Friends
Sunday, 29 January 2012
Tuesday, 24 January 2012
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा
तुझसे अब ना कोई शिकवा गिला करूंगा
आगे से जिंदगी मैं कम ही मिला करूंगा
जब तुझे ही नही है कोई ख़ास दिलचस्पी
किसलिए मुलाकातों का सिलसिला करूंगा
जब तय हो चुका तू नही जीत का हासिल
फिर क्यूं साथ यादों का काफिला करूंगा
हो सके तो करना मेरी बात का यकीन
मैं कही भी रहूँ तेरे लिए दुआ करूंगा
कसमकस में शायद अब न रहूँ ज्यादा दिन
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा
कम से कम इश्क के मामले में सीख लिया
ज़ज्बात में बहकर न किसी का भला करूंगा
अब नही गुजरूँगा अहसास के जंगल से
वादा रहा बेचैन सम्भल कर चला करूंगा
आगे से जिंदगी मैं कम ही मिला करूंगा
जब तुझे ही नही है कोई ख़ास दिलचस्पी
किसलिए मुलाकातों का सिलसिला करूंगा
जब तय हो चुका तू नही जीत का हासिल
फिर क्यूं साथ यादों का काफिला करूंगा
हो सके तो करना मेरी बात का यकीन
मैं कही भी रहूँ तेरे लिए दुआ करूंगा
कसमकस में शायद अब न रहूँ ज्यादा दिन
मिलते ही पहली फुरसत फैंसला करूंगा
कम से कम इश्क के मामले में सीख लिया
ज़ज्बात में बहकर न किसी का भला करूंगा
अब नही गुजरूँगा अहसास के जंगल से
वादा रहा बेचैन सम्भल कर चला करूंगा
Saturday, 21 January 2012
तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी
देख लेना उस पल तुम्हारी भर आएँगी आँखें
मेरे ना होने की जब तुम तक खबर पहुंचेगी
मेरी चीख सुनाई देगी तेरे ज़हन में हरसू
तुम्हारे कसूर तक जब तुम्हारी नजर पहुंचेगी
याद आएगी जब पथराई आँखों की बेबसी
इक आह तेरी रूह तक जाने जिगर पहुंचेगी
मैं तो शहर से क्या दुनिया से ही जा चुका हूँगा
बता तो फिर चाय पीने तू किसके घर पहुंचेगी
शर्त लगा ले तब तक पैदा हो जायेगा अफ़सोस
तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी
मेरे ना होने की जब तुम तक खबर पहुंचेगी
मेरी चीख सुनाई देगी तेरे ज़हन में हरसू
तुम्हारे कसूर तक जब तुम्हारी नजर पहुंचेगी
याद आएगी जब पथराई आँखों की बेबसी
इक आह तेरी रूह तक जाने जिगर पहुंचेगी
मैं तो शहर से क्या दुनिया से ही जा चुका हूँगा
बता तो फिर चाय पीने तू किसके घर पहुंचेगी
शर्त लगा ले तब तक पैदा हो जायेगा अफ़सोस
तू बेचैन होकर जब तक अपने पीहर पहुंचेगी
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता
तन्हाई में गजले मेरी गुनगुनाकर तो देखता
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता
गिर जाता कोई न कोई आंसू तेरे दामन पर
मेरी याद में पलकें झिलमिलाकर तो देखता
मेरी दीवानगी से ही तू घबराता रहा सदा
मेरा प्यार अपने डर से टकराकर तो देखता
मैं उतना पागल नही हूँ तू जितना सोचता है
समझ जाता बात प्यार से समझाकर तो देखता
जुल्फों के साथ ख्याल भी तेरे उलझे रहे सदा
सुलझा देता बेचैन जिक्र उठा कर तो देखता
चाहने वालों की तरह तू चाहकर तो देखता
गिर जाता कोई न कोई आंसू तेरे दामन पर
मेरी याद में पलकें झिलमिलाकर तो देखता
