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Friday, 23 December 2011

कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों

दीवानगी को पागलपन का करार देने वालों
बहुत पछताओगे जीत को हार देने वालों

कभी कभी वक्त पर भी आ जाया करो कमबख्तों
महबूब को महोब्बत में इंतजार देने वालों

तुम्हारे भी तो बन सकते है गोली का निशाना
इंसानियत के दुश्मनों को हथियार देने वालों

कभी आम आदमी के दर्द को भुगत कर देखो
मंचों से भीड़ को इंकलाबी विचार देने वालों

मन की ताकत बढती है सच बोलने से बेचैन
आजमाकर देखो झूठा करार देने वालों

पिछली मुलाकात की इक बात अधूरी है

पिछली मुलाकात की इक बात अधूरी है
वो बात ये थी तुम बिन हयात अधूरी है

सर अपनी गोद से मेरा मत उठाओ जान
अभी मेरी आँखों की बरसात अधूरी है

मैं भी देखूँगा रोज तुम भी देखना चाँद
कही भी रहे निगाहों की मुलाक़ात जरूरी है

वो मान जाये बेशक मेरी बात का बुरा
संग है महबूब तो वस्ल बिना रात अधूरी है

कितना बड़ा हो जाये किरदार तेरा बेचैन
सितमगर के बिना अब तो औकात अधूरी है

Thursday, 22 December 2011

तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर

कुछ भी नही पाओगे शायर से दिल लगाकर
देखना पछताओगे शायर से दिल लगाकर

जमाने की गिनती पहाड़े कम जानता है
तुम कैसे निभाओगे शायर से दिल लगाकर

तुझे रखेगा हर वक्त अहसास के जंगल में
बहुत डर जाओगे शायर से दिल लगाकर

तुझे हर गजल में लगेगा महबूब इक नया
तुम शक पर शक जताओगे शायर से दिल लगाकर

तेरी जुल्फों की तरह ख्याल भी उलझ जायेंगे
किसको सुलझाओगे शायर से दिल लगाकर

होना पड़ेगा आपको  बेचैन हर बात पर
कितनी कसम खाओगे शायर से दिल लगाकर

खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये

खुशखबरी के झोंके आपसे अक्सर मिलने आये
खुदा करे आप तरक्कीकी सीढ़ी चढ़ते जाये

हरेक ख्वाब हकीकत बनकर चले आपके संग
मेहनत के लम्हे देवें  कामयाबी की दुआएं

घर में दोस्तों में और तमाम रिश्तेदारों में
आपके आसमान छूने की खूब चले चर्चाये

अव्वल तो कोई दर्द-ओ-गम ना मिले आपको
अगर मिलता है तो वो मेरी और सरक जाएँ

चेहरे की चमक बढ़े चांदनी सा बिखरे नाम
बेचैन मेरे महबूब के हक में चले हवाए


Tuesday, 20 December 2011

तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो

मेरे भीतर के शैतान से यारी कर लो
तुम हदों को तोड़ने की तैयारी कर लो

चेहरा बोल देगा मन की हर एक बात
आखिर कितनी ही तो हुश्यारी कर लो

जो नसीब में नही है कभी नही मिलेगा
तुम कितनी ही दोस्त मारामारी कर लो

नही घेरते है जब तक मुझे ऐब रिश्तेदारों
कितनी ही मेरे घर पर बमबारी कर लो

चंदा लेने आ रही है सियासत आपके द्वार
बचना है तो खुद को खदरधारी कर लो

मन में छिपा शख्स बाहर जरुर झांकेगा
तुम कितनी भी बेचैन कलाकारी कर लो

Sunday, 18 December 2011

होती मेरी माँ तो आज मुझे खूब धमकाती

होती मेरी माँ तो आज मुझे खूब धमकाती
दर्दे इश्क में पड़कर क्यूं खुदखुशी कर रहा है

खून के आंसू रुलायेगे तुझे तेरे ही असआर
शायरी में धंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है

आसमां की और थूकोगे तो मुहं पर गिरेगा
दूसरो पर हंसकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है

तेरी दीवानगी और पागलपन कौन सराहेगा
जिंदगी से बचकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है

झटके में लगा दे होश ठिकाने जिंदगी के
टुकडो में बंटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है

कयामत तक कोई नही याद रखेगा तुझको
जमाने से कटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है

