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Friday, 11 May 2012

आग तू है तो मैं धुंआ हूँ तेरा

मेरी सांसो से तू निकलकर दिखा
बिन मेरे अ शमा तू पिंघलकर दिखा

ले आया हूँ तुझे इतनी दूर मैं
बिन मेरे दो कदम अब चलकर दिखा

मैं नमी बनकर आँखों में छिप गया
सुर्ख हो जाएगी आँख मलकर दिखा

बिन मेरे लडखडायेगा मयख्वार सा
मैं नही हूँ नशा तो सम्भलकर दिखा

रम चुका हूँ तुम्हारी फितरत में मैं
अपनी आदत से अब तू फिसलकर दिखा

मैं हाथों की रेखाओ में उभर रहा हूँ
तू विधाता का लिखा बदलकर दिखा

आग तू है तो मैं धुंआ हूँ तेरा
बिन मेरे तू बेचैन जलकर दिखा



Tuesday, 8 May 2012

तेरा भी हिस्सा है जमाने की खुशियों में


तैश में आने से रंग काला पड़ जाता है
गुस्से से मेरी जान तू किनारा किया कर

पहले ही गर्मी ने परेशानी बढ़ा रखी है
ठंडे दिमाग से थोडा गुज़ारा किया कर

जो बात मेरी तुझको नागवार लगती है
नही कहूँगा थोडा बस इशारा किया कर

यूं भी तेरी जुदाई में कमजोर हो गया हूं
नाराज होकर ना मुझे छुहारा किया कर

भटकते ही कमबख्त दूर निकल जाते है
तू ज़ज्बात मेरे ना यूं आवारा किया कर

कौन सी रोजाना फरमाइस करता हूँ मैं
चाहे हफ्ते में ही भला हमारा किया कर

तेरा भी हिस्सा है जमाने की खुशियों में
बेचैन सोच में शामिल जहाँ सारा किया कर

Sunday, 6 May 2012

तुमको तुम्हारी इक खता ने डूबोया है

मुझको जैसे मेरी वफा ने डूबोया है
तुमको तुम्हारी इक खता ने डूबोया है

हरेक मौज चिल्लाकर गवाही दे रही है
 कश्ती को यारों नाखुदा ने डूबोया है

मरने के बाद भी जिसे जिन्दा रहना था
उस अहसास को तो दगा ने डूबोया है

पत्थर पूजने का हश्र मालूम हुआ जब से
रो रहा हूँ मुझको श्रद्धा ने डूबोया है

बाप पर तो इल्ज़ाम लगा भी दोगे मगर
किस मुह से कहोगे मुझे माँ ने डूबोया है

सच्ची होती तो शायद जी लेता कुछ दिन
मुझे तुम्हारी झूठी अदा ने डूबोया है

घुटनों के बल ही चला था प्यार अभी बेचैन
जिसको तुम्हारे डर की सदा ने डूबोया है

जो कोई चाँद से मुखड़े को धोखा देगा

यकीनन होगा वो शख्स उल्लू का पट्ठा
जो कोई चाँद से मुखड़े को धोखा देगा

एकदम सीधी सी बात है इश्क में यारों
जो दिल नही दे पाया वो और क्या देगा

जियादा दिन नही चलती झूठी अदाकारी
सच आकर एक दिन तो पर्दा गिरा देगा

प्यार में जरूरत नही फालतू मुखबरी की
बातों का अंदाज़ ही सब कुछ बता देगा

अब क्या कहे उसकी होश्यारी बेचैन
ना सोचा था वो ऐसे बात को घुमा देगा

Friday, 4 May 2012

दिलो दिमाग पर भारी लुत्फे वस्ल क्यूं है

सोचता हूँ नसीब में इतने बल क्यूं है
जीस्त बेवफा तो बावफा अजल क्यूं है

दिल ने तो बुरा चाहा ही नही किसी का
फिर सीने में किसी खौफ की हलचल क्यूं है

वो शख्स जो मेरा कभी हुआ ही ना था
उसकी याद में मेरी आँखें सजल क्यूं है

आंसू भी तो किसी झील की पैदाइश है
फिर इतना मशहूर दुनिया में कमल क्यूं है

हिज्र से भी तो याराना रहा है बरसों