मेरी दीवानगी से ही तू घबराता रहा सदा
मेरा प्यार अपने डर से टकराकर तो देखता
मैं उतना पागल नही हूँ तू जितना सोचता है
समझ जाता बात प्यार से समझाकर तो देखता
जुल्फों के साथ ख्याल भी तेरे उलझे रहे सदा
सुलझा देता बेचैन जिक्र उठा कर तो देखता
बच्चे की तरह पालूंगा ता-उम्र तुम्हारी याद
बच्चे की तरह पालूंगा ता-उम्र तुम्हारी याद
तुम ले जाना इसे बेशक जवान होने पर
तेरे इश्क ने ही सिखाया है मुझको सबक
पछताता है आदमी सच का ज्ञान होने पर
यकीन का नाम सुना है तो कर थोडा यकीन
बुरा भला बकता हूँ कुछ परेशान होने पर
मैं तो खुद पर इतरा रहा हूँ पाकर तुझको
तू भी कुछ गरूर कर मेरी जान होने पर
अगर नही मालूम तो बता देता हूँ तुझको
मन शक पर शक धरता है बेईमान होने पर
तेरे प्यार की जरा सी मुझे हवा क्या लगी
खूब रोता हूँ कच्चे दिल का इंसान होने पर
मुझे लेकर बेचैन कोई किसलिए होगा भला
क्यूं याद रखेगा पहलू में आसमान होने पर
तुम ले जाना इसे बेशक जवान होने पर
तेरे इश्क ने ही सिखाया है मुझको सबक
पछताता है आदमी सच का ज्ञान होने पर
यकीन का नाम सुना है तो कर थोडा यकीन
बुरा भला बकता हूँ कुछ परेशान होने पर
मैं तो खुद पर इतरा रहा हूँ पाकर तुझको
तू भी कुछ गरूर कर मेरी जान होने पर
अगर नही मालूम तो बता देता हूँ तुझको
मन शक पर शक धरता है बेईमान होने पर
तेरे प्यार की जरा सी मुझे हवा क्या लगी
खूब रोता हूँ कच्चे दिल का इंसान होने पर
मुझे लेकर बेचैन कोई किसलिए होगा भला
क्यूं याद रखेगा पहलू में आसमान होने पर
Wednesday, 18 January 2012
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ
उसे उल्टा सीधा बोलकर खूब रोता हूँ
या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ
शीशे की तरह साफ़ है इश्क के हालात
फिर भी रोज नये ख्वाब क्यूं संजोता हूँ
तेरी याद में मंगल वीर सब एक समान
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ
मुस्कुराना अपनी जगह मगर सच है यह
आजकल चैन की नींद नही सोता हूँ
अब भी वही जवाब है उसका बेचैन
मैं ही सवालातों का बोझ ढोता हूँ
या रब मैं इतना गुस्सा क्यूं होता हूँ
शीशे की तरह साफ़ है इश्क के हालात
फिर भी रोज नये ख्वाब क्यूं संजोता हूँ
तेरी याद में मंगल वीर सब एक समान
बता कौन से दिन पलकें ना भिगोता हूँ
मुस्कुराना अपनी जगह मगर सच है यह
आजकल चैन की नींद नही सोता हूँ
अब भी वही जवाब है उसका बेचैन
मैं ही सवालातों का बोझ ढोता हूँ
Tuesday, 17 January 2012
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा
आंसू की शक्ल में ना कोई भ्रम निकलेगा
पथराई आँखों से अब तो दम निकलेगा
फिर करता हूँ आज मैं एक बार वादा
न जीते जी दिल से तेरा गम निकलेगा
मान जा सितमगर बहुत देर हो जाएगी
जब तक तेरी जुल्फों का खम निकलेगा
ओढ़ लेगा तन्हाई छोड़ कर आवारगी
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा
कर चुके होंगे लोग तेहरवी बेचैन
सुध लेने जब तक तेरा सनम निकलेगा
खम=उलझन
पथराई आँखों से अब तो दम निकलेगा
फिर करता हूँ आज मैं एक बार वादा