भूल जा बेचैन किसने क्या कहा था तुझको
बातों से लिपटकर क्यूं खुदखुशी कर रहा है






मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया

मैं उससे कभी मिलने की कोशिश ना करूंगा
कमबख्त ज़ज्बात में मुझसे हामी भरा गया

पानी की जगह शराब में मिला रहा हूँ आंसू
मेरी तकदीर में अल्लाह कैसा दौर आ गया

यही सोचकर कर लिया उसने मुझसे किनारा
कहाँ किस सरफिरे का उस पर दिल आ गया

जल्दी से आकर रख बेचैन हाथ मेरे दिल पर
आँखों के सामने यह कैसा अन्धेरा छा गया

उसकी चालाकी है या वक्त की नजाकत बेचैन
मुझसे बात बातों में ज़ालिम पीछा छुड़ा गया 

दिल का मसला तो मुझसे ही सुलझेगा

दिल का मसला तो मुझसे ही सुलझेगा
सत्संग में जाकर वक्त खराब ना कीजे

नसीब में लिखा है तो हो जायेगा मिलन
बैठ के बेकार जुदाई का हिसाब ना कीजे

सोचने से पहले लोग फसाना बना देंगे
मुझको देख कर आँखें पुर आब ना कीजे

आबरू और समाज पर पड़ जाए महंगी
कभी भी ऐसी हरकत मेरे जनाब ना कीजे

सब घड़ी भर की बेकरारी होती है बेचैन
आप अपने आपको इतना बेताब ना कीजे


Saturday, 17 December 2011

आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है

जोशे जवानी में ना तुम आओ ना हम आये
आओ बुज़ुर्गवारों की तरह प्यार करते है

कमीनी है दुनिया साथ साथ रहने नही देगी
चलो मन ही मन आपस में इजहार करते है

हम बिस्तर पकड़ लेंगे तो ख्याल खूब घेरेंगे
आज से थोडा थोडा खुद को बीमार करते है

इश्क में उन्ही के हिस्से में आती है शर्मिंदगी
जो खुद को हद से ज्यादा होशियार करते है

उनको हर हाल में होता है उनको घाटा बेचैन
अक्सर दिल लेने देने का जो व्यपार करते है




अपनी माँ को भी इतना ही चाहता था

अपनी माँ को भी इतना ही चाहता था
मैं जितना आज तुझसे प्यार करता हूँ

इससे पहले की लोग मुझे कहे दीवाना
मैं खुद सरे महफ़िल इकरार करता हूँ

तुम्ही कहो किसकी कसम खाकर कहू
मैं जन्मों से तुम्हारा इंतजार करता हूँ

डूब सा जाता हूँ आखों की गहराइयों में
तेरी तस्वीर का मैं जब दीदार करता हूँ

इसीलिए तो जीतूँगा दिल की बाज़ी बेचैन
खुद से जियादा तुम पर एतबार करता हूँ

Friday, 16 December 2011

देखा जब से तुझे हंसते शमा सा पिंघलता हूँ

तेरी तस्वीर तकता हूँ और करवट बदलता हूँ
देखा जब से तुझे हंसते शमा सा पिंघलता हूँ

इससे और ज्यादा क्या कहू दीवानगी अपनी
तुम्हारा नाम ले लेकर मैं नींद में चलता हूँ

याद आती है जब तुमको न पाने की मजबूरी
कभी रोता हूँ सिसकी ले,कभी हाथ मलता हूँ

शहर में लौटने की तुमने जबसे बात बताई है
कैसी होगी मुलाक़ात सोचकर मैं मचलता हूँ

सदा यूं खाद पानी देते रहना प्यार की मुझको
तेरे दिल में भी मैं अगर पौधे सा पलता हूँ

बात कर लेते हो जिस दिन अपने बेचैन से तुम
मैं उस दिन बच्चों की तरह सारा दिन उछलता हूँ