दिलो दिमाग पर भारी लुत्फे वस्ल क्यूं है

अपनों में शामिल और भी तो है बेचैन
फिर तू ही मेरे सब मसलो का हल क्यूं है

ज़ीस्त= जिंदगी   अजल = मौत 
 लुत्फे वस्ल= मिलन का आनंद

उसके पसीने में भी खुशबू आती है

दोस्तों दौर सचमुच कलयुगी आ गया
मैं मुस्कुराया तो वो गाली सुना गया

बच्चे जवान बूढ़े सब पर शक करते है
हुस्नवालों को भ्रम का कीड़ा खा गया

शरीफों को लल्लू समझती है लडकियाँ
कल रात मुझे मेरा महबूब बता गया

देखा जब बिल्लियों को आपस में लड़ते
सच कहता हूँ मुझे तो चक्कर आ गया

पायजामा तक जिसे न पहनना आता था
पड़ा इश्क में तो कमबख्त जींस फसा गया

उसके पसीने में भी खुशबू आती है
पहचान बस बेचैन इतनी बता गया

Thursday, 3 May 2012

उसके सच में भी दोस्तों सफाई नजर आती है

आदमी की हालत जब तमाशाई नजर आती है
उसके सच में भी दोस्तों सफाई नजर आती है

जिसके जो दिल में आये उसी नजर से देखे
गरीब की जोरू सबको लुगाई नजर आती है

सब रसूखदारों से याराना रखने की सजा है
मजबूरी भी यहाँ पर बेवफाई नजर आती है

लोगो के लिए वही तो है असली मजे की जड़
रिश्तेदारों के बीच में जो खाई नजर आती है

माँ बाप की फ़िक्र है यह और कुछ नही यारों
बेटे के शौक में भी जो बुराई नजर आती है

चाँद के पार ले जायेगा तू उसको बेचैन
औकात देखकर तो बातें हवाई नजर आती है



Wednesday, 2 May 2012

हर वक्त खुले रहते है क्यूं गेसू तुम्हारे


हर वक्त खुले रहते है क्यूं गेसू तुम्हारे
किसके लहू से धोने की कसम खाई है

बस इतना जान ले मस्त होने से पहले
 जानलेवा मेरी जान तेरी अंगडाई है

जिस अदा से फेरी तुमने जीभ होठों पर
आज सौ फीसदी किसी की शामत आई है

बेशक नसीब-ओ-हालत लाख बिगड़ जाये
हमने तो तेरा होने की कसम खाई है

मत लगाया कर आँखों में सुरमा बेचैन
पहले ही इन आँखों में बहुत गहराई है

Sunday, 29 April 2012

तुझसे बिछड़ा तो जीते जी मर जाऊंगा


मैं जान दे दूंगा या तुझको पाऊंगा
तुझसे बिछड़ा तो जीते जी मर जाऊंगा

तीसरे दिन मेरा इंतिहान ना ले तू
तैश में जान कभी हद से गुजर जाऊंगा

मेरी हिम्मत है तू हमकदम बनके चल
कामयाबी को मैं बाँहों में भर जाऊंगा

अपनी आँखों में मुझको झाँकने तो दे
मेरा दावा है मैं भी संवर जाऊंगा

पढके रोयेंगे प्यार करने वाले सब
बेबसी लेके गजलो में उतर जाऊंगा

तेरे दामन पे गिरी ओंस की बूँद हूँ
छूकर देखो उंगली पे बिखर जाऊंगा

बन गया है तू मेरी कमजोरी बेचैन
छोड़ उम्मीद मेरी जान सुधर जाऊंगा


Friday, 27 April 2012

भला देखने वाला क्या आँखें फुडवाएगा


जब अदाओं के साथ हुस्न यूं पेश आएगा
भला देखने वाला क्या आँखें फुडवाएगा

बाकायदा मालूम है हलवाई को ये बात
जिसके नसीब में है मिठाई वो खाएगा

कलेजा मुह को आ गया है तस्वीर देखकर
क्या होगा गर तू रूबरू गौर फरमाएगा

अगर हो सके तो छोड़ ये अंदाज़ कतिलाने
वरना आशिको को आपस में भिडवाएगा

मजाक की सौ बातें मगर यह सच है बेचैन