न जीते जी दिल से तेरा गम निकलेगा
मान जा सितमगर बहुत देर हो जाएगी
जब तक तेरी जुल्फों का खम निकलेगा
ओढ़ लेगा तन्हाई छोड़ कर आवारगी
कल से तेरा यार घर से कम निकलेगा
कर चुके होंगे लोग तेहरवी बेचैन
सुध लेने जब तक तेरा सनम निकलेगा
खम=उलझन
Monday, 16 January 2012
अपनी महबूबा को मैं ढाढ़ी में रखता हूँ
यूं गौर चेहरे की खेती बाड़ी में रखता हूँ
इसलिए नही आती मुझे सफर में दिक्कत
उसकी तस्वीर हमेशा गाडी में रखता हूँ
मालूम हुआ है जब से उसका पसंदीदा रंग
तब से बीवी को नीली साडी में रखता हूँ
यही तो सबब है मेरी सांसे महकने का
उसे छिपाकर दिल की फुलवाड़ी में रखता हूँ
बता जीते जी कैसे वो दूर होगा बेचैन
लहू सा उसे शरीर की नाडी में रखता हूँ
Sunday, 15 January 2012
फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
कितना ही तलाश करना नजर नही आऊंगा
तुम्हारी जिंदगी से जब मैं दूर चला जाऊंगा
फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
तुम्हारी हरकतों पर कौन सा टोकने आऊंगा
बेशक से बहाना आंसू मेरी बातें याद करके
कौन सा मैं पिंघल कर उनको पोंछने आऊंगा
मैं हिन्दू हूँ जान मेरी तो कब्र भी ना बनेगी
तुम देख लेना राख के ढेर में बदल जाऊंगा
जाओ ये भी वादा रहा तेरे बेचैन का तुमसे
क्यूं आई मौत राज अपने साथ ले जाऊंगा
तुम्हारी जिंदगी से जब मैं दूर चला जाऊंगा
फिर वही करना जो तुम्हारे दिल ने सोचा है
तुम्हारी हरकतों पर कौन सा टोकने आऊंगा
बेशक से बहाना आंसू मेरी बातें याद करके
कौन सा मैं पिंघल कर उनको पोंछने आऊंगा
मैं हिन्दू हूँ जान मेरी तो कब्र भी ना बनेगी
तुम देख लेना राख के ढेर में बदल जाऊंगा
जाओ ये भी वादा रहा तेरे बेचैन का तुमसे
क्यूं आई मौत राज अपने साथ ले जाऊंगा
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी
अच्छा किया मुझे मेरी औकात याद दिला दी
जो भूल चुका मैं मुझे वो बात याद दिला दी
क्यूं रहेगी बता तेरी यादों की जमी बंजर
तूने आंसुओ की जब बरसात याद दिला दी
ज्यादा ही हवा में मैं उड़ने लगा था शायद
जो तुमने नसीब में मिली मात याद दिला दी
तन्हाई बेबसी और दर्द से डरकर भाग रहे
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी
इक हादसा बनकर आने का शुक्रिया बेचैन
है जिंदगी कितनी वाहियात याद दिला दी
जो भूल चुका मैं मुझे वो बात याद दिला दी
क्यूं रहेगी बता तेरी यादों की जमी बंजर
तूने आंसुओ की जब बरसात याद दिला दी
ज्यादा ही हवा में मैं उड़ने लगा था शायद
जो तुमने नसीब में मिली मात याद दिला दी
तन्हाई बेबसी और दर्द से डरकर भाग रहे
बेवकूफ शायर को उसकी ज़ात याद दिला दी
इक हादसा बनकर आने का शुक्रिया बेचैन
है जिंदगी कितनी वाहियात याद दिला दी
Saturday, 14 January 2012
जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
अगर मुझको भ्रम है तो मेरा भ्रम तोड़ दो
नही बिगड़ा है अब भी कुछ, मुझको छोड़ दो
मन के किसी कोने में गर दिल्लगी का भूत है
जितना जल्दी हो सके उसका सर फोड़ दो
जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
चुपचाप गरीब आशिक का हिसाब जोड़ दो
हो सके तो खाना रहम मेरा पहला प्यार है
कही ऐसा ना निम्बू सा मुझको निचोड़ दो
बस तेरा नाम लेकर मिल लेंगे बेचैन
चाहे जहाँ भर के गम मेरी और मोड़ दो
नही बिगड़ा है अब भी कुछ, मुझको छोड़ दो
मन के किसी कोने में गर दिल्लगी का भूत है
जितना जल्दी हो सके उसका सर फोड़ दो
जा नही करता तेरे प्यार की मजदूरी
चुपचाप गरीब आशिक का हिसाब जोड़ दो
हो सके तो खाना रहम मेरा पहला प्यार है
कही ऐसा ना निम्बू सा मुझको निचोड़ दो
बस तेरा नाम लेकर मिल लेंगे बेचैन
चाहे जहाँ भर के गम मेरी और मोड़ दो
कहाँ फंसी फिर बुदबुदाई होगी मगर कोई आसपास होगा
उसे मेरी याद तो आई होगी मगर कोई आसपास होगा
जुदाई के मारे मेरी हालत का अंदाज़ा लगाने पर यारों
उसकी आँख तो भर आई होगी मगर कोई आसपास होगा
बैठकर आईने आगे वो आज तो शायद सिंगार करते वक्त
अपने आप से बतियाई होगी मगर कोई आसपास होगा
उसकी फितरत में शामिल वही झूठा इक पुराना अफ़सोस
कहाँ फंसी फिर बुदबुदाई होगी मगर कोई आसपास होगा
शायद चुराकर सबसे नजरे उसने आह भरते हुवे बेचैन
मेरी गजल तो गुनगुनाई होगी मगर कोई आसपास होगा
Friday, 13 January 2012
कामयाबी दोस्तों किसी भी शक्ल में गौर फरमा सकती है
दरवाजे से ही नही दीवार फांदकर भी आ सकती है
कामयाबी दोस्तों किसी भी शक्ल में गौर फरमा सकती है
भूलकर भी मत करना मेहनतकस से कभी बेईमानी
उसकी एक बददुआ तुमको अर्श से फर्श पर ला सकती है
दुश्मन में हुनर है तो उसकी भी तारीफ करो दिल से
ना जाने कौन सी बात जिंदगी जीना सीखा सकती है
गलत अंदाजे लगा बेकार में मायूस होकर मत बैठो
यहाँ आपके काम की तारीफ कभी भी की जा सकती है
जल्दी बेचैन मत हो सब्र का फल चखकर तो देख
तकदीर तुम्हारी दोस्त कभी भी तो पलटा खा सकती है
कामयाबी दोस्तों किसी भी शक्ल में गौर फरमा सकती है
भूलकर भी मत करना मेहनतकस से कभी बेईमानी
उसकी एक बददुआ तुमको अर्श से फर्श पर ला सकती है
दुश्मन में हुनर है तो उसकी भी तारीफ करो दिल से
ना जाने कौन सी बात जिंदगी जीना सीखा सकती है
गलत अंदाजे लगा बेकार में मायूस होकर मत बैठो
यहाँ आपके काम की तारीफ कभी भी की जा सकती है
जल्दी बेचैन मत हो सब्र का फल चखकर तो देख
तकदीर तुम्हारी दोस्त कभी भी तो पलटा खा सकती है
तुमसे मिलने जब आऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
तुमसे मिलने जब आऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
मैं अपना नाम बताऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
किसी रोज भीड़ से निकल कर अचानक कभी तुमको
अपना चेहरा दिखाऊँ, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
ऑनलाइन देती हो तुम रोजाना जितना प्यार
रूबरू मांगने आऊं, मुझे पहचान तो लोगी ना..?
ख्वाब जैसे अहसास के रिश्ते को आगे बढ़ा कर
कभी हकीकत बन जाऊं , मुझे पहचान तो लोगी ना..?
भूली बिसरी किसी बज्म में होकर बेचैन तुमको
जब कोई गजल सुनाऊँ , मुझे पहचान तो लोगी ना..?