वो चाँद के जैसे शरमाता रहे

हंसकर मेरे ख़्वाबों में आता रहे
वो ता-उम्र यूं ही मुस्कुराता रहे

वो रहम मुझ पर ना खाए बेशक
मुफलिसों पर तरस खाता रहे

मजा आ रहा हैं प्यार करने का
वो मुझे रोजाना ही सताता रहे

देखकर लोग यूं ही तारीफे करे
वो चाँद के जैसे शरमाता रहे

हर जन्म में तुम्हारा बेचैन
वो महबूब ही विधाता रहे

इसीलिए शायद साफ़ दिल कहते है उसे

वो जवाब के साथ सवालात छोड़ देता हैं
सोचते ही रहो ऐसे ज़ज्बात छोड़ देता हैं

जाने कहाँ से लाया है महोब्बत की अदा
बिगाड़कर दिल के हालात छोड़ देता हैं

उसके सिवा तो खुदा ही जानता है उसे
काम की अधूरी हर बात छोड़ देता हैं

इसीलिए शायद साफ़ दिल कहते है उसे
कडवे विचारों को हाथों हाथ छोड़ देता हैं

सांप से भी खतरनाक है वो शख्स बेचैन
जो केचुली की तरह औकात छोड़ देता है

Thursday, 15 December 2011

मुझसे मेरी जान यूं भागा मत कर

मुझसे मेरी जान यूं भागा मत कर
तेरे हक में उठती हुई दुआ हूँ मैं

टकटकी लगाकर देख तस्वीर मेरी
फिर बताइयेगा की कैसा हूँ मैं

अब जीते जी कैसे छुड़ाओगे पीछा
लहू बनकर तेरी रगों में रवां हूँ

ख़ुशी में बेशक मुझे याद ना कर
मगर गम की तेरे लिए दवा हूँ मैं

बेचैनी और शकुन दोनों मिलेंगे
आंसू का एक ऐसा कतरा हूँ मैं

बेवजह बेचैन मुझपर शक ना कर
रो पडूंगा बहुत ज्यादा दिलजला हूँ

Wednesday, 14 December 2011

हर शख्स मुझको अब दीवाना कहता है

वो हवा बन करके सांसो में यूं बहता है
खुशबू का झोंका जैसे गुलों में रहता है

मेरी हरकतों में जाने ऐसा क्या हो गया
हर शख्स मुझको अब दीवाना कहता है

रखी गई हो जिस पर झूठ की बुनियाद
महोब्बत में वो किला बनते ही ढहता है

अबतक इसीलिए शायद धडक रहा है दिल
वो लहू बनकर रगों में हर वक्त बहता हैं

अपनापन तो उससे हो गया है बेचैन
बेगानों के नखरो को भला कौन सहता है

Tuesday, 13 December 2011

ज़ज्बात का खरगोश निशाना था उसका

उम्र भर के साथ को तो गोली मारो
वो हमसे दो दिन में ही खफा हो गये

मुद्दत से भर रहा था जिनमे में रंग
झटके में ख्वाब सारे सफा हो गये

ज़ज्बात का खरगोश निशाना था उसका
कमबख्त करके शिकार दफा हो गये

यह खूब रही इश्क ने राख कर डाला
जलाकर मुझे कमबख्त धुंआ हो गये

गम का जश्न मना बोतल खोल ले बेचैन
सब वादे महोब्बत के जफा होग गये

तुमको पाया तो लगा इंतज़ार अच्छा था

इकरार से सौ गुना इनकार अच्छा था
तुमको पाया तो लगा इंतज़ार अच्छा था

तारे गिनने का क्या काम सौंपा तुने इश्क
आशिक बनने से पहले बेकार अच्छा था

छोड़ दिया उसने मेरा हाल चाल पूछना
ठीक होने से तो मैं बीमार अच्छा था

अब बेचैन रहता हूँ जबसे जवानी आई है
पहले यारों बचपन वाला करार अच्छा था

दोस्ती के नाते सही हंसकर तो बोलते थे
इस बेरुखी से तो उसका प्यार अच्छा था





Monday, 12 December 2011

उसने छोड़ने की धमकी दी है

उसने छोड़ने की धमकी दी है
दिल को तोड़ने की धमकी दी है

मेरी रातें तन्हाइयों के साथ
फिर से जोड़ने की धमकी दी है

कशमकश में हूँ क्या करूं उसने
गुमनामी ओढने की धमकी दी है

वो जनता है मैं चल नही सकता
उसने दौड़ने की धमकी दी है

करके बहाना जमाने का बेचैन
दिल को मोड़ने की धमकी दी है

होश वालों से पूछो उन्हें कब शर्म आती है

शौक नही है पीने का मजबूरी पिलाती है
मूड़ बनता है तब जब उसकी याद आती है

दर्दे-दिल बर्दाश्त करना सबके बस का नही
इसे वो समझेगा लोहे की जिसकी छाती है

दगा देता है जब यार प्यार और रिश्तेदार
दवा के भेष में शराब ही साथ निभाती है

उस दिन तो दोस्तों हर हाल में जाम लगाता हूँ
जब लड़ाई के अंदेशे से बाई आँख फडफडाती है

खूब लिहाज़ बरतता हूँ पीने के बाद बेचैन
होश वालों से पूछो उन्हें कब शर्म आती है


अच्छे अच्छे तन्हाई के हवाले किए है

इश्क तूने खूब गडबड घोटाले किए है
अच्छे अच्छे तन्हाई के हवाले किए है

कर दिया साबित पल में दिल को बच्चा
प्यार ने पैदा ऐसे ऐसे दिलवाले किए है

जां छिडकने को मजबूर हुवे है परवाने
शमा ने जब भी दोस्तों उजाले किए है

सरे बज्म की है जिसने चुगली किसी की
उसकी जुबान पर वक्त ने छाले किए है

बढ़ी है जिन धडकनों की रफ्तार बेचैन
उस दिल ने काम सबसे ही निराले किए है