मेरा महबूब  देख तू भी शरमा जाएगा

Thursday, 26 April 2012

जिंदगी तबाह करके इंतिहान ना दे


अपनी इक जिद के पीछे जान ना दे
जिंदगी तबाह करके इंतिहान ना दे

गलत फैंसला तो गलत ही होता है
तू करके जिरह कोई भी बयान ना दे

खुद ही कातिल है तू अपने वजूद का
इल्जाम वक्त के सर मेरी जान ना दे

डरता हूँ ले न जाए बहाकर तुझको
अपने सीने में कोई तूफ़ान ना दे

इंतजार की भी आखिर हद होती है
तू पछताने का खुद को सामान ना दे

आदत पड़ गई तो फिर छूट ना सकेगी
लबो को रोजाना झूठी मुस्कान ना दे

कोई भी मजबूरी नही कहती बेचैन
अपने हिस्से का खुद को आसमान ना दे

Wednesday, 25 April 2012

वो पांचवे दिन वस्ल का वादा कर गया


जिंदगी चार दिन की है कसमकश में हूँ
वो पांचवे दिन वस्ल का वादा कर गया

दिखाकर ख्वाब अगले जन्म का कमबख्त
अहसानमंद मुझको कुछ ज्यादा कर गया

जुल्फों की ज्यूं बातें भी पेंचभरी लगी
वो मना बेशक बे इरादा कर गया

महोब्बत में सच से जिसने गुरेज़ किया
फना उन्हें झूठ का लबादा कर गया

मैं उमर भर जिससे बचता आया था
सद हैफ वो काम दिले-नादां कर गया

औलाद के नाम तकदीर विरासत में
बताओ किसका बाप दादा कर गया

बदनसीबी तो देख राजा की बेचैन
रानी को बस मे एक प्यादा कर गया

वस्ल=मिलन
पेंचभरी=उलझी ,,, सद हैफ = सौ बार अफ़सोस

Tuesday, 24 April 2012

जिंदगी मैं तेरा एतबार तो बन सकता हूँ


हमसफर न सही गमख्वार तो बन सकता हूँ
जिंदगी मैं तेरा एतबार तो बन सकता हूँ

फूलों जितनी अहमियत शायद न हो मेरी
कांटा निकालने वाला खार तो बन सकता हूँ

पाऊँगा तुमको कभी तू जाने या नसीब
मगर तेरा मैं तलबगार तो बन सकता हूँ

हकीकत में तो शायद मेरी औकात ना हो
ख्वाबो में बसा किरदार तो बन सकता हूँ

तू जिसे चाहेगा प्यार तो उसे देगा बेचैन
नफरत का पर मैं हकदार तो बन सकता हूँ

Monday, 23 April 2012


पागल था जनूनी था ना जाने क्या था
वो शख्स दीवानगी की तस्वीरे निहा था

महफ़िल में उसे देखकर हंस रहे  थे सभी
लेकिन मैं उसके दर्द के रूबरू बैठा था

हैरान हुआ आशिक का रोना देख कर
आंसुओ में उसके महबूब का चेहरा था

तुम तो उसकी महफ़िल में सारी रात थे
बता तो सही जिक्र मेरा कैसे चला था

दौरे अलम में जिसने साथ दिया बेचैन
वो शख्स मेरी नजर में एक मसीहा था

तुमको माँ जैसी दुआओं का असर मिलेगा
सजदे में तेरे आशिक का जब सर मिलेगा

शक्ल का क्या ये तो जन्मजात झूठी होती है
मेहनत का समर तो करम देखकर मिलेगा

तुम्हारी कसम मंजिल को दुल्हन बना लूँगा
तुम्हारा प्यार गर मुझको उम्र भर मिलेगा

तंज़ कसना जिनकी फितरत में शामिल हो चुका
उन हाथों में सदा दोस्तों पत्थर मिलेगा

दुःख आने से पहले ही दुखी मत हो बेचैन
हरेक काम में वरना तुझे एक डर मिलेगा

इश्क तूने क्या से क्या मंजर दिखा दिए

इश्क तूने क्या से क्या मंजर दिखा दिए
सब के सब करेले नीम पर चढ़ा दिए

लानत तेरे धडकने पर अ कमबख्त दिल
नई पीढ़ी के तुमने दिमाग सड़ा दिए

