे बज्म खिलखिलाकर तुम क्या हंसे
मुझको चांदनी की वो बरसात याद आई
मैं यूं इतराया अपनी खुशनसीबी पर
कॉलेज के दिनों की मुलाक़ात याद आई
अनजाने में जब मिलाया उसने हाथ
मेरे हिस्से की मुझको खैरात याद आई
अपनी तरह बेचैन जब देखा इक यार
हमें महोब्बत में मिली वो मात याद आई
गुलाब को भी अपनी औकात याद आई
सरे बज्म खिलखिलाकर तुम क्या हंसे
मुझको चांदनी की वो बरसात याद आई
मैं यूं इतराया अपनी खुशनसीबी पर
कॉलेज के दिनों की मुलाक़ात याद आई
अनजाने में जब मिलाया उसने हाथ
मेरे हिस्से की मुझको खैरात याद आई
अपनी तरह बेचैन जब देखा इक यार
हमें महोब्बत में मिली वो मात याद आई
आज अपने सुदामा को पिला दे कृष्णा
होश का गिरेबां पकड़ के हिला दे कृष्णा
आज अपने सुदामा को पिला दे कृष्णा
कह रहे है लोग तू मस्ती का मालिक है
फिर थोड़ी मेरे जाम में मिला दे कृष्णा
अपना घर बसाऊं या फिर शराब पिऊ
फैसला कोई मजबूत सा सुझा दे कृष्णा
इक बार मिलने से तो दिल ना भरेगा
मुलाक़ात का ख़ास सिलसिला दे कृष्णा
बेचैन रहूँ उम्र भर होश के लिए मैं
तू नशे का फूल ऐसा खिला दे कृष्णा
आज अपने सुदामा को पिला दे कृष्णा
कह रहे है लोग तू मस्ती का मालिक है
फिर थोड़ी मेरे जाम में मिला दे कृष्णा
अपना घर बसाऊं या फिर शराब पिऊ
फैसला कोई मजबूत सा सुझा दे कृष्णा
इक बार मिलने से तो दिल ना भरेगा
मुलाक़ात का ख़ास सिलसिला दे कृष्णा
बेचैन रहूँ उम्र भर होश के लिए मैं
तू नशे का फूल ऐसा खिला दे कृष्णा
Monday, 21 November 2011
काश कुछेक लोगों से रिश्तेदारी ना होती
वो दूर है इसलिए तो याद आता है अक्सर
होते एक ही शहर में तो बेकरारी ना होती
जीऊंगा जब तक ना मिट सकेगा ये धोखा
काश कुछेक लोगों से रिश्तेदारी ना होती
मिल ही जाता हाथों हाथ मेहनत का फल
गर मुझसे मेरे नसीब की पर्देदारी ना होती
ख़ाक खूब पीते है वो लोग जमाने में
सर पर जिसके किसी की उधारी ना होती
आ ही जाती समझ में अगर बात संतों की
फिर दुनिया में बेचैन मारा मारी ना होती
Sunday, 20 November 2011
जंगल में सीधे पेड़ पहले काटे जाते है
जंगल में सीधे पेड़ पहले काटे जाते है
लोग शरीफजादों को इसलिए सताते है
मैंने छुपकर सुनी है अमीरों की बातचीत
वो मुफलिसों को आदमी थोड़े बताते है
तू परदेश में कमाने मत भेज तकदीर
अभी तक मेरे नौनिहाल बहुत तुतलाते है
जड़ों की मिट्टी को ठुकराकर कुछ नही बचेगा
यारों बियाबा के पेड़ रोज़ ही बतियाते है
बस होशमंदों को थोडा होश रहे बेचैन
शराबी नशे में महज़ इसलिए बुदबुदाते है
लोग शरीफजादों को इसलिए सताते है
मैंने छुपकर सुनी है अमीरों की बातचीत
वो मुफलिसों को आदमी थोड़े बताते है
तू परदेश में कमाने मत भेज तकदीर
अभी तक मेरे नौनिहाल बहुत तुतलाते है
जड़ों की मिट्टी को ठुकराकर कुछ नही बचेगा
यारों बियाबा के पेड़ रोज़ ही बतियाते है
बस होशमंदों को थोडा होश रहे बेचैन
शराबी नशे में महज़ इसलिए बुदबुदाते है
Saturday, 19 November 2011
वो सूदखोर नही तो मतलबी जरुर है
ज़हाज़ उड़ाने का उसे काम क्या आया
व्यवहार भी कमबख्त हवाई करता है
यूं तो मिलता है मुझसे भी मुस्कुराकर
मगर पीठ पीछे वो बुराई करता है
मैं मरूंगा जब तुम समझोगे छोटे
क्यूं फ़िक्र का सौदा बड़ा भाई करता है
अपनेपन की उससे उम्मीद ना रखिये
जो शख्स रिश्तों को तमाशाई करता है
वो सूदखोर नही तो मतलबी जरुर है
पैसे की औकात से नपाई करता है
उसको ही बेवकूफ कहती है दुनिया
बिना सोचे जो शख्स भलाई करता है
जीते जी कभी भी खुल सकते है बेचैन
वक्त जिन जख्मो की तुरपाई करता है
व्यवहार भी कमबख्त हवाई करता है
यूं तो मिलता है मुझसे भी मुस्कुराकर
मगर पीठ पीछे वो बुराई करता है
मैं मरूंगा जब तुम समझोगे छोटे
क्यूं फ़िक्र का सौदा बड़ा भाई करता है
अपनेपन की उससे उम्मीद ना रखिये