Thursday, 12 January 2012
इसलिए चाहता हूँ कुछ बात है तुझमे
मूंगफली और रेवड़ी सा स्वाद है तुझमे
इसलिए चाहता हूँ कुछ बात है तुझमे
मकर सक्रांति आई तो याद आया कुछ
गज्जक जैसे मिठास सी करामात है तुझमे
रोते हुवे बच्चों को झट गोद में ले लेते हो
क्या खूब गजब के ख्यालात है तुझमे
दुनिया जबकि मसखरों की मेरी जान
किसलिए इतने गहरे ज़ज्बात है तुझमे
मरने के बाद भी दोगे तो चलेगा बेचैन
आंसुओ भरी एक उधारी रात है तुझमे
इसलिए चाहता हूँ कुछ बात है तुझमे
मकर सक्रांति आई तो याद आया कुछ
गज्जक जैसे मिठास सी करामात है तुझमे
रोते हुवे बच्चों को झट गोद में ले लेते हो
क्या खूब गजब के ख्यालात है तुझमे
दुनिया जबकि मसखरों की मेरी जान
किसलिए इतने गहरे ज़ज्बात है तुझमे
मरने के बाद भी दोगे तो चलेगा बेचैन
आंसुओ भरी एक उधारी रात है तुझमे
मुझे तो मेरा महबूब खुदा दिखता है
कमबख्त गिरगिट तो नही था पिछले जन्म में
तेवर का रंग बार बार जुदा दिखता है
आपको लगता होगा वो आम किरदार
मुझे तो मेरा महबूब खुदा दिखता है
वही लोग झेलते है प्यार में दिक्कते
जिन्हें आसमान दूर तक झुका दिखता है
बाद में करना लोगों की बात का यकीं
बता मेरी आँखों में तुझे क्या दिखता है
जाने क्यों सताता है तुझे बार बार वो
आदमी तो तू बेचैन भला दिखता है
तेवर का रंग बार बार जुदा दिखता है
आपको लगता होगा वो आम किरदार
मुझे तो मेरा महबूब खुदा दिखता है
वही लोग झेलते है प्यार में दिक्कते
जिन्हें आसमान दूर तक झुका दिखता है
बाद में करना लोगों की बात का यकीं
बता मेरी आँखों में तुझे क्या दिखता है
जाने क्यों सताता है तुझे बार बार वो
आदमी तो तू बेचैन भला दिखता है
Wednesday, 11 January 2012
उसे गणित में फंसाकर तूने अच्छा नही किया
दोजख में भी तुझको पंडित जगह ना मिलेगी
महबूब बरगलाकर तूने अच्छा नही किया
राहू-शनि के डर से मुलाक़ात नही करता
उसे गणित में फंसाकर तूने अच्छा नही किया
तेरी बात तुझको भारी पड़ेगी एक दिन
यूं झूठी कसम खाकर तूने अच्छा नही किया
फिर कुछेक कमीनो से हाथ मिलाना पड़ेगा
मुझे बज्म में बुलाकर तूने अच्छा नही किया
बिना बेचैन किये भी तो समझा सकता था
बातों को उलझाकर तूने अच्छा नही किया
महबूब बरगलाकर तूने अच्छा नही किया
राहू-शनि के डर से मुलाक़ात नही करता
उसे गणित में फंसाकर तूने अच्छा नही किया
तेरी बात तुझको भारी पड़ेगी एक दिन
यूं झूठी कसम खाकर तूने अच्छा नही किया
फिर कुछेक कमीनो से हाथ मिलाना पड़ेगा
मुझे बज्म में बुलाकर तूने अच्छा नही किया
बिना बेचैन किये भी तो समझा सकता था
बातों को उलझाकर तूने अच्छा नही किया
Tuesday, 10 January 2012
ढाढ़ी क्या बढ़ी वो बेचारा दिखने लगा
ढाढ़ी क्या बढ़ी वो बेचारा दिखने लगा
अंधे को भी इश्क का मारा दिखने लगा
चुराने लगा आँखे हर एक बात पर जब
हरकतों में छिपा हाल सारा दिखने लगा
महबूब का साथ उसको क्या मिला यारों
कमबख्त में हर वक्त तरारा दिखने लगा
सदियों से जिसे जमाना ताज कह रहा था
गरीब आशिक को वो ईंट गारा दिखने लगा
दिखाया उसने जब दिल का छाला बेचैन
वो उसी पल से अक्स हमारा दिखने लगा
अंधे को भी इश्क का मारा दिखने लगा
चुराने लगा आँखे हर एक बात पर जब
हरकतों में छिपा हाल सारा दिखने लगा
महबूब का साथ उसको क्या मिला यारों
कमबख्त में हर वक्त तरारा दिखने लगा
सदियों से जिसे जमाना ताज कह रहा था
गरीब आशिक को वो ईंट गारा दिखने लगा
दिखाया उसने जब दिल का छाला बेचैन
वो उसी पल से अक्स हमारा दिखने लगा
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