अपनी तो समझ से है बाहर माज़रा  
भैन्गों ने भी नजरों के पेंच लड़ा दिए

क्या ख़ाक मजा ले घुड़दौड़ का जनाब
हाथी घोड़े ऊंट एक साथ दौड़ा दिए

मरकर भी बेचैन लोग याद रखते है
महबूब ने जो हंसकर सबक सीखा दिए

गुलों की खुशबू जिस्म में पुरजोर लाये हो



इतनी  सादगी कहाँ से बटोर लायें हो
लगता है खुदा के यहाँ से चोर लाये हो

शर्मों-हया से पलकें झुका कर चलना
हंसने की अदा काबिले गौर लाये हो

क्यूंकर ना परेशां हो देखकर वो चाँद
जुल्फों के साए में चेहरा चकोर लाये हो

देखकर महफ़िल में हर कोई कह रहा है
जुल्फें नही ज़ालिम रेशम की डोर लाये हो

सुनते ही लगे झूमने लोग होकर दीवाने
सावन के महीने का पायल में शोर लाये हो

हर कोई तुम्हारी और खिंचा जा रहा है
गुलों की खुशबू जिस्म में पुरजोर लाये हो

क्यूंकर ना बढ़े धडकने देखकर बेचैन
तवज्जो आज अपना मेरी ओर लाये हो

हां आज भी मैं गरीबी से प्यार करता हूँ



मुफलिसी मेरी माँ थी स्वीकार करता हूँ
हां आज भी मैं गरीबी से प्यार करता हूँ

ज्यादा बड़ा अब भी वजूद नही है मेरा
फिर भी छोटा होने का इकरार करता हूँ

औकात की बात आप न करो तो अच्छा
मैं हैसियत वालों पे कम एतबार करता हूँ

शोहरत और दौलत मेरी नौकरानी होगी
मैं मन ही मन दोस्तों इंतजार करता हूँ

लगाकर दिल काँटों से कभी कभी बेचैन
मैं फूलों को भी अक्सर शर्मसार करता हूँ

एक प्यार स्कूली को खड़ा सामने पाता हूँ



बचपन से जवानी तक जब नजरें दौड़ाता हूँ
एक प्यार स्कूली को खड़ा सामने पाता हूँ

नही भूला हूँ दोनों ही हम उमर के कच्चे थे
अहसास में पर यारों हम बिलकुल सच्चे थे
बंद करता हूँ जब आँखें कही खो सा जाता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

उस जैसी सादगी और मुस्कान नही देखी
कहने को तो दुनिया में खूब निगाह फेंकी
हाय उसकी नजाकत पर सर को झुकाता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

रातों को उठ उठ कर मैंने रोकर भी देखा हैं
तन्हाइयों में सिसकी का होकर भी देखा हैं
नहीं कुछ भी हुआ हासिल यारों पछताता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

कितना ही मेरे दाता मेरे हिस्से कयामत दे
याददाश्त को भी बेशक कोई भी आफत दे
पर पाठ महोब्बत का नही भूलना चाहता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................

नही बात अकेले की मैं सबकी करता हूँ
इल्जाम महोब्बत का हर सर पे धरता हूँ
यहाँ बेचैन हैं हर कोई सरेआम बताता हूँ
एक प्यार स्कूली को..................


दुश्मन ही मेरा हिसाब रखते




मुझे मुनीमों की क्या जरूरत
दुश्मन ही मेरा हिसाब रखते

अपने जरूरी काम भूलकर भी
याद मेरा वो हर ख्वाब रखते

हो चाहे चुगली बनाम बेशक
वो चर्चा मेरी बेहिसाब रखते

नशे की हद तक गुजरते है वो
जो जाम के संग कबाब रखते

ना यादें इतना महकती उनकी
ना किताबों में जो गुलाब रखते

निहाल होते डूबकर दोनों बेचैन
जो नसीब में कोई चनाब रखते