जो शख्स रिश्तों को तमाशाई करता है
वो सूदखोर नही तो मतलबी जरुर है
पैसे की औकात से नपाई करता है
उसको ही बेवकूफ कहती है दुनिया
बिना सोचे जो शख्स भलाई करता है
जीते जी कभी भी खुल सकते है बेचैन
वक्त जिन जख्मो की तुरपाई करता है
मेरे भीतर की कस्तूरी मुझे भी तो पता लगे
अल्लाह उसकी मजबूरी मुझे भी तो पता लगे
इंतजार के बीच की दूरी मुझे भी तो पता लगे
उलटे-सीधे ख्यालात दिल में पनाह ले रहे है
बेरहम वक्त की मंजूरी मुझे भी तो पता लगे
एक मुद्दत से खा रहा हूँ मैं ठोकरे दर-ब-बदर
मेरे भीतर की कस्तूरी मुझे भी तो पता लगे
महज़ अंदाज़े से उसे बेवफा करार कैसे दे दूं
आखिर दोस्तों बात पूरी मुझे भी तो पता लगे
सीखना पड़ता है बेचैन ये चमचागिरी का हुनर
करूं कितनी कहाँ जी हुजूरी मुझे भी तो पता लगे
इंतजार के बीच की दूरी मुझे भी तो पता लगे
उलटे-सीधे ख्यालात दिल में पनाह ले रहे है
बेरहम वक्त की मंजूरी मुझे भी तो पता लगे
एक मुद्दत से खा रहा हूँ मैं ठोकरे दर-ब-बदर
मेरे भीतर की कस्तूरी मुझे भी तो पता लगे
महज़ अंदाज़े से उसे बेवफा करार कैसे दे दूं
आखिर दोस्तों बात पूरी मुझे भी तो पता लगे
सीखना पड़ता है बेचैन ये चमचागिरी का हुनर
करूं कितनी कहाँ जी हुजूरी मुझे भी तो पता लगे
Thursday, 17 November 2011
अब तो लड़ेंगे यारों आखरी दम तक
जब पहुँच गये है जिंदगी के खम तक
अब तो लड़ेंगे यारों आखरी दम तक
अपनी मौत को तो मौत आने से रही
आजमाकर तो देखे खुद को भ्रम तक
क्या बिगाड़ लेगी दुश्मन की तरकीब
कोई वार ही जब ना पहुंचेगा हम तक
मिटा देगी आदम ज़ात को मजहबी जंग
मत नफरत बिछाईएगा दैरो हरम तक
यूं ही नही खुल जाते जन्नत के दरवाजे
खुदा नापकर देखते है बेचैन करम तक
जिसने काटे हो कभी मुफलिसी के कुत्ते दिन
गरीबों का हमदर्द तो वही शख्स बन पायेगा
जिसने काटे हो कभी मुफलिसी के कुत्ते दिन
अर्श पर ले जाकर बेशक बैठा दो औकात
भूल कर तो दिखाओ जिंदगी के कुत्ते दिन
अपनी हस्ती पर दोस्त ना इतरा इस कदर
जाने कब आ जाएँ आदमी के कुत्ते दिन
मैंने भी महोब्बत करके देखी है दोस्तों
बहुत रुलाते है बेबसी के कुत्ते दिन
ध्यान से उठाना दुःख की तोहमत बेचैन
इतिहास बन जाते है गमी के कुत्ते दिन
जिसने काटे हो कभी मुफलिसी के कुत्ते दिन
अर्श पर ले जाकर बेशक बैठा दो औकात
भूल कर तो दिखाओ जिंदगी के कुत्ते दिन
अपनी हस्ती पर दोस्त ना इतरा इस कदर
जाने कब आ जाएँ आदमी के कुत्ते दिन
मैंने भी महोब्बत करके देखी है दोस्तों
बहुत रुलाते है बेबसी के कुत्ते दिन
ध्यान से उठाना दुःख की तोहमत बेचैन
इतिहास बन जाते है गमी के कुत्ते दिन
Wednesday, 16 November 2011
चुगली समझता हूँ मैल ख्यालात का
समझ गया हूँ खेल है सारा जज्बात का
अब नही मानता मैं बुरा किसी बात का
बेशक कितनी करें बुराई मेरी दुश्मन
चुगली समझता हूँ मैल ख्यालात का
दिन के उजाले में ही होता है सब कुछ
अब इंतजार नही करता कोई रात का
तंज़ कसने वालों से ही सवाल है मेरा
कितना कद होना चाहिए औकात का
कमीन हर हाल में कमीन कहलायेगा
बेशक लबादा ओढ़ता हो मेरी ज़ात का
वो कल क्या करेगा इसकी फ़िक्र छोडो
जमाना है आजकल नगद करामात का
अगली दफा वो ही बाज़ी मारेगा बेचैन
जिसके समझ आया मतलब मात का
अब नही मानता मैं बुरा किसी बात का
बेशक कितनी करें बुराई मेरी दुश्मन
चुगली समझता हूँ मैल ख्यालात का
दिन के उजाले में ही होता है सब कुछ
अब इंतजार नही करता कोई रात का
तंज़ कसने वालों से ही सवाल है मेरा
कितना कद होना चाहिए औकात का
कमीन हर हाल में कमीन कहलायेगा
बेशक लबादा ओढ़ता हो मेरी ज़ात का
वो कल क्या करेगा इसकी फ़िक्र छोडो
जमाना है आजकल नगद करामात का
अगली दफा वो ही बाज़ी मारेगा बेचैन
जिसके समझ आया मतलब मात